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शहर के जाम ने ले ली मासूम बिटिया की जान
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यशवी का फाइल फोटो
- फोटो : CITY OFFICE
शहर के ट्रैफिक जाम ने 10 वर्ष की मासूम बिटिया की जान ले ली। बिटिया को सासनीगेट से जेएन मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में ढाई घंटे से अधिक का समय लग गया। आमतौर पर बाइक से यह दूरी मात्र 20-25 मिनट में तय की जाती है। अस्पताल पहुंचने से पहले ही बिटिया दुनिया छोड़कर चली गई। इससे परिजनों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। बिटिया न्यूरो संबंधी समस्या से पीड़ित थी। घटना बुधवार शाम की है।
सासनीगेट थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी निवासी हार्डवेयर कारोबारी बृजेश वार्ष्णेय की 10 वर्षीय बेटी यशवी बचपन प्ले स्कूल में पढ़ती थी। उसे न्यूरो संबंधी समस्या थी। उसका उपचार आगरा के एक चिकित्सक के यहां चल रहा था। बुधवार शाम करीब 5 बजे अचानक वह बेहोश हो गई।
पिता बृजेश एवं परिवार के अन्य सदस्य यशवी को कार से लेकर रूसा अस्पताल पहुंचे। वहां से जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। ब्रजेश जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए निकले लेकिन सासनीगेट पर लगे जाम में फंस गए। किसी तरह गाड़ी घुमाकर घर पहुंचे। वहां कार छोड़कर स्कूटर से बिटिया को लेकर चले ताकि गली-मोहल्ले के रास्ते जल्दी अस्पताल पहुंच जाएं। खिरनी गेट एवं हाथरस अड्डा पर भी जाम था। रॉयल टॉकिज के पास सड़क बंद कर निर्माण कार्य चल रहा था।
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इसके बाद जब बैंक कॉलोनी, वार्ष्णेय मंदिर होते हुए दूबे पड़ाव पहुंचे तो वहां भी जाम लगा था। अस्पताल पहुंचने में देरी होती देख उनकी घबराहट बढ़ती जा रही थी। इस पर उन्होंने जेएन मेडिकल कॉलेज की बजाय वरुण ट्रॉमा सेंटर जाने का निर्णय लिया। वहां पहुंचे तो बच्ची को जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाने का सुझाव दिया गया। यहां से जेएन मेडिकल कॉलेज की ओर निकले तो क्वार्सी चौराहे पर जाम में फंस गए। किसी तरह यहां से निकले और जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। लेकिन तब तक यशवी दुनिया को अलविदा कह चुकी थी।
बृजेश वार्ष्णेय का कहना है कि जाम ने उनकी बिटिया की जान ले ली। सासनीगेट से जेएन मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में ढाई घंटे से अधिक का समय लग गया। समय से पहुंच जाता तो उसकी जान बच जाती। जेएन मेडिकल के चिकित्सकों ने बिटिया को देखकर कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता। लेट हो गया है। अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल युवा इकाई के महानगर अध्यक्ष दीपक वार्ष्णेय ने कहा कि जाम से शहरवासी तंग आ चुके हैं। अब इससे निजात पाने के लिए आंदोलन करना पड़ेगा। पता नहीं इस जाम की वजह से यशवी जैसे कितने बच्चे एवं मरीज जान गंवा चुके हैं।
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सासनीगेट थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी निवासी हार्डवेयर कारोबारी बृजेश वार्ष्णेय की 10 वर्षीय बेटी यशवी बचपन प्ले स्कूल में पढ़ती थी। उसे न्यूरो संबंधी समस्या थी। उसका उपचार आगरा के एक चिकित्सक के यहां चल रहा था। बुधवार शाम करीब 5 बजे अचानक वह बेहोश हो गई।
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पिता बृजेश एवं परिवार के अन्य सदस्य यशवी को कार से लेकर रूसा अस्पताल पहुंचे। वहां से जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। ब्रजेश जेएन मेडिकल कॉलेज के लिए निकले लेकिन सासनीगेट पर लगे जाम में फंस गए। किसी तरह गाड़ी घुमाकर घर पहुंचे। वहां कार छोड़कर स्कूटर से बिटिया को लेकर चले ताकि गली-मोहल्ले के रास्ते जल्दी अस्पताल पहुंच जाएं। खिरनी गेट एवं हाथरस अड्डा पर भी जाम था। रॉयल टॉकिज के पास सड़क बंद कर निर्माण कार्य चल रहा था।
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इसके बाद जब बैंक कॉलोनी, वार्ष्णेय मंदिर होते हुए दूबे पड़ाव पहुंचे तो वहां भी जाम लगा था। अस्पताल पहुंचने में देरी होती देख उनकी घबराहट बढ़ती जा रही थी। इस पर उन्होंने जेएन मेडिकल कॉलेज की बजाय वरुण ट्रॉमा सेंटर जाने का निर्णय लिया। वहां पहुंचे तो बच्ची को जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाने का सुझाव दिया गया। यहां से जेएन मेडिकल कॉलेज की ओर निकले तो क्वार्सी चौराहे पर जाम में फंस गए। किसी तरह यहां से निकले और जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। लेकिन तब तक यशवी दुनिया को अलविदा कह चुकी थी।
बृजेश वार्ष्णेय का कहना है कि जाम ने उनकी बिटिया की जान ले ली। सासनीगेट से जेएन मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में ढाई घंटे से अधिक का समय लग गया। समय से पहुंच जाता तो उसकी जान बच जाती। जेएन मेडिकल के चिकित्सकों ने बिटिया को देखकर कहा कि अब कुछ नहीं हो सकता। लेट हो गया है। अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल युवा इकाई के महानगर अध्यक्ष दीपक वार्ष्णेय ने कहा कि जाम से शहरवासी तंग आ चुके हैं। अब इससे निजात पाने के लिए आंदोलन करना पड़ेगा। पता नहीं इस जाम की वजह से यशवी जैसे कितने बच्चे एवं मरीज जान गंवा चुके हैं।