जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल: ब्रेन हैमरेज मां को लेकर पहुंचा शमशाद, नहीं पसीजे डॉक्टर; गिड़गिड़ाते रहे परिजन
मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते इमरजेंसी सेवाएं ठप थीं। यह देख दिलशाद की हिम्मत टूट जाती है। जिस एंबुलेंस से लेकर वह अपनी मां को आया था उसी में लेकर आगरा रवाना हो जाता है। यह नजारा है शुक्रवार को एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर का।
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अलीगढ़ के पड़ोसी जिले बुलंदशहर के कस्बा डिबाई से अपनी मां शकीला को लेकर दिलशाद 29 अगस्त सुबह 11 बजे जेएन मेडिकल कॉलेज आया। शकीला को ब्रेन हैमरेज होने पर डॉक्टरों ने देखा और कहा कि बड़े अस्पताल ले जाओ।
मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते इमरजेंसी सेवाएं ठप थीं। यह देख दिलशाद की हिम्मत टूट जाती है। जिस एंबुलेंस से लेकर वह अपनी मां को आया था उसी में लेकर आगरा रवाना हो जाता है। यह नजारा है शुक्रवार को एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर का। यहां पर दिलशाद अकेला नहीं था। ऐसे सैकड़ों तीमारदार अपने मरीजों को लेकर आ रहे थे और इमरजेंसी पर ताला लटका देख भारी मन से अपने मरीज को ले जा रहे थे।
डॉक्टरों के साथ बातचीत चल रही है। जो भी गतिरोध है समाप्त करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा सहित जो भी डॉक्टरों की मांग है उसके लिए भरोसा दिया है। जल्द ही हल निकाला जाएगा। - प्रो. वसीम अली, प्रॉक्टर, एएमयू
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केस-1 देशपाल की उखड़ रही थीं सांसें
रामपुर के गांव ढकिया से आए 50 वर्षीय देशपाल को सांस लेने में समस्या हो रही थी। बेटा विकास कुमार सुबह 10.30 बजे जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पर उन्हें लेकर आया तो इलाज की जगह निराशा मिली। उसके बाद पास के ही निजी नर्सिंग होम में पिता को भर्ती कराया।
केस-2- शरीर में संक्रमण से फेफड़ों में समस्या
हाथरस के खादा नगला की रहने वाली सुंदरी के शरीर में संक्रमण है। शुक्रवार को तकलीफ बढ़ी और फेफड़ों में समस्या होने लगी। इसके बाद भाई सचिन सुंदरी को लेकर सुबह 11.30 बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर आया। यहां हड़ताल देखकर उसकी हिम्मत टूट गई। बाद में निजी नर्सिंग होम में ले गया।
केस- 3- सड़क हादसे के घायल को भी नहीं मिला इलाज
हाथरस के सिकंदराराऊ से सड़क हादसे के शिकार ब्रजेश को लाया गया। यहां परिजनों ने ब्रजेश को स्ट्रेचर पर एंबुलेंस से उतारा। हड़ताल के चलते इरमजेंसी बंद थी। परिजनों ने कुछ देर डॉक्टरों से गुहार की कि एक्सीडेंट का केस है। बाद में ब्रजेश को निजी नर्सिंग होम ले जाया गया।
निजी नर्सिंग होम के एजेंट रहे सक्रिय
जेएन मेडिकल कॉलेज में हड़ताल के चलते आसपास के निजी नर्सिंग होम की चांदी रही। इनके एजेंट मेडिकल कॉलेज के आसपास पहले से ही सक्रिय रहे। जैसे ही कोई एंबुलेंस मरीज के साथ रुकती। तुरंत बताने पहुंच जाते कि यहां पर हड़ताल है। इलाज नहीं मिलेगा। हमारे यहां पर ले चलो।