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जेएन मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एक दिन की बची है ऑक्सीजन

Fri, 30 Apr 2021 01:31 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Apr 2021 01:31 AM IST
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Oxygen is left for only one day in JN Medical College
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार तक के लिए ऑक्सीजन का स्टॉक बचा हुआ है। अगर लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति न हुई तो शनिवार से यहां पर संकट गहरा सकता है इसके अलावा, कार्डियोलॉजी विभाग में अभी भी सिलिंडर से आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाई है।
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पिछले एक हफ्ते से जेएन मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का संकट गहरा गया है। मेडिकल कॉलेज के पास ऑक्सीजन उत्पादन के दो प्लांट हैं लेकिन उनके लिए लिक्विड ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जिसको गैस में बदलकर मरीजों के बेड तक आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में 200 से अधिक मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर हैं।
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प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि सिलिंडर से आपूर्ति होने वाली ऑक्सीजन अभी हमारे पास नहीं आई है। हमारे पास जो व्यवस्थाएं हैं, उसमें शुक्रवार रात तक मरीजों को ऑक्सीजन देने में सक्षम है। इस बीच और सप्लाई न आई तो शनिवार से व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रोफेसर सिद्दीकी ने बताया कि ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए वह लगातार जिला प्रशासन और आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क बनाए हुए हैं।
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बुखार आने पर सीटी स्कैन नहीं, कोविड-19 टेस्ट कराएं
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने बताया कि लोग बुखार आने पर सीटी स्कैन करा रहे हैं। यह गलत है। जब बुखार आता है, तब फेफड़ों में वायरस का प्रकोप शुरू नहीं होता है। उस समय लोग सीटी स्कैन कराते हैं, जिसमें संक्रमण का पता नहीं चलता है।

उस रिपोर्ट के आधार पर मान लिया जाता है कि वह व्यक्ति कोरोना ग्रसित नहीं है। अगले एक-दो दिनों में उसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और वह संक्रमण से ग्रस्त हो जाता है। बुखार अनुभव होने पर पहले ही कोरोना टेस्ट करा लिया जाए तो इस स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। सीटी स्कैन से फेफड़ों में संक्रमण होने का पता तब चलता है, जब संक्रमण फेफड़ों को पूरी तरह जकड़ लेता है।
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