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सपा विधायक गुड्डू पंडित को घेरा, हाथापाई
अलीगढ़
Updated Mon, 28 Dec 2015 02:42 AM IST
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अलीगढ़/हरदुआगंज। रविवार को बिटिया के गांव पहुंचे बुलंदशहर की डिबाई विधानसभा से सपा विधायक गुड्डू पंडित के समक्ष लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। बिटिया के परिजनों, रिश्तेदारों व अन्य ग्रामीणों ने विधायक को घेर लिया। सपा विरोधी नारे गूंजे और हंगामा शुरू हो गया। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। बमुश्किल विधायक समर्थकों ने उन्हें बचाया।
गुस्साए लोगों का आरोप था कि सत्ताधारी नेता केवल घड़ियाली आंसू् बहाने आ रहे हैं कोई कुछ कर नहीं रहा है। बिटिया के असली हत्यारे अभी तक नहीं पकड़े गए हैं। उनकी विधानसभा छर्रा के विधायक ठा. राकेश सिंह भी घटना के जल्द खुलासे का दावा कर गए थे, लेकिन नतीजा कुछ नहीं है।
महिलाओं के तेवर देखकर विधायक की भी हालत खराब हो गई। खुद विधायक ने स्थिति को संभाला और न्याय दिलाने का भरोसा देकर वहां से निकल लिए। गौर हो कि बीते बुधवार को हरदुआगंज इलाके में 11वीं की छात्रा को कोचिंग जाते वक्त ईख के खेत में घसीटा गया था, जहां उसके साथ गैंगरेप के बाद गला दबा कर हत्या कर दी गई थी।
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विधायक गुड्डू पंडित रविवार को बिटिया के गांव पहुंचे। उन्होंने वहां बिटिया के घर के बाहर बैठकर इस घटना की जानकारी की। लेकिन विधायक जी राजनीति से बाज नहीं आए। अपनी उपलब्धियां गिनाने लगे। बोले आप लोगों ने अलीगढ़ से सांसद नहीं बनवाया.? अगर मैं होता तो आज इंसाफ हो चुका होता..। ये सुनकर लोगों का आक्रोश भड़कने लगा।
इधर, जब बिटिया के परिवार की महिलाओं व अन्य परिजनों को यह पता चला कि सत्ताधारी पार्टी के विधायक आए हैं तो आक्रोशित महिलाएं, अन्य परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण वहां आ गए। बिटिया की बहनों व महिलाओं ने गुड्डू पंडित को घेरकर खरीखोटी सुनाना शुरू कर दिया।
बिटिया की बहन बोली कि पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक पुलिस सही खुलासा नहीं कर सकी है। सत्ताधारी नेता केवल घड़ियाली आंसू बहाने आ रहे हैं। तुम्हारी सरकार ने कुछ नहीं किया है। इससे काम नहीं चलेगा। ग्रामीण बोले कि उन्हें न्याय चाहिए। विधायक ने जब आक्रोशित लोगों को समझाने की कोेशिश की तो नौबत हाथापाई तक पहुंच गई।
धक्कामुक्की के बीच विधायक ने खुद को वहां से निकाला। विधायक के साथ आए कुछ लोगों ने माहौल को सामान्य करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विधायक जी जब आए हैं तो कम से कम बिटिया की मां से तो मिल जाएं, लेकिन स्थिति को बिगड़ा देख विधायक घर के अंदर जाने से डरने लगे।
बाद में जब उन्होंने हालात थोड़े सामान्य देखे तो यह कहते हुए कि वह तो दिलासा देने के लिए आए हैं, घर में बिटिया की मां का हालचाल पूछकर परिजनों को आश्वासन देकर चले गए।
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गुस्साए लोगों का आरोप था कि सत्ताधारी नेता केवल घड़ियाली आंसू् बहाने आ रहे हैं कोई कुछ कर नहीं रहा है। बिटिया के असली हत्यारे अभी तक नहीं पकड़े गए हैं। उनकी विधानसभा छर्रा के विधायक ठा. राकेश सिंह भी घटना के जल्द खुलासे का दावा कर गए थे, लेकिन नतीजा कुछ नहीं है।
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महिलाओं के तेवर देखकर विधायक की भी हालत खराब हो गई। खुद विधायक ने स्थिति को संभाला और न्याय दिलाने का भरोसा देकर वहां से निकल लिए। गौर हो कि बीते बुधवार को हरदुआगंज इलाके में 11वीं की छात्रा को कोचिंग जाते वक्त ईख के खेत में घसीटा गया था, जहां उसके साथ गैंगरेप के बाद गला दबा कर हत्या कर दी गई थी।
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विधायक गुड्डू पंडित रविवार को बिटिया के गांव पहुंचे। उन्होंने वहां बिटिया के घर के बाहर बैठकर इस घटना की जानकारी की। लेकिन विधायक जी राजनीति से बाज नहीं आए। अपनी उपलब्धियां गिनाने लगे। बोले आप लोगों ने अलीगढ़ से सांसद नहीं बनवाया.? अगर मैं होता तो आज इंसाफ हो चुका होता..। ये सुनकर लोगों का आक्रोश भड़कने लगा।
इधर, जब बिटिया के परिवार की महिलाओं व अन्य परिजनों को यह पता चला कि सत्ताधारी पार्टी के विधायक आए हैं तो आक्रोशित महिलाएं, अन्य परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण वहां आ गए। बिटिया की बहनों व महिलाओं ने गुड्डू पंडित को घेरकर खरीखोटी सुनाना शुरू कर दिया।
बिटिया की बहन बोली कि पांच दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक पुलिस सही खुलासा नहीं कर सकी है। सत्ताधारी नेता केवल घड़ियाली आंसू बहाने आ रहे हैं। तुम्हारी सरकार ने कुछ नहीं किया है। इससे काम नहीं चलेगा। ग्रामीण बोले कि उन्हें न्याय चाहिए। विधायक ने जब आक्रोशित लोगों को समझाने की कोेशिश की तो नौबत हाथापाई तक पहुंच गई।
धक्कामुक्की के बीच विधायक ने खुद को वहां से निकाला। विधायक के साथ आए कुछ लोगों ने माहौल को सामान्य करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विधायक जी जब आए हैं तो कम से कम बिटिया की मां से तो मिल जाएं, लेकिन स्थिति को बिगड़ा देख विधायक घर के अंदर जाने से डरने लगे।
बाद में जब उन्होंने हालात थोड़े सामान्य देखे तो यह कहते हुए कि वह तो दिलासा देने के लिए आए हैं, घर में बिटिया की मां का हालचाल पूछकर परिजनों को आश्वासन देकर चले गए।