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हाथरस में बोले सचिन-योगी हनुमान जी की जाति बताते हैं किसानों की बात नहीं करते
Sun, 27 Jan 2019 07:57 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: राजेश सैनी
Updated Sun, 27 Jan 2019 07:57 PM IST
सार
जिकरपुर के धरनारत किसानों के बीच पहुंचे राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट
राजस्थान में किसानों का कर्ज 48 घंटे में माफ किया
राहुल गांधी ने मोदी सरकार को संशोधन करने से रोका
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Sachin pilot
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विस्तार
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा है कि वह किसानों की हर मांग के साथ है। कांग्रेस उनकी लड़ाई संसद तक लड़ेगी। नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग कर रहे धरनारत किसानों के बीच रविवार को पहुंचे पायलट ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनते ही 48 घंटे के अंदर ही सहकारिता विभाग से कर्ज लेने वालों किसानों को पूरा, दूसरे संस्थानों से कर्ज लेने वालों का दो लाख तक का कर्जा माफ किया गया है।
कर्ज अदा करने वाले निष्ठावान किसानों को फायदा देने के लिए सरकार योजना बना रही है। वहीं यूपी में किसान बदहाल है। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। वह धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 22 दिन प्रचार में रहे और भगवान हनुमान की जाति पूछते बताते रहे। उन्होंने किसानों की बात नहीं की।
किसानों का दर्द नहीं समझा। लखनऊ की सरकार बनने से पहले भाजपा नेता आदमनी दोगुने करने, किसानों की समस्याएं दूर करने की बात कह रहे थे लेकिन अब कोई उनकी बात सुनने को राजी नहीं है। जबकि किसानों की मांग जायज है। हिंदुस्तान का प्रत्येक नागरिक किसानों के साथ खड़ा रहेगा। ये बात चुनाव की नहीं है। चुनाव देश में चार पांच बार बाते हैं। बात ईमानदारी की है।
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पायलट ने कहा कि देश में 70 साल में कई कानून बने। लेकिन कांग्रेस ने वर्ष 2013 जो भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून बना कर पास कराया। ऐसा एक भी कानून देश में आने वाले 70 वर्षों में नहीं बन पाएगा। आज जो लोग केंद्र में सत्ता में है यूपीए सरकार में उन्होंने उस बिल का मजबूरन समर्थन किया।
मोदी सरकार बनते ही इसमें उद्योगपतियों के दबाव में संशोधन (जमीन देने के लिए किसानों को बाध्य करने के लिए कुछ आवश्यक प्रावधान करने का संशोधन होना था) करने की तैयारी हुई लेकिन 45 सांसदों के साथ ही राहुल गांधी ने इसका पुरजोर विरोध कर संशोधन नहीं होने दिया। कांग्रेस की चिंता है कि अन्नदाता की भविष्य की पीढ़ियों को कैसा सुरक्षित रखा जाए। उसकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कानूनी हो।
पूरे देश में सभी पार्टी की सरकारें उसका पालन करें। उन्होंने ये भी कहा कि उनको किसानों की सभी मांगों की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन किसान धरना दे रहे हैं इतना सुनते ही वह जिकरपुर आ गए। यहां जिकरपुर, जहानगढ़, कनसेरा, कुराना और टप्पल के सैकड़ों किसान मौजूद थे। यहां पर राष्ट्रीय सचिव एवं राजस्थान प्रभारी विवेक बंसल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह सहित कई कांग्रेस के नेता मौजूद रहे।
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कर्ज अदा करने वाले निष्ठावान किसानों को फायदा देने के लिए सरकार योजना बना रही है। वहीं यूपी में किसान बदहाल है। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। वह धरना प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ 22 दिन प्रचार में रहे और भगवान हनुमान की जाति पूछते बताते रहे। उन्होंने किसानों की बात नहीं की।
