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साहब मदद करो बेटे को किडनी देनी है..
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sat, 18 Feb 2017 01:46 AM IST
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Sir please help to give a kidney to son ..
- फोटो : Dig Vishal
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अपने बीस वर्षीय बेटे को किडनी देने के लिए खैर के एक मां-बाप दो साल से लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनको राहत नहीं मिली है। खैर के टप्पल ब्लाक के गांव सूरजमल के निवासी ओंकार सिंह की उम्र 50 वर्ष जबकि उनकी पत्नी रवींद्री देवी 50 वर्ष की हैं।
दोनों की दौड़ते दौड़ते हालात खराब हो गई है। इनके बेटे 20 वर्षीय अमित की दोनो किडनी खराब है, ये बीमारी उसको ब्लड प्रेशर हाई होने से हुई है। अमित का इलाज पहले सर्वोदय हास्पिटल फरीदाबाद और उसके बाद अब सरगंगा राम हास्पिटल में हो रहा है। ओंकार सिंह ने बताया कि रविंद्री देवी ही अपने बेटे को किडनी देना चाहती है। किडनी देने के लिए मां और बेटे का ब्लड ग्रुप सहित सब कुछ मिलान कर लिया गया है। सर गंगाराम हास्पिटल के डॉक्टरों की कमेटी ने भी ओके कर दिया है।
अब समस्या पैसों की है अगर सीएम के राहत कोष से साढ़े आठ लाख रुपये की मदद मिले तो ऑपरेशन हो जाएगा।
शुक्रवार को भी मां-बाप अलीगढ़ के जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे तो उनको बताया गया कि किडनी देने के लिए पहले जिला कमेटी और बाद में मंडलायुक्त की कमेटी की अनुमति चाहिए। इसके बाद ही सीएम से आर्थिक सहायता मिल सकती है। इस संबंध में जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के कारण आर्थिक मदद नहीं मिल सकती है, लेकिन इससे पहले उनको दोनों कमेटियों से मंजूरी लेना जरूरी है। उनकी फाइल को खैर एसडीएम के पास भेजा गया है। वहां से कार्रवाई शुरू करा दी गई है।
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दोनों की दौड़ते दौड़ते हालात खराब हो गई है। इनके बेटे 20 वर्षीय अमित की दोनो किडनी खराब है, ये बीमारी उसको ब्लड प्रेशर हाई होने से हुई है। अमित का इलाज पहले सर्वोदय हास्पिटल फरीदाबाद और उसके बाद अब सरगंगा राम हास्पिटल में हो रहा है। ओंकार सिंह ने बताया कि रविंद्री देवी ही अपने बेटे को किडनी देना चाहती है। किडनी देने के लिए मां और बेटे का ब्लड ग्रुप सहित सब कुछ मिलान कर लिया गया है। सर गंगाराम हास्पिटल के डॉक्टरों की कमेटी ने भी ओके कर दिया है।
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अब समस्या पैसों की है अगर सीएम के राहत कोष से साढ़े आठ लाख रुपये की मदद मिले तो ऑपरेशन हो जाएगा।
शुक्रवार को भी मां-बाप अलीगढ़ के जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे तो उनको बताया गया कि किडनी देने के लिए पहले जिला कमेटी और बाद में मंडलायुक्त की कमेटी की अनुमति चाहिए। इसके बाद ही सीएम से आर्थिक सहायता मिल सकती है। इस संबंध में जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के कारण आर्थिक मदद नहीं मिल सकती है, लेकिन इससे पहले उनको दोनों कमेटियों से मंजूरी लेना जरूरी है। उनकी फाइल को खैर एसडीएम के पास भेजा गया है। वहां से कार्रवाई शुरू करा दी गई है।
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