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ससुराल-मायके वाले हैरान... वरना बच जाती पिंकी की जान

Fri, 26 Jun 2020 01:51 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 01:51 AM IST
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The in-laws were surprised, otherwise Pinky's life would have survived
शैलेंद्र व पिंकी का फाइल फोटो। - फोटो : CITY OFFICE
अभिषेक शर्मा
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समाज में कभी कभी ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, जो हैरान कर देती हैं। बुधवार रात बरौला जाफराबाद की पथवारी वाली गली में कुछ ऐसा ही हुआ। जब पति की गोली का शिकार हुई पत्नी पिंकी को लोगों ने सिसकते देखा तो किसी ने उसे अस्पताल ले जाना मुनासिब नहीं समझा। बस मोहल्ले वालों ने पुलिस को सूचना देकर अपना फर्ज पूरा कर लिया। कहने को इसी गली में मात्र 100 मीटर की दूरी पर पिंकी का मायका भी है। वह लोग भी यहां पहुंच गए थे। मगर, ससुराल के साथ-साथ मायके वाले भी घर में तीन-तीन लाशों को देख हैरान और परेशान थे। उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें?
ऐसे में किसी ने सूझ-बूझ का परिचय नहीं दिया। 15-20 मिनट बाद जब पुलिस पहुंची और फिर एंबुलेंस को बुलाकर पिंकी को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया तो वहां डॉक्टरों ने कुछ देर के इलाज के बाद मृत घोषित करते हुए यही अफसोस जताया कि अगर इसे कुछ देर पहले लाइफ सपोर्ट सिस्टम मिल जाता तो बचाने की उम्मीद थी। बस कुछ मिनट की देरी हो गई। खुद सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव ने बोझिल मन से यह बात स्वीकारते हुए बताया कि जब वह इंस्पेक्टर बन्नादेवी संग मौके पर पहुंचे तो लोग हाथ लगाने तक को तैयार नहीं हो रहे थे। चूंकि, महिला पुलिसकर्मी साथ नहीं थे। इसलिए बड़ी मुश्किल से कुछ महिलाओं को तैयार कर पिंकी को बेड से घर की एक चारपाई पार लिटाया और फिर गली के बाहर खड़ी एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। यह काम अगर पुलिस के आने से पहले मोहल्ले वालों ने कर लिया होता और पिंकी को पुलिस का इंतजार किए बिना अस्पताल ले गए होते तो शायद एक जान बच जाती।
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गली में ही है पिंकी का भी मायका
जिस गली में शैलेंद्र व विशाल का घर है, उसी गली में पिंकी का मायका भी महज 100 मिटर की दूरी पर है। पिंकी के पिता राज मिस्त्री का काम करते हैं। घर में एक बड़ी बहन के अलावा दो भाई एक छोटी बहन भी है। इस मौत पर उसका परिवार भी बेहद परेशान है और कोहराम के हालात हैं।
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