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अलीगढ़ः सर सैयद ने बनारस में देखा था ख्वाब, अलीगढ़ में हुआ साकार

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:18 AM IST
एएमयू बाब ए सैय्यद।
एएमयू बाब ए सैय्यद। - फोटो : CITY OFFICE
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इकराम वारिस
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) 17 दिसंबर 2021 को 101 साल का हो जाएगा। इस विश्वविद्यालय का ख्वाब सर सैयद अहमद खान ने बनारस में देखा था, जो अलीगढ़ में 17 दिसंबर 1920 को विश्वविद्यालय के उद्घाटन के साथ पूरा हुआ। अलबत्ता, उन्होंने तालीम की शमा 1875 में मदरसा तुल उलूम की स्थापना के साथ रोशन कर दी थी। दो साल बाद 1877 में यह मदरसा, मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की शक्ल में वजूद में आया। 23 साल के बाद यह कॉलेज विश्वविद्यालय में तब्दील हो गया।
एएमयू के जनसंपर्क विभाग के मेंबर इन एसोसिएट डॉ. राहत अबरार ने बताया कि सर सैयद के जेहन में यूनिवर्सिटी का ख्वाब था। 9 फरवरी 1873 को बनारस में पहली बैठक में उन्होंने कहा कि वह ‘कोई मदरसा नहीं बना रहे। कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैैं। भविष्य की यूनिवर्सिटी वहां बनाऊंगा, जहां की आबोहवा सबसे बेहतर हो’। डॉ. राहत ने कहा कि पर्यावरण का मुद्दा, जो वैश्विक बन चुका है, वह मुद्दा 1873 में सर सैयद के जेहन में था। सर सैयद ने उस वक्त अलीगढ़ के सिविल सर्जन आर जैक्सन, कलेक्टर हेनरी जार्ज लॉरेंस व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर हंट की एक कमेटी बनाई, जिन्हेंवहां की भौगोलिक स्थिति जांचने-परखने की जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी ने बताया कि यहां न तो बाढ़ आ सकती है और न ही अकाल पड़ सकता है, क्योंकि नदी दूर और 20 फिट के नीचे जल स्रोत है। इसके बाद खाली पड़ी 74 एकड़ जमीन पर मदरसा बन गया। इसके बाद वह नए आयाम गढ़ता चला गया। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भी विश्वविद्यालय का हिस्सा है।

