जय जगदंबे: शारदीय नवरात्र शुरू, नवरात्र में इन बातों का रखें खास ध्यान
15 से 23 अक्तूबर शारदीय नवरात्र रहेंगे। रविवार को घट स्थापना के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त प्रात: काल 7:48 से दोपहर 12:05 तक चर, लाभ और अमृत के तीन विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे। घरेलू, व्यापारी एवं पढ़ने- लिखने वाले लोगों के लिए यह समय उत्तम माना जाएगा। दोपहर 1:30 से दोपहर 3:00 के बीच एक और शुभ मुहूर्त उपलब्ध होगा। 23 अक्तूबर को नवमी तिथि पर दुर्गानवमी का पूजन होगा।
विस्तार
शारदीय नवरात्र को लेकर उपवास की तैयारियां शुरू हो गई है। नौ दिनों तक माता रानी का पूजन होगा। इससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाएगा। सभी देवी मंदिरों में इस बार भव्य एवं खास तैयारी की गई है। भजन- कीर्तन समेत धार्मिक अनुष्ठान होंगे। घरों में भी देवी का पूजन होगा। भक्तों ने नवरात्र की पूर्व संध्या पर बाजार में माता रानी की चुनरी, नारियल, मेवा, प्रसाद, पूजन की थाल और फलाहार की खरीदारी की। रेलवे रोड, रामघाट रोड, सुदामापुरी, एटा चुंगी, नौरंगाबाद, आगरा रोड, नौरंगाबाद, बारहद्वारी, सेंटर प्वाइंट, क्वार्सी चौराहा आदि बाजारों में दुकानें सज गई है। भक्तों ने माता की प्रतिमा के साथ ही घट की स्थापना करने की तैयारी कर ली है। नवरात्र व्रत पर महंगाई का खासा असर देखने को मिल रहा है। व्रत से कूटू आटा, सिंघाडा आटा, राम साबूदाना आदि सामग्री की कीमतें बढ़ी हुई है। फलों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
घट स्थापना के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा के अनुसार 15 से 23 अक्तूबर शारदीय नवरात्र रहेंगे। रविवार को घट स्थापना के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त प्रात: काल 7:48 से दोपहर 12:05 तक चर, लाभ और अमृत के तीन विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे। घरेलू, व्यापारी एवं पढ़ने- लिखने वाले लोगों के लिए यह समय उत्तम माना जाएगा। दोपहर 1:30 से दोपहर 3:00 के बीच एक और शुभ मुहूर्त उपलब्ध होगा। 23 अक्तूबर को नवमी तिथि पर दुर्गानवमी का पूजन होगा। 24 अक्तूबर को विजयदशमी पर मां दुर्गा मुर्गे पर सवार होकर देवलोक को गमन करेंगी।
पितरों को भावभीनी विदाई
श्राद्ध पक्ष शनिवार को सम्पन्न हो गया। पितृ विसर्जन अमावस्या पर पितरों को भावभीनी विदाई दी गई। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के 16 दिनों के दौरान पितर धरती पर उतरते हैं और अमावस्या के दिन उनकी विदाई की जाती है। विदाई देने के साथ ही उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। इस मौके पर सभी पितरों का श्राद्ध और पिंडदान किया गया। बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान को पहुंचे और पवित्र गंगाजल में डुबकी लगाकर उन्होंने दान-पुण्य भी किया।
नवरात्र में रखें खास ध्यान
यदि नवरात्रि में नौ दिनों का व्रत पहली बार रख रहे हैं तो जाहिर सी बात है इसमें आपको खानपान का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा वरना कभी सिरदर्द, कभी लो एनर्जी, कभी कमजोरी परेशान करती रहेगी। नौ दिनों का उपवास एक या दो दिन में ही खत्म करना पड़ जाएगा। व्रत में भी खानपान की ऐसी-ऐसी चीजें मौजूद हैं जो न सिर्फ आपकी भूख को शांत रखती है और उनका एनर्जी लेवल भी बना रहता हैं। व्रत में सेंधा नमक, काली मिर्च, चीनी, शहद, गुड़, जीरा, लाल मिर्च पाउडर, सरसों, हरी मिर्च, हरी धनिया, अदरक और नींबू का रस, अमचूर और हर तरह के साबुत मसाले आप व्रत में बनाए जाने वाले खानपान में इस्तेमाल कर सकते हैं। सिंघाडे के आटे की लप्सी, सूखे मेवे, कूटु के आटे की पूरी, समां के चावल की खीर, आलू, आलू का हलवा भी लें सकते है। दूध, दही, घीया आदि का फलाहार करना चाहिए।
नौ देवी मंदिर
शहर के नौरंगाबाद स्थित नौ देवी मंदिर सिद्ध पीठों में से एक है। यहां नौ देवियां विराजमान हैं। जो नवरात्र में भक्तों के ऊपर अपरंपार कृपा करती हैं। इसीलिए बड़ी संख्या में भक्तों की कतार यहां लगती है जो भी भावना के साथ मां के दरबार में आता है उसकी मनोकामना देवी मैया जरूर पूरी करती हैं। नौरंगाबाद नौ देवी मंदिर सनातन धर्म के अखाड़ा से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां महंत की नियुक्ति अखाड़े की ओर से होती है। नवरात्र के समय नौ देवी मैया के दर्शन करने के लिए पूरे शहर से भक्तों का सैलाब में पड़ता है। यहां मान्यता है कि जो भी भक्त नंगे पांव मां के दर्शन के लिए अपने घरों से चल पड़ता है उसे मैया जरूर पूर्ण करती हैं। इसलिए शहर के कोने चारों तरफ से भक्तगण बड़ी संख्या में नंगे पैर मां के दर्शन को आते हैं। परिसर में बेरीकेडिंग लगा दी गई है। भक्तों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए सेवादार मुस्तैद रहेंगे।
पथवारी मंदिर
हाथरस अड्डा स्थित पथवारी देवी मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि माता रानी के दरबार में मत्था टेकने आने वाले भक्तों की हरेक मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भक्तों की पूजा-अर्चन को कतार लगी रहती है।
चामुंडा देवी मंदिर
गांधीपार्क बस स्टैंड के पास चामुंडा देवी मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्रबिंदु है। यहां माता रानी अपने भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। इसके अलावा शहर के महेंद्र नगर स्थित काली मंदिर, अचल ताल स्थित मां दुर्गा मंदिर, गायत्री मंदिर, कामाख्या देवी मंदिर, काली मंदिर में भक्तों का अपार सैलाव उमड़ेगा।