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बदलते हालातों में भी जारी है नीहार मीरा और एसजेडी स्कूल की पढ़ाई
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ऑनलाइन पढ़ाई करती एसजेडी स्कूल के छात्रा।
- फोटो : CITY OFFICE
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कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में भी नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी है। हालात भले ही घर से निकलने के लिए न हों, लेकिन घर में ही शिक्षकों की कक्षाएं पहुंच गई हैं। शिक्षकों की मेहनत के साथ-साथ विद्यालय प्रबंधन बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच आने वाली समस्याओं का हल कर रहे हैं। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए समय समय पर विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित कर रहे हैं। जिसमें बच्चे हुनर निखारने के साथ साथ अपने इम्यूनिटि सिस्टम को बढ़ाने में लगे हुए हैं।
नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। बच्चे एनसीईआरटी की किताबें डाउनलोड करके पढ़ रहे हैं। इसके अलावा शिक्षक विषयवार वीडियो और ऑडियो बना रहे हैं और ब्राडक्रास्ट कर रहे हैं। इसके अलाव फिजिकल एजूकेशन की वीडियो देखकर बच्चे खुद को फिट बनाने में भी लगे हुए हैं। समय-समय पर पेंटिंग, चित्रकला, स्लोगन, कविता, स्केचिंग, क्राफ्ट की प्रतियोगिता भी आयोजित कराई गई हैं। इसके अलावा छह सदस्यीय टीम शिक्षक, अभिभावक और बच्चों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों की काउंसिलिंग भी की जा रही है।
जबकि एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल में सीनियर बच्चों को वीडियो कॉल के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। जबकि छोटे बच्चों को व्हाट्सएप के माध्यम से पढ़ा रहे हैं। बच्चे भी अपने पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग कर बच्चे अपना हुनर भी दिखा रहे हैं और खुद को फिट भी बना रहे हैं। शिक्षक अपनी आडियो-वीडियो बनाकर बच्चों को विषय समझा रहे हैं। इसके बाद बच्चों के आने वाले प्रश्नों का उत्तर भी दिया जा रहा है। वहीं स्कूल प्रबंधन अन्य तकनीकी प्लेटफार्म पर पढ़ाई करने के लिए तैयारी कर रहा है।
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हर बदलाव के नकारात्मक व सकारात्मक पहलू अवश्य होते हैं। फिलहाल कोरोना वायरस के संक्रमण के साये में बच्चों का भविष्य तैयार किया जा रहा है। आने वाला समय टेक्नोलॉजी युक्त रहेगा। ऐसी बातों को नकारा भी नहीं जा सकता है। ऐसे में हमें यह सोचने का मौका मिला है कि बच्चे किस तरह से गैजेट के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षक ऑनलाइन कक्षा लेकर अपनी जिम्मेदारी अदा कर रहे हैं। देश की शिक्षा रुकी नहीं है। ऐसे में हम वर्तमान हालातों में बदलना शुरू हो गए हैं।
-कल्पलता चंद्रहास, प्रधानाचार्या, नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल
पर्यावरण पर 1971 से कार्य कर रहा हूं। जो चिंताएं रिसर्च के आधार पर पहले बताई थीं। आज वहीं मनुष्य के सामने आ गई हैं। कोविड 19 की वजह से पर्यावरण को फायदा हुआ है। प्रदूषण कम हो गया है। नदियां साफ हो गई हैं। ऐसे में अब प्रत्येक इंसान की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अगर ऐसे ही पर्यावरण को संजोकर रखा जाए तो निश्चित ही पर्यावरण मनुष्य के अनुकूल बना रहेगा।
- प्रो. बीएस नीहार, पर्यावरणविद व शिक्षाविद और फाउंडर चेयरमैन, नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल
लॉकडाउन के चलते विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग कैसे करें। यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन कक्षा में होने वाली पढ़ाई का महत्व भी अलग है। तकनीकी रूप से देखें तो कंप्