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बंदरों का आतंक: बंदर की घुड़की से डरी महिला छत से आंगन में गिरी, लहूलुहान हालत में देख उड़े होश, मौत से मातम
Thu, 10 Sep 2026 11:02 AM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:02 AM IST
सार
बताया जा रहा है कि गभाना के बलवंत नगलिया में करीब 100 घर हैं। गांव में 250 से ज्यादा बंदर हैं। यह बंदर गली, घरों की छत, छज्जों पर रहते हैं। मौका मिलते ही घरों के अंदर भी घुस जाते हैं।
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मृतका रामवती
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
गभाना के बलवंत नगलिया गांव में बुधवार की सुबह छत पर मौजूद रामवती (55) के पास एक बंदर पहुंच गया। उन्होंने भगाने की कोशिश की तो बंदर घुड़की देने लगा। इस पर डरकर वह भागीं तभी पैर फिसलने से नीचे आंगन में आ गिरीं और मौत हो गई। घटना सुबह करीब सात बजे की है। जिस समय घटना हुई घर पर कोई नहीं था। पति प्रमोद कुमार सिंह डेयरी में दूध देने गए थे। वहां से लौटने पर आंगन में पत्नी को लहूलुहान हालत में पड़े देखा तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने शोर मचाया तो आसपास के लोग भागकर उनके घर के अंदर पहुंचे। तब तक उनकी पत्नी की मौत हो चुकी थी।
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प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। दोनों नोएडा में नौकरी करते हैं। खबर मिलने पर वह भी गांव आ गए। घटना से परिजन का रो-रोकर बुरा हाल था। परिजन ने पुलिस को सूचना दिए बिना ही दोपहर में शव का अंतिम संस्कार कर दिया। गभाना थाने के इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मामले में सूचना नहीं मिली है।
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100 घरों का गांव, 250 से ज्यादा बंदर
गभाना कस्बे से करीब छह-सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलवंत नगलिया छोटा गांव है। गांव में करीब 100 घर हैं। गांव के धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि गांव 250 से ज्यादा बंदर हैं। यह बंदर गली, घरों की छत, छज्जों पर रहते हैं। मौका मिलते ही घरों के अंदर भी घुस जाते हैं। अक्सर टोली बनाकर निकलने के साथ रास्ते पर अकेले आने-जाने वालों पर हमला कर देते हैं। चार-माह के भीतर गांव के 10-12 लोगों को बंदर काट चुके हैं। इनमें महिलाएं-बच्चे शामिल हैं।
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बंदर काटने के 35 लोग रोजाना पहुंच रहे सीएचसी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गभाना में रोजाना एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए करीब 80 लोग पहुंच रहे हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राहुल कुमार के अनुसार इनमें 35 पीड़ित बंदरों के काटने के आते हैं। गभाना के लोगों के अनुसार कस्बे में भी बड़ी संख्या में बंदर हैं, जो अक्सर अकेले गलियों में निकलने वालों पर हमला कर देते हैं।