Aligarh: आटोमैटिक जलेंगी-बुझेंगी स्ट्रीट लाइटें, हर माह बचेंगे 15 लाख, पूरे शहर में लगाए जा रहे 1050 सीसीएमएस
इस प्रोजेक्ट के साथ एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिसे आई-सीसीसी (एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर) सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद फरवरी से स्ट्रीट लाइटों का ऑटोमेटिक संचालन शुरू हो जाएगा।
विस्तार
अलीगढ़ शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को आटोमैटिक ऑन-ऑफ सिस्टम से लैस किया जा रहा है। दिन में जलने वाली स्ट्रीट लाइटें बंद रहेंगी और हर महीने डेढ़ लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। जिससे नगर निगम को लगभग 15 लाख रुपये के अतिरिक्त खर्च से मुक्ति मिलेगी।
स्ट्रीट लाइटों को ऑटोमेटिक ऑन-ऑफ प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इसी महीने में केबलिंग और 1050 सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीसीएमएस) लगाने का काम पूरा हो जाएगा। प्रत्येक सिस्टम से 30 से 50 स्ट्रीट लाइटें जुड़ी होंगी। झांसी की कंपनी ने जोन एक व दो में और मैट्रीक्स प्राइवेट लिमिटेड ने जोन तीन और चार में इसका सर्वे पूरा कर लिया है।
इस प्रोजेक्ट के साथ एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जिसे आई-सीसीसी (एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर) सिस्टम से जोड़ा जाएगा। सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद फरवरी से स्ट्रीट लाइटों का ऑटोमेटिक संचालन शुरू हो जाएगा। जिससे लाइटें रात में स्वतः जलेंगी और सुबह अपने आप बुझ जाएंगी।
स्ट्रीट लाइटों को आटोमैटिक ऑन-ऑफ करने का कार्य कंपनियां तेजी से पूरा कर रहीं हैं। केबल बिछाने और सिस्टम अपडेट करने का कार्य जनवरी में पूरा हो जाएगा। फरवरी में संचालन शुरू हो जाएगा। यह प्रदेश का पहला नगर निगम है, जहां स्ट्रीट लाइटों का संचालन आटोमैटिक होगा।-अजय कुमार सक्सेना, एक्सईएन बिजली विभाग नगर निगम।
ऐसे बचेंगे 15 लाख
शहर में लगभग 65 हजार स्ट्रीट लाइटें (20 से 110 वॉट) हैं। औसतन 70 वॉट की खपत मानकर गणना करें तो एक लाइट प्रति घंटा 0.07 यूनिट बिजली खर्च करती है। औसतन एक दिन में 45,500 और माह भर में 13.65 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। करीब 10 हजार लाइटें दिन में भी जलती रहती हैं। दिन में लाइटें जलने के कारण करीब डेढ़ लाख यूनिट बिजली की बर्बादी हो रही है। हर माह लगभग 15 लाख रुपये इसमें बर्बाद हो जाते हैं। अब इस धनराशि को बचाया जा सकेगा।