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किसानों का दर्द नहीं समझा। लखनऊ की सरकार बनने से पहले भाजपा नेता आदमनी दोगुने करने, किसानों की समस्याएं दूर करने की बात कह रहे थे लेकिन अब कोई उनकी बात सुनने को राजी नहीं है। जबकि किसानों की मांग जायज है। हिंदुस्तान का प्रत्येक नागरिक किसानों के साथ खड़ा रहेगा। ये बात चुनाव की नहीं है। चुनाव देश में चार पांच बार बाते हैं। बात ईमानदारी की है।
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पायलट ने कहा कि देश में 70 साल में कई कानून बने। लेकिन कांग्रेस ने वर्ष 2013 जो भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून बना कर पास कराया। ऐसा एक भी कानून देश में आने वाले 70 वर्षों में नहीं बन पाएगा। आज जो लोग केंद्र में सत्ता में है यूपीए सरकार में उन्होंने उस बिल का मजबूरन समर्थन किया।
मोदी सरकार बनते ही इसमें उद्योगपतियों के दबाव में संशोधन (जमीन देने के लिए किसानों को बाध्य करने के लिए कुछ आवश्यक प्रावधान करने का संशोधन होना था) करने की तैयारी हुई लेकिन 45 सांसदों के साथ ही राहुल गांधी ने इसका पुरजोर विरोध कर संशोधन नहीं होने दिया। कांग्रेस की चिंता है कि अन्नदाता की भविष्य की पीढ़ियों को कैसा सुरक्षित रखा जाए। उसकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कानूनी हो।
पूरे देश में सभी पार्टी की सरकारें उसका पालन करें। उन्होंने ये भी कहा कि उनको किसानों की सभी मांगों की पूरी जानकारी नहीं है लेकिन किसान धरना दे रहे हैं इतना सुनते ही वह जिकरपुर आ गए। यहां जिकरपुर, जहानगढ़, कनसेरा, कुराना और टप्पल के सैकड़ों किसान मौजूद थे। यहां पर राष्ट्रीय सचिव एवं राजस्थान प्रभारी विवेक बंसल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह सहित कई कांग्रेस के नेता मौजूद रहे।
क्या है जिकरपुर कांड
1-जिकरपुर अंडरपास पर मई 2010 में नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने बेमियादी धरना प्रदर्शन किया था। 14 अगस्त 2010 को खूनी संघर्ष के दौरान तीन किसान शहीद हुए थे। तकरीबन नौ साल पहले शुरू हुए इस संघर्ष में जिकरपुर, जहानगढ़, कनसेरा, कुराना और टप्पल के सैकड़ों किसान शामिल हैं। इस प्रकरण में किसानों ने नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेस वे के लिए तो सहर्ष जमीनें दे दीं लेकिन जेपी टाउनशिप मामले में किसान एक सामान मुआवजा दिए जाने पर अड़े हैं और सालों बाद भी ये मुद्दा सुलझा नहीं है।
2-जिकरपुर के किसान धरने में ही वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आना हुआ था। उस वक्त केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। राहुल गांधी के प्रयासों से यूपीए सरकार ने दशकों पुराना भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन किया। 3-वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के लिए इस संशोधन बिल में नया प्रावधान कर किसानों को जमीन देने के लिए बाध्य करने की तैयारी हुई लेकिन कांग्रेस ने आठ बार इसका पुरजोर किया। फलस्वरूप वो संशोधन नहीं हो पाया।
बंसल का जिक्र हुआ तो विजेंद्र के खेमे में खामोशी
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मंच से ही राष्ट्रीय सचिव, राजस्थान प्रभारी एवं पूर्व में दो बार विधायक रहे विवेक बंसल का जिक्र कई बार किया। मंच पर बंसल समर्थकों की उपस्थिति दिखी। इसकी वजह ये भी थी पूर्व सांसद एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. विजेंद्र सिंह की एक सभा पूर्व नियोजित थी। इसलिए उनके सभी सिपहसलार वहां पर थे।
केवल विजेंद्र सिंह और कुछेक साथी ही इस सभा में पहुंचे। लोकसभा टिकट को लेकर बंसल और विजेंद्र सिंह में एक बार फिर से अंदरखाने की जोरआजमाइश चल रही है। ऐसे में टप्पल में धरनारत किसानों की सभा में अचानक सचिन पायलट को बुला कर बंसल ने अपना शक्ति प्रदर्शन कर दिया है।
दरअसल, विजेंद्र सिंह जाट समुदाय के होने के कारण टप्पल के जाट बाहुल्य इलाके में हमेशा से अपना प्रभाव रखते हैं लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण से पहले बंसल ने इस इलाके में सचिन पायलट को बुला कर किसानों का माहौल अपने पक्ष में करने की शुरुआत कर दी है। जिससे विजेंद्र सिंह के खेमे को झटका लगा है। हालांकि कार्यक्रम में विजेंद्र सिंह समर्थकाें के साथ मौजूद रहे।
