Aligarh News: एसडीआरएफ-पीएसी सहित निजी गोताखोर लगे, 34 घंटे बाद भी गंगा में नहीं मिला संदीप
संदीप सांकरा में गंगा नदी में स्नान करने के दौरान डूबा था। वह गांव के ही रघुवेश के बेटों दिव्यांश और साहिल के मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए अन्य ग्रामीणों के साथ सांकरा गया था।
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आठवीं बटालियन पीएसी बरेली की 15 सदस्यीय बाढ़ आपदा टीम, एसडीआरएफ मुरादाबाद की 15 सदस्यीय टीम और बुलंदशहर से बुलाए गए निजी गोतोखोर 7 अप्रैल को पूरे दिन संदीप की तलाश करते रहे। सांकरा से करीब दस करीब किलोमीटर दूर तक गंगा नदी में थंडरिंग, कांटा सहित लांग सर्च के बावजूद डूबे संदीप का 34 घंटे बाद भी पता नहीं चल सका। एटा के गांव सुपाती निवासी नाना प्रताप सिंह, मामा सत्य प्रकाश और शीशपाल सिंह भी परिवार और रिश्तेदारों सहित गंगा घाट के किनारे ही डटे हैं।
संदीप (22) निवासी नगरिया जाहर 6 अप्रैल की दोपहर करीब 12 बजे सांकरा में गंगा नदी में स्नान करने के दौरान डूबा था। वह गांव के ही रघुवेश के बेटों दिव्यांश और साहिल के मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए अन्य ग्रामीणों के साथ सांकरा गया था। 6 अप्रैल को रात आठ बजे तक उसका पता नहीं चला। इसके बाद 7 अप्रैल की सुबह करीब पांच बजे ही परिजन, रिश्तेदार सहित गांव नगरिया जाहर के निवासी सांकरा में गंगा घाट के किनारे पहुंच गए थे।
ग्रामीणों ने बुलंदशहर से निजी गोताखोर बुलाए थे, जिन्होंने सुबह से गंगा नदी में संदीप की तलाश शुरू की। थाना प्रभारी सुनील तोमर के अनुसार प्लाटून कमांडर मुनिराज के नेतृत्व में आठवीं बटालियन पीएसी बरेली से 15 सदस्यीय बाढ़ आपदा टीम बुलाई थी, जिसने सुबह नौ बजे से तलाश शुरू की। पीएसी की टीम ने शाम साढ़े चार बजे तक नदी में उसे तलाशा। वहीं दोपहर करीब दो बजे मुरादाबाद से भी एसडीआरएफ की 15 सदस्यीय टीम पहुंच गई थी, जो गंगा नदी में डूबे युवक को तलाश रही है।
संदीप को बचाने में डूबे थे अन्य तीनों युवक
रिंकू, देवेंद्र और नितेश के अनुसार गंगा में स्नान करते समय संदीप डूबने लगा। उसने बचाने की आवाज लगाई। वह लोग कुछ दूरी पर ही स्नान कर रहे थे। आवाज सुनकर वह संदीप को बचाने के लिए आगे बढ़े। वह कुछ कर पाते इससे पहले वह भी गहराई में पहुंच जाने के कारण डूब गए थे। इन तीनों को घाट पर दुकान लगाए स्थानीय गोताखोरों ने दौड़कर बाहर निकाल लिया था।
घर पर जुटे रिश्तेदार, मां का रो-रोकर बुरा हाल
खबर पाकर रिश्तेदार गांव नगरिया जाहर पहुंच गए है। डूबे संदीप का पता न चलने से मां गुड्डो देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार और रिश्तेदार महिलाएं उन्हें दिन भर ढाढ़स बंधाती रहीं।