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Maha Shivratri: 1800 साल प्राचीन भोजताल पर होती है शिव आराधना, इमली के पेड़ की जड़ से यहां प्रकट हुआ शिवलिंग
Mon, 04 Mar 2024 10:56 PM IST
चमन शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 04 Mar 2024 10:56 PM IST
सार
भोजताल आश्रम लगभग 1800 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसकी स्थापना बाबा भभूति गिरि महाराज द्वारा की गई थी। ये आश्रम लगभग 90 बीघा में फैला हुआ है। मान्यता है कि यहां इमली के पेड़ की जड़ से शिवलिंग प्रकट हुए थे।
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चंडौस स्थित 1800 साल प्राचीन भोजताल आश्रम
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
अलीगढ़ जनपद में चंडौस के भोजताल आश्रम पर महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई हैं। रंगाई-पुताई के साथ सजावट की जा रही है। कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के आने जाने की तैयारियां की जा रही हैं। 7 मार्च से यहां पुलिस फोर्स की तैनाती बढ़ा दी जाएगी। यहां दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों लोग दर्शन करने आते हैं।
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भोजताल आश्रम लगभग 1800 वर्ष पुराना बताया जाता है। इसकी स्थापना बाबा भभूति गिरि महाराज द्वारा की गई थी। ये आश्रम लगभग 90 बीघा में फैला हुआ है। मान्यता है कि यहां इमली के पेड़ की जड़ से शिवलिंग प्रकट हुए थे। आश्रम की मान्यता दूर-दूर दराज के क्षेत्रों तक फैल गई। आश्रम पर प्रति वर्ष दस मेले लगते है। रामलीला व भागवत कथा का आयोजन होता है।
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यहां बने तालाब की मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करने से कुष्ट व मनोरोगों से निजात मिलती है। 2008 में तत्कालीन भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने आश्रम को पर्यटन स्थल घोषित किया और सुंदरीकरण कराया। महाशिवरात्रि पर आश्रम के महंत दुर्गा गिरि महाराज इसका संचालन करते हैं।