22 दिसंबर 2020 विश्वविद्यालय के सौ साल पूरा होने पर ऑनलाइन कार्यक्रम हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे, जिन्होंने यूनिवर्सिटी की खूबियों और अच्छाइयों पर उसे मिनी इंडिया बताया। उनसे पहले 1964 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एएमयू के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
25 रुपये में दीवार पर होंगे नाम
डॉ. राहत कहते हैं कि सर सैयद ने इस इदारे की इमारत बनाने के लिए जो उपाय निकाला, वह चल पड़ा। उन्होंने ‘अपनी मदद आप में’ योजना के तहत बताया कि जो 25 रुपये दान करेगा, उसका नाम मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की चारदीवारी पर नाम गोदा जाएगा। कॉलेज की दीवार पर 286 दानदाताओं के नाम हैं, जिनमें अंग्रेज, हिंदू, मुस्लिम, सिख के नाम हैं। 250 रुपये दान करने वाले के नाम से हॉस्टल होगा, जबकि 500 रुपये दान करने वाले का नाम स्ट्रेची हॉल में लिखा जाएगा। डॉ. राहत ने कहा, नुमाइश के मैदान के सामने सिटी स्कूल में कुछ भूभाग राजा महेंद्र प्रताप ने एएमयू को लीज पर दिया था।
हिंदू शख्सितयों के नाम से हॉस्टल
जिन लोगों ने मदरसे से लेकर एएमयू तक निर्माण में मदद की, उनके नाम एएमयू की दीवारों पर गुदे हैं और उनके नाम हॉस्टल भी है। डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू में हिंदू शख्सियतों को भी तवज्जो दिया गया है। इनमें सरोजनी नायडू हॉल (महिलाओं के लिए), चक्रवर्ती हॉस्टल, ध्यानचंद हॉस्टल, राजा जयकिशन दास हॉस्टल, राजा महेंद्र प्रताप हॉस्टल शामिल हैं।
हिंदुओं की मदद का सर सैयद ने किया दिल से स्वागत
डॉ. राहत अबरार बताते हैं कि सर सैयद अहमद खान ने जिन लोगों ने भी मदद की, उनका खुले दिल से स्वागत किया। उनके हिंदुओं में खास दोस्त व मुख्य सहयोगियों में राजा जय किशन दास, ठाकुर जवाहर सिंह, महारानी हरबंश कौर, मेयो लाल, ठाकुर दुर्गा बक्स सिंह, एचएच महारानी नौसारनानी, राजा किशन कुमार, राजा नृसिंह दास, राजा बल्देव सिंह, बाबू सुरजीत सिंह हैं। इनके अलावा, डॉ. रामबाबू सक्सेना, पद्मजा नायडू, राजेश्वर सहाय, वी बस्सेन ने लाइब्रेरी में सैकड़ों पुस्तकें दान कीं।
नौ राष्ट्रों के सिरमौर बने पूर्व छात्र
अलीगढ़। एएमयू से निकले हीरा रूपी छात्र कई राष्ट्रों के अध्यक्ष बने। इस इदारे ने दो भारत रत्न, आठ पद्म विभूषण, 28 पद्म भूषण व 37 पद्मश्री दिए हैं। इनमें भारत रत्न जाकिर हुसैन व अब्दुल गफ्फार खान हैं।
डॉ. राहत अबरार ने बताया कि इसी इदारे ने देश को 19 राज्यपाल, 17 मुख्यमंत्री, सर्वोच्च न्यायालय के चार न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के 11 मुख्य न्यायाधीश, 29 न्यायाधीश, तीन ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता, 19 साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता, 11 कुलाधिपति, 92 कुलपति दिए हैं। एएमयू के पूर्व छात्र हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति रह चुके हैं। पूर्व छात्र लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने। केरल के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान हैं। पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन, एआर किदवई आदि पद्मश्री सम्मान नवाजे जा चुके हैं। पूर्व छात्रा अनवरा तैमूर आसाम की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। इनके अलावा, लीगल एजूकेशन के एआर माधवन, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक सेठ, गीतकार जावेद अख्तर, प्रो. इरफान हबीब आदि को पद्म भूषण सम्मान मिला।
इन्होंने भी किया नाम रोशन
एएमयू के पूर्व छात्र साहब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। इनके अलावा ओलंपियन पद्मश्री जफर इकबाल, असलम शेख, प्रो. काजी अब्दुल सत्तार, शहरयार, राही मासूम रजा, जांनिसार अख्तर, नसीर उद्दीन शाह, असरार उल हक मजाज, शकील बदायूंनी, आदि हैं, जिन्होंने एएमयू का नाम रोशन किया। छात्र संघ से निकलकर प्रदेश व देश की राजनीति में भी पूर्व छात्र खूब चमके। इनमें पूर्व मंत्री आजम खान, मोहम्मद अदीब, नसीम अहमद, खालिद मसूद, अली अशरफ, अजीजुर्रहमान, अनीस उर रहमान शेरवानी, वसीम अहमद खान, मौजूदा अलीगढ़ मेयर मोहम्मद फुरकान, हाफिज मोहम्मद उस्मान आदि शामिल हैं।
विदेश के विद्यार्थी भी ले रहे शिक्षा
एएमयू में देश नहीं, बल्कि विदेश के भी विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं। अफ्रीका, पश्चिमी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, सार्क व राष्ट्रमंडल देशों के विद्यार्थियों से एएमयू परिसर गुलजार है। हालांकि, कोविड-19 प्रोटोकाल के तहत वह ऑनलाइन शिक्षा ले रहे हैं।
एएमयू परिसर में दो बार टाइम कैप्सूल दफन
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में दो बार टाइम कैप्सूल दफन किए गए हैं। विश्वविद्यालय के सौ साल पूरा होने पर वर्ष 2020 में उसके इतिहास को सहेजने के लिए टाइम कैप्सूल को जमीन में दफन किया गया। विक्टोरिया गेट के सामने दफन कैप्सूल में एएमयू का इतिहास डिजिटल व प्रिंट दोनों फार्मेट में है। 17 दिसंबर 1920 में विश्वविद्यालय का उद्घाटन हुआ था। इससे पहले 1877 में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (एएमओ) की स्थापना के वक्त स्ट्रेची हॉल के सामने बॉक्सनुमा कैप्सूल दफनाया गया था, जिसमें 1875 में मदरसा तुल उलूम व कॉलेज का इतिहास शामिल था।
मौलाना आजाद लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियां
अलीगढ़। एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी में 14 लाख से ज्यादा किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। सात मंजिला लाइब्रेरी की बुनियाद 1877 में वायसराय लॉर्ड लिटन ने मोहम्मद एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना के समय रखी थी। बाद में 1960 में लाइब्रेरी का उद्घाटन प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था, जिसका नाम देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम से मौलाना आजाद लाइब्रेरी रखा गया। लाइब्रेरी में उर्दू, फारसी, संस्कृत और अरबी भाषाओं में दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों का विश्व प्रसिद्ध भंडार है। इस्लाम, हिंदू धर्म आदि पर दुर्लभ और अमूल्य पांडुलिपियां हैं। कुरान की एक प्रति 1400 वर्ष से अधिक पुरानी है। पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद साहब के दामाद हजरत अली द्वारा लिखित पवित्र कुरान का एक टुकड़ा है, जो कुफी लिपि में चर्मपत्र पर लिखा गया है। अबुल फैज फैजी द्वारा श्रीमद्भागवत गीता का फारसी अनुवाद है। अन्य संपत्ति ताड़ के पत्तों पर लिखी गई तेलुगु और मलयालम पांडुलिपियां हैं।
एएमयू के नजर में
-467.6 हेक्टेयर कैंपस
-मल्लापुरम (केरल) मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), किशनगंज केंद्र (बिहार)
-20 आवासीय हॉल
-177 विभाग
-39367 छात्र-छात्राएं

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