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अलीगढ़ः वर्चुअल प्रचार से टेंट व साउंड कारोबारियों को झटका
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प्रदीप गंगा।
- फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक तायल
कोरोना की मार झेल रहे व्यापारी वर्ग को चुनाव में भी मायूसी हाथ लगी है। चुनावों में रोड शो, रैली, बड़ी चुनावी सभाओं पर रोक लगने के बाद टेंट व साउंड कारोबारियों का बट्टा बैठ गया है। जिले की सातों विधानसभाओं पर वर्चुअल प्रचार हो रहा है। इससे टेंट कारोबारियों को झटका लगा है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले चुनावों में करीब 5 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। जो इस साल 10 फीसदी से भी कम पर सिमट कर रह गया है।
जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 400 टेंट कारोबारी हैं। वहीं सौ से सवा सौ साउंड कारोबारी हैं। दो साल से कोरोना की मार झेल रहे कारोबारियों ने चुनाव के कारण पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थीं, लेकिन वर्चुअल प्रचार ने उन्हें झटका दे दिया। उनका कहना है कि काम न मिलने से उनका काफी नुकसान हो रहा है। इस साल उन्हें उम्मीद थी की व्यापार और ज्यादा होगा।
2017 में करीब पांच करोड़ का व्यापार हुआ
उत्तर प्रदेश टेंट एंड बैंक्विट हाल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय महरोत्रा ने बताया कि जिले में करीब 400 टेंट कारोबारी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सातों विधानसभा को मिलाकर करीब 5 करोड़ का व्यापार हुआ था। टेंट के अलावा कुर्सी, मेज, एलईडी स्क्रीन, फर्श, वीआईपी सोफे आदि सभी चीजों की व्यवस्था होती है। अब वर्चुअल प्रचार के चलते काम न के बराबर है। 10 फीसदी से भी कम काम बचा है। ऐसे में कारोबारियों ने जो पहले से तैयारियां कर रखी थी वो भी बेकार हैं।
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जर्मन पंडाल बढ़ाते थे पीएम-सीएम की शोभा
कारोबारियों ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2017 में जर्मन पंडाल सीएम व पीएम की रैलियों में लगता था। जो काफी मंहगा होता है। इसका रेट लगभग 60 रुपये वर्ग फुट है। बड़ी चुनावी सभाओं में ये पंडाल लगाए जाते थे। करीब 25 से 30 लाख रुपये का खर्चा होता था। जिसमें अच्छी कमाई हो जाती थी। यह पंडाल वाटर प्रूफ होता है।
वर्चुअल प्रचार ने ठप किया कारोबार
अलीगढ़ टेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप गंगा ने बताया कि पिछले चुनावों में जिले में लगभग 20 बड़ी रैली व चुनावी सभाएं होती थीं। इससे व्यापारियों को अच्छा काम मिल जाता था। प्रत्येक व्यापारी लगभग 5 से 10 लाख रुपये का काम तो कर ही लेता था। व्यापारियों ने इस साल चुनाव के चलते पहले से ही तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन वर्चुअल प्रचार ने पूरा कारोबार ठप कर दिया।
साउंड के काम को भी झटका लगा
पुरुषोत्तम साउंड के स्वामी पुरुषोत्तम गुप्ता ने बताया कि विधानसभा चुनावों में अच्छा खासा काम मिल जाता था। करीब सौ से सवा साउंड कारोबारी जिले में मौजूद हैं। रैली, रोड शो, चुनावी सभाओं व प्रचार-प्रसार में काम मिलता था। जो इस साल खत्म हो गया है। पहले से ही कोरोना के चलते शादी विवाह में भी काम कम था। चुनावों से उम्मीद थी। उसने भी झटका दे दिया। 20 प्रतिशत काम बचा है।
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कोरोना की मार झेल रहे व्यापारी वर्ग को चुनाव में भी मायूसी हाथ लगी है। चुनावों में रोड शो, रैली, बड़ी चुनावी सभाओं पर रोक लगने के बाद टेंट व साउंड कारोबारियों का बट्टा बैठ गया है। जिले की सातों विधानसभाओं पर वर्चुअल प्रचार हो रहा है। इससे टेंट कारोबारियों को झटका लगा है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले चुनावों में करीब 5 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था। जो इस साल 10 फीसदी से भी कम पर सिमट कर रह गया है।
जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 400 टेंट कारोबारी हैं। वहीं सौ से सवा सौ साउंड कारोबारी हैं। दो साल से कोरोना की मार झेल रहे कारोबारियों ने चुनाव के कारण पहले से ही तैयारियां पूरी कर ली थीं, लेकिन वर्चुअल प्रचार ने उन्हें झटका दे दिया। उनका कहना है कि काम न मिलने से उनका काफी नुकसान हो रहा है। इस साल उन्हें उम्मीद थी की व्यापार और ज्यादा होगा।
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2017 में करीब पांच करोड़ का व्यापार हुआ
उत्तर प्रदेश टेंट एंड बैंक्विट हाल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय महरोत्रा ने बताया कि जिले में करीब 400 टेंट कारोबारी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सातों विधानसभा को मिलाकर करीब 5 करोड़ का व्यापार हुआ था। टेंट के अलावा कुर्सी, मेज, एलईडी स्क्रीन, फर्श, वीआईपी सोफे आदि सभी चीजों की व्यवस्था होती है। अब वर्चुअल प्रचार के चलते काम न के बराबर है। 10 फीसदी से भी कम काम बचा है। ऐसे में कारोबारियों ने जो पहले से तैयारियां कर रखी थी वो भी बेकार हैं।
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जर्मन पंडाल बढ़ाते थे पीएम-सीएम की शोभा
कारोबारियों ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2017 में जर्मन पंडाल सीएम व पीएम की रैलियों में लगता था। जो काफी मंहगा होता है। इसका रेट लगभग 60 रुपये वर्ग फुट है। बड़ी चुनावी सभाओं में ये पंडाल लगाए जाते थे। करीब 25 से 30 लाख रुपये का खर्चा होता था। जिसमें अच्छी कमाई हो जाती थी। यह पंडाल वाटर प्रूफ होता है।
वर्चुअल प्रचार ने ठप किया कारोबार
अलीगढ़ टेंट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप गंगा ने बताया कि पिछले चुनावों में जिले में लगभग 20 बड़ी रैली व चुनावी सभाएं होती थीं। इससे व्यापारियों को अच्छा काम मिल जाता था। प्रत्येक व्यापारी लगभग 5 से 10 लाख रुपये का काम तो कर ही लेता था। व्यापारियों ने इस साल चुनाव के चलते पहले से ही तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन वर्चुअल प्रचार ने पूरा कारोबार ठप कर दिया।
साउंड के काम को भी झटका लगा
पुरुषोत्तम साउंड के स्वामी पुरुषोत्तम गुप्ता ने बताया कि विधानसभा चुनावों में अच्छा खासा काम मिल जाता था। करीब सौ से सवा साउंड कारोबारी जिले में मौजूद हैं। रैली, रोड शो, चुनावी सभाओं व प्रचार-प्रसार में काम मिलता था। जो इस साल खत्म हो गया है। पहले से ही कोरोना के चलते शादी विवाह में भी काम कम था। चुनावों से उम्मीद थी। उसने भी झटका दे दिया। 20 प्रतिशत काम बचा है।