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Aligarh News: हाथरस से शुरू हुआ परम संत गया प्रसाद का वैराग्य

Mon, 27 Oct 2025 01:19 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Oct 2025 01:19 AM IST
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The renunciation of supreme saint Gaya Prasad started from Hathras.
शहर में आज ब्रज के परम संत पं. गया प्रसादजी की 133वीं जंयती मनाई जा रही है। उन्होंने अपनी कर्म स्थली हाथरस से ही वैराग्य धारण किया। कृष्ण प्रेम का अहसास भी उन्हें हाथरस में हुई रासलीला के दौरान हुआ। गोवर्धन के तलहटी के साथ शहर की श्रीकृष्ण गोशाला के गोवर्धन के चरणों में उनका विश्राम स्थल मौजूद है।
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फतेहपुर जनपद के गांव कल्याणीपुर के रामाधीन मिश्र के घर 1950 में ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्मे पं. गया प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। फिर अध्ययन के लिए फतेहपुर के ही गांव एकडला में अपनी मौसी के घर चले गए। वहां वेद व शास्त्रों की शिक्षा व दीक्षा पं. गौरीदत्त त्रिपाठी से ली। उनसे ही व्याकरण, संस्कृत साहित्य, ज्योतिष, कोष, कर्मकांड आदि का ज्ञान लिया।
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इस दौरान उनके पिता जीविकोपार्जन के लिए परिवार को लेकर हाथरस आ गए। इस दौरान वृंदावन के लाडली शरण की रास मंडली हाथरस शहर में आई। पंडितजी के मित्र पं.जनार्दन चतुर्वेदी के मंदिर में रासलीला हुई। वह उसे उसे देखने गए। वहां भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप ने अपने कंठ की माला उतारकर पंडित जी के गले में डाल दी। बस यहीं से उनके मन में श्रीकृष्णके लिए प्रेम उत्पन्न हो गया। उस रात वह सोये नहीं। जब रास मंडली वृंदावन लौट गई तो पंडितजी भी वह भी वहीं पहुंच गए। रास मंडली वहां से राजस्थान के नाथद्वारा गई तो पंडितजी भी साथ गए। वहां श्रीकृष्ण व श्रीनाथ जी में एकरूपता समझकर उन्हीं में तन्मय हो एक माह तक वहीं आराधना की और वैराग्य धारण किया।
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गोवर्धन के राधाकुंड स्थित बगीची में भी किया वास
1936 में पं. गया प्रसाद श्रावण के अधिमास में गोवर्धन परिक्रमा के लिए गए और फिर वहीं गिरिराज महाराज की सेवा में लीन हो गए। वैराग्य तो पहले ही धारण कर चुके थे। यहां उन्होंने महात्मा वेश धारण कर पूर्ण विरक्ति को अंगीकार कर लिया। वहां राधाकुंड के पास मिर्ची महाराज की बगीची में रहने लगे। नित्य गिरिराज की परिक्रमा का भी उन्होंने नियम बनाया और यह शरीर में सामर्थ्य रहने तक निभाया।



शहर के घंटाघर के पास लगी ही प्रतिमा

पं. गया प्रसाद जी महाराज के नाम से घंटाघर स्थित चौक का सुंदरीकरण कराया गया है। यहां एक बड़े स्थान पर संत गया प्रसाद की प्रतिमा लगवाई गई है। इस स्थान को काफी सुंदर तरीके से बनाया गया है, जिसपर संगरमर का पत्थर लगाया गया। इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। सुबह-शाम यहां बाबा की पूजा-अर्चना व आरती के लिए भक्त पहुंचते हैं। अपने जीवनकाल में हाथरस के मोहल्ला जागेश्वर स्थित स्कूल में अध्यापन कार्य किया।



हाथरस लेकर आए अस्थि-अवशेष
पं. गया प्रसाद जी ने अपना जीवन गोवर्धन की तलहटी में बिताया और वहीं से 11 सितम्बर 1994 को गोलोकवासी हुए। उनके शरीरत्याग के बाद, उनके अस्थि-अवशेषों को उनके परम सेवक व श्रीकृष्ण गोशला के व्यवस्थापक श्याम कुमार शर्मा गोवर्धन से ले आए। इसे श्रीकृष्ण गोशाला के मंदिर भूतल में पधरवाया गया।
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