फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Remembered after two deaths.. tank deeper than 10 feet illegal

दो मौत के बाद आई याद..10 फिट से ज्यादा गहरा टैंक अवैध

Sun, 11 Sep 2022 01:06 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2022 01:06 AM IST
विज्ञापन
Remembered after two deaths.. tank deeper than 10 feet illegal
शहर के ताला - हार्डवेयर कारोबार की धुरी ढलाई करने वाले कुटीर उद्योग के रूप में फैले हैं। इन ढलइयों को शीरा - कोयला आदि उत्पादों की आपूर्ति इन्हीं गली - मोहल्लों में कई दशकों से बिना पंजीकरण हो रही है। अब दो मौतों के बाद गोदाम में बने दस फुट से ज्यादा गहरे इस अवैध टैंक और उसमें भंडार कर शीरा की अवैध ब्रिकी की याद सिस्टम को आई है।
विज्ञापन

जिस गोदाम में शनिवार दोपहर दुर्घटना हुई है, उसका पंजीकरण अब तक न नगर निगम में है, न आबकारी में और न उद्योग केंद्र में है। फिलहाल आबकारी विभाग टीम ने शीरे का सैंपल ले लिया है। इस हादसे में संचालक की मौत हो गई है, ऐसे में सवाल उठता है कि इसे अब तक चलने के लिए जिम्मेदार अफसरों पर क्या कार्रवाई होगी?
विज्ञापन

पुलिस प्रशासनिक टीम के अनुसार पेट्रोल टैंक की तरह करीब दस फुट से ज्यादा गहरा टैंक जमीन में बना हुआ था। जिसमें उतरने के लिए सीढ़ी भी है और रस्सियां भी पड़ी थीं। अंदर इस टैंक का साइज दस पुट व्यास का है। जिसमें टैंकरों के जरिये आने वाले शीरे का भंडारण किया जाता है। ग्राहक को रस्सी में बाल्टी बांधकर खींचकर उसे निकालकर दिया जाता है। यह चिपकने वाला पदार्थ है, इसलिए रस्सी बांधकर ही उतरा जाता था। आसपास फैला होने के कारण फिसलने या गिरने का डर बना रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

तीस मिनट तक शीरे में डूबे रहे होंगे दोनों
प्रत्यक्षदर्शी मदनलाल व काले के भाई नरेश के अनुसार घटना के 15 मिनट बाद ही पुलिस आ गई थी। मगर इन तीनों को निकालने में आधा घंटा लग गया। शीरा चिपकना पदार्थ है, इसलिए इसमें डूबने और दम घुटने के कारण कुछ ही देर में दो की मौत हो गई और तीसरे की हालत नाजुक है। पुलिस प्रशासन के साथ-साथ आबकारी, उद्योग, नगर निगम व राजस्व टीमों ने पाया है कि अभी तक किसी विभाग से पंजीकरण नहीं हुआ है।
इस हादसे में खुद स्वामी की मौत हो गई। इसलिए उसके आवेदन या प्रपत्र के विषय में कोई नहीं बता पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मुआवजे के विषय पर आबकारी टीम इनकी संपत्ति आदि की जांच करेगी। फिलहाल आबकारी टीम ने शीरे का सैंपल ले लिया है। जिसकी जांच के बाद पता चलेगा कि यह खंडसारी प्रयोग वाला शीरा था या किसी अन्य तरह का शीरा था। उसी के अनुसार कार्रवाई भी निर्धारित होगी।
शीरा बिक्री का नियम: - उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रक लखनऊ द्वारा गन्ने से बनने वाला खंडसारी शीरा पंजीकृत पशु खाद्य पदार्थ या अन्य खाद्य पदार्थ निर्माताओं को प्रदेश में आवंटित किया जाता है। जिसकी सूचना प्रत्येक जिले में आबकारी विभाग को पहुंचती है। मगर जिले में शीरा आपूर्ति की कोई सूचना आबकारी के पास नहीं आती है। स्पष्ट है कि यह शीरा अवैध रूप से मंगाकर बेचा जा रहा था।

- शीरे का व्यापार वैध था या अवैध, इसका सत्यापन सभी विभागों से कराया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी की रिपोर्ट नहीं आई। फौरी तौर पर जांच में किसी विभाग से पंजीकरण सामने नहीं आया है। अब यह कहां से शीरा लाया रहा था और कैसे बेच रहा था। यह जांच में साफ होगा। उसी के अनुसार इसके संचालन के लिए जिम्मेदार अफसरों या विभागों पर कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। मुआवजे पर भी राजस्व विभाग रिपोर्ट के बाद निर्णय होगा। - प्रदीप वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed