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देश में नहीं आने देंगे आरएसएस के ‘जय श्रीराम’ को

Mon, 02 May 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 02 May 2016 01:22 AM IST
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RSS will not be found in the country ' Jai Shri Ram ' in
एएमयू - फोटो : रुपेश
ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एआईएसएफ) की जेएनयू अध्यक्ष राहिला परवीन सहित इस संगठन के कई नेताओं ने रविवार को एएमयू में आयोजित एक कार्यक्रम में कई विवादास्पद बयान दिए। राहिला परवीन नेे कहा कि यह देश गांधी के ‘राम’ का है।
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आरएसएस के ‘जय श्रीराम’ का नहीं। हम आरएसएस के ‘जय श्रीराम’ को नहीं आने देंगे। एआईएसएफ नेताओं ने कहा कि देशवासियों को ‘राम’ एवं ‘जय श्रीराम’ के अंतर को समझना होगा।
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एआईएसएफ एवं अन्य वामपंथी नेताओं ने एएमयू इंपलाइज यूनियन कार्यालय में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए जेएनयू के कन्हैया को आजादी की दूसरी लड़ाई का योद्धा बताया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय के रोहित वेमुला मामले को दबाने के लिए फांसीवादी ताकतों ने जेएनयू प्रकरण को उछाल दिया। इसमें एबीवीपी के साथ तथाकथित राष्ट्रवादी टीवी न्यूज चैनल शामिल थे।
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सुश्री परवीन ने रोहित वेमुला की तरफा इशारा करते हुए कहा कि वह उस मां की जय बोलेंगे जिसने जन्म देकर अपने लाल को अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा। शेर पर सवार हाथ में त्रिशूल एवं भगवा झंडा वाली आरएसएस की मां की जय नहीं बोलेंगे। उन्हाेंने कहा कि सीमा पर लड़ने वाले फौजी के किसान पिता आत्महत्या कर रहे हैं। इसकी चिंता सरकार को नही।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सेनानी ’भारत माता की जय’ नहीं ‘वंदे मातरम्’ एवं ‘जय हिंद’ बोलते थे। जबकि फांसीवादी ताकतें हर चीज को मजहब में बांटकर अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। उन्हाेंने हिंदूवादी संगठनों पर व्यंग करते हुए कहा कि घर वापसी की बात करने वाले मुख्तार अब्बास नकवी की घर वापसी क्यों नहीं कराते। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की सोच ब्राह्मणवादी है। ये सामंतवादी सोच से ग्रसित हैं।
विरोध में उठ रहे आवाज को दबा देना चाहते हैं, पर भूल गए हैं कि गांधी को मार जरूर दिया गया, पर वे आज भी जिंदा हैं। कार्यक्रम को प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब, एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी, भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश, डॉ. एम रहमान, डॉ. शमीम अख्तर आदि ने संबोधित किया। अध्यक्षता फनस एवं संचालन वीणा मरियम भार्गवी ने किया।
कम्युनिस्टों का भगवान मालिक : सतीश गौतम
अलीगढ़। सांसद सतीश गौतम ने एआईएसएफ  एवं वामपंथी नेताओं के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत माता को मां कहने से इंकार करने वाले कम्युनिस्टों का भगवान मालिक है। कल वे लोग जन्म देने वाली अपनी मां को भी मां कहने से इंकार कर दें तो हैरत नहीं। इस देश में भारत माता, गौ माता एवं जन्म देने वाली माता को आदर दृष्टि से देखा जाता है। यह हमारे संस्कार में है।
आजादी की लड़ाई लड़ रहा कन्हैया
अलीगढ़। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने कहा कि आज कन्हैया आजादी की दूूसरी लड़ाई लड़ रहा है। वह उत्पीड़न के विरोध का आवाज बन गया है। उन्होंने कहा कि फांसीवादी ताकतों के निशाने पर आज विश्वविद्यालयों के छात्र हैं। सड़ी-गली व्यवस्था का विरोध कर रहे छात्रों के आंदोलन को कुचलने का सरकार प्रयास कर रही है। लेकिन कन्हैया का कारवां दिनों-दिन बढ़ रहा है।
स्मृति ईरानी अच्छी एक्टर
अलीगढ़। एआईएसएफ के कार्यक्रम में एएमयू की धरती से एक बार फिर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी पर छात्र संगठन के नेताओं ने हमले किए। एआईएसएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वलीउल्लाह खादरी ने कहा कि स्मृति ईरानी एक्टिंग अच्छी कर लेती हैं, लेकिन शिक्षा के बारे में जानकारी नहीं। शिक्षा बजट में कटौती एवं छात्रों के हक को दबाने के सवाल पर उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी जमकर निशाना साधा। कहा कि हिंदुस्तान में नागपुर से दहशत फैलाने की कोशिश की जा रही है। फांसीवादी ताकतों की नजर अल्पसंख्यक स्वरूप वाले एएमयू एवं जामिया मिल्लिया पर भी है।

नारे लगाए तो क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी
अलीगढ़। एआईएसएफ की जेएनयू की अध्यक्ष राहिला परवीन ने जेएनयू की 9 फरवरी की घटना पर सफाई देते हुए कहा कि वहां जो कुछ भी हुआ उसमें एआईएसएफ व जेएनयू हिस्सा नहीं था। यह कार्यक्रम व्यक्तिगत स्तर पर कुछ छात्र करा रहे थे। उनका देश के सिस्टम पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि जेएनयू की खासियत है कि वहां किसी भी तरह की बातों पर बहस कर सकते हैं। अफजल गुरू के परिजनों को फांसी के पहले मिलने नहीं दिया गया। इसपर जेएनयू में चर्चा कर सकते है। उन्होंने कहा कि जब कार्यक्रम राष्ट्र विरोधी था तो उस कार्यक्रम को करने की अनुमति कैसे मिली। यह भी विचारनीय है कि पुलिस और तथाकथित राष्ट्रवादी मीडिया जब सामने थे तो नारेबाजी करने वालों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।



 
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