1-जिकरपुर अंडरपास पर मई 2010 में नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने बेमियादी धरना प्रदर्शन किया था। 14 अगस्त 2010 को खूनी संघर्ष के दौरान तीन किसान शहीद हुए थे। तकरीबन नौ साल पहले शुरू हुए इस संघर्ष में जिकरपुर, जहानगढ़, कनसेरा, कुराना और टप्पल के सैकड़ों किसान शामिल हैं। इस प्रकरण में किसानों ने नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेस वे के लिए तो सहर्ष जमीनें दे दीं लेकिन जेपी टाउनशिप मामले में किसान एक सामान मुआवजा दिए जाने पर अड़े हैं और सालों बाद भी ये मुद्दा सुलझा नहीं है।
2-जिकरपुर के किसान धरने में ही वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आना हुआ था। उस वक्त केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी। राहुल गांधी के प्रयासों से यूपीए सरकार ने दशकों पुराना भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन किया। 3-वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के लिए इस संशोधन बिल में नया प्रावधान कर किसानों को जमीन देने के लिए बाध्य करने की तैयारी हुई लेकिन कांग्रेस ने आठ बार इसका पुरजोर किया। फलस्वरूप वो संशोधन नहीं हो पाया।
बंसल का जिक्र हुआ तो विजेंद्र के खेमे में खामोशी
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मंच से ही राष्ट्रीय सचिव, राजस्थान प्रभारी एवं पूर्व में दो बार विधायक रहे विवेक बंसल का जिक्र कई बार किया। मंच पर बंसल समर्थकों की उपस्थिति दिखी। इसकी वजह ये भी थी पूर्व सांसद एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष चौ. विजेंद्र सिंह की एक सभा पूर्व नियोजित थी। इसलिए उनके सभी सिपहसलार वहां पर थे।
केवल विजेंद्र सिंह और कुछेक साथी ही इस सभा में पहुंचे। लोकसभा टिकट को लेकर बंसल और विजेंद्र सिंह में एक बार फिर से अंदरखाने की जोरआजमाइश चल रही है। ऐसे में टप्पल में धरनारत किसानों की सभा में अचानक सचिन पायलट को बुला कर बंसल ने अपना शक्ति प्रदर्शन कर दिया है।
दरअसल, विजेंद्र सिंह जाट समुदाय के होने के कारण टप्पल के जाट बाहुल्य इलाके में हमेशा से अपना प्रभाव रखते हैं लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव के टिकट वितरण से पहले बंसल ने इस इलाके में सचिन पायलट को बुला कर किसानों का माहौल अपने पक्ष में करने की शुरुआत कर दी है। जिससे विजेंद्र सिंह के खेमे को झटका लगा है। हालांकि कार्यक्रम में विजेंद्र सिंह समर्थकाें के साथ मौजूद रहे।
वर्ष 2010 में किसानों से किए गए वादों की हकीकत
1-सर्विस लेन का निर्माण आज तक नहीं किया गया
2-जमीन देने वाले किसानों से टोल टैक्स वसूल रहे
3-दस फीसदी विकसित जमीन अब तक नहीं मिली
4-शहीद किसान स्मारक का निर्माण अब तक नहीं
5-जेपी का स्कूल और अस्पताल अब तक नहीं बना
6-जेपी ग्रुप ने जमीन देने वालों को नौकरी नहीं मिली
7-64 फीसदी की दर से अतिरिक्त मुआवजा नहीं दिया
8-फसली मुआवजा नहीं मिला तो खेती करनी पड़ी
किसान नेता मनवीर तेवतिया की मांग
1-अधिग्रहित होने वाली कुल जमीन का आधा हिस्सा विकसित किया जाए
2-प्रोजेक्ट की 25 फीसदी जमीन विकसित कर मिश्रित प्रयोग के लिए हो
3-किसानों को वो रेट दिया जाए जिस रेट पर दूसरी कंपनी को दी जा रही हो
4-फसलों का समर्थन मूल्य लागत और मेहनताना जोड़ कर तय किया जाए
1-सर्विस लेन का निर्माण आज तक नहीं किया गया
2-जमीन देने वाले किसानों से टोल टैक्स वसूल रहे
3-दस फीसदी विकसित जमीन अब तक नहीं मिली
4-शहीद किसान स्मारक का निर्माण अब तक नहीं
5-जेपी का स्कूल और अस्पताल अब तक नहीं बना
6-जेपी ग्रुप ने जमीन देने वालों को नौकरी नहीं मिली
7-64 फीसदी की दर से अतिरिक्त मुआवजा नहीं दिया
8-फसली मुआवजा नहीं मिला तो खेती करनी पड़ी
किसान नेता मनवीर तेवतिया की मांग
1-अधिग्रहित होने वाली कुल जमीन का आधा हिस्सा विकसित किया जाए
2-प्रोजेक्ट की 25 फीसदी जमीन विकसित कर मिश्रित प्रयोग के लिए हो
3-किसानों को वो रेट दिया जाए जिस रेट पर दूसरी कंपनी को दी जा रही हो
4-फसलों का समर्थन मूल्य लागत और मेहनताना जोड़ कर तय किया जाए