फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Student union elections in the new season has begun mobilization

नए सत्र में छात्र संघ चुनाव को लेकर शुरू हो गई गोलबंदी

Sun, 12 Jun 2016 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 12 Jun 2016 01:34 AM IST
विज्ञापन
Student union elections in the new season has begun mobilization
एएमयू
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नए सत्र में छात्र संघ चुनाव कराने को लेकर छात्र नेताओं ने गोलबंदी शुरू कर दी है। हालांकि अभी यह प्रयास चुपके-चुपके चल रहा है और यूनिवर्सिटी खुलने के बाद इस मांग को तेज करने की योजना है। यूजीसी ने भी 27 मई के ताजा पत्र द्वारा लिंग्दोह की सिफारिशों के अनुसार छात्र संघ चुनाव कराने से संबंधित कदम उठाने का निर्देश केंद्रीय विश्वविद्यालयों को दिया है।
विज्ञापन

लिंग्दोह की सिफारिशों के अनुसार नया सत्र शुरू होने के 6 से 8 सप्ताह के भीतर छात्र संघ का गठन हो जाना चाहिए। इस हिसाब से देखे तो एएमयू में सितंबर तक छात्र संघ का गठन हो जाना चाहिए। एएमयू में एक परंपरा यह भी है कि 17 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सर सैयद डे समारोह को एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष संबोधित करते है। मौजूदा सत्र (2015-16) में मांग के बावजूद एएमयू छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए।
विज्ञापन

इसकी वजह से छात्रों को अपनी मांगों से संबंधित बात रखने को प्लेटफार्म नहीं मिला। पिछले एक-डेढ़ वर्षो में ऐसे हालात आए, जब छात्रों ने संघ की कमी महसूस की। पिछले वर्ष छात्र आलमगीर की कैंपस में दिन दहाड़े हत्या के बाद छात्र यूनियन की कमी महसूस कर रहे थे। 23 अप्रैल 2016 की रात में दो पूर्व छात्रों की हत्या, आगजनी एवं फायरिंग की घटना के बाद भी छात्र संघ की जरूरत को छात्र महसूस कर रहे है। प्लेटफार्म के अभाव में छात्र अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पाए और एएमयू छात्रों की बदनामी ज्यादा हुई। छात्रों का यह भी कहना है कि छात्र संघ होता तो बाब-ए-सैयद पर रात में छात्राओं को धरना पर बैठने की नौबत नहीं आती। एएमयू के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि छात्राएं रात भर सामूहिक धरना पर बैठी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 मौजूदा हालात को देखते हुए छात्र यूनियन को लेकर खुलकर बोलने से कतरा रहे है। उन्हें डर है कि मांग करने पर उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। ऐसे छात्रों की दलील है कि छात्र संघ के अभाव में कुछ ‘बिचौलिए’ नेता इंतजामिया से सांठ-गांठ कर अपना मतलब साध रहे है। यूनिवर्सिटी में हंगामा एवं बवाल में भी ऐसे लोगों का ही हाथ होता है। छात्रों से संबंधित किसी जरूरी मसले पर आवाज बुलंद करने वाले छात्र नेता इंतजामिया के रडार पर आ जाते है और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है।
--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed