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AMU: अब विलुप्त प्रजातियों के पौधों को दोबारा से किया जा सकेगा जिंदा, ऐसे जीवित होंगे पौधे

Thu, 11 Dec 2025 11:55 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 11 Dec 2025 11:55 AM IST
सार

शोधकर्ता ने पौधों के संरक्षण की ऐसी नई तकनीक विकसित की हैं जो नमूनों को कीट-आक्रमण से सुरक्षित रखती हैं। रंग, आकृति तथा ऊतक संरचना को लंबे समय तक बचाए रखती हैं।

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Research on reviving extinct plant species
शोध - फोटो : ani

विस्तार

अब विलुप्त प्रजातियों के पौधे पुनर्जीवित हो सकेंगे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संग्रहालय विज्ञान विभाग में पौधों के डीएनए गुणवत्ता पर हुए शोध में यह कामयाबी मिली है। शोध में यह खुलासा हुआ है कि पौधों को संरक्षित करने की कुछ नई तकनीक आने वाले समय में विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को दोबारा जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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विभागाध्यक्ष प्रो. अब्दुर्रहीम खान और डॉ. अल्ताफ अहमद की देखरेख में शोधार्थी आयशा राव ने हर्बेरियम तकनीक के साथ-साथ नए विकसित गीले और सूखे संरक्षण तरीकों की डीएनए गुणवत्ता पर प्रभाव का तुलनात्मक अध्ययन किया। वर्ष 2020 से 2025 तक शोध में यह पाया गया कि कुछ विशेष रसायनिक मिश्रण से संरक्षित पौधे पांच वर्षों तक अपने हरे रंग और संरचनात्मक विशेषताओं को सुरक्षित रख सके, जबकि तेल मिश्रण से संरक्षित नमूनों में उम्मीद के हिसाब से नतीजे नहीं मिले और भूरे रंग में बदल गए। 
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प्रो. अब्दुर्रहीम खान ने बताया कि शोधार्थी आयशा ने फॉर्माल्डिहाइड, अल्कोहल, एसिटिक एसिड, फॉर्मल-अल्कोहल और फॉर्मल-एसिटिक एसिड में संरक्षित पौधों की डीएनए गुणवत्ता और मात्रा का गहन अध्ययन किया। प्राकृतिक तरीके से तैयार किए गए हर्बेरियम और ताजा पौधों के डीएनए की तुलना भी की गई। अध्ययन में कुछ तत्व डीएनए को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सक्षम हैं।

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शोध में यह भी संकेत मिला कि अगर पौधों का डीएनए लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके तो आनुवंशिक तकनीक की मदद से पीछे चली गई या विलुप्त प्रजातियों को पुनर्जीवित करना भी संभव हो सकता है।-प्रो. अब्दुर्रहीम खान, अध्यक्ष, संग्रहालय विज्ञान विभाग, एएमयू

पौधे के संरक्षण में एएमयू का योगदान

शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शोधकर्ता ने पौधों के संरक्षण की ऐसी नई तकनीक विकसित की हैं जो नमूनों को कीट-आक्रमण से सुरक्षित रखती हैं। रंग, आकृति तथा ऊतक संरचना को लंबे समय तक बचाए रखती हैं। डीएनए कार्यक्षमता को अधिक समय तक स्थिर बनाए रखती हैं। इन तकनीक से संग्रहालयों, वनस्पति उद्यानों, हर्बेरियम और बीज बैंक को भविष्य में ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है।

ऐसे जीवित होंगे पौधे
विलुप्त प्रजाति के पौधे के (रेशा) डीएनए को लेकर दूसरे पौधे में पैबस्त किया जाएगा। इससे विलुप्त प्रजाति के पौधे दूसरे पौधे में पनपने लगेगा।

क्या है हर्बेरियम
हर्बेरियम एक ऐसा वैज्ञानिक वनस्पति संग्रहालय है, जहां विभिन्न पौधों के सूखे और दबाए हुए नमूनों को सुरक्षित रखा जाता है। इन नमूनों को विशेष एसिड-फ्री कागज की शीटों पर सावधानी से चिपकाकर संरक्षित किया जाता है। इसे वनस्पति विज्ञान का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अभिलेखागार माना जाता है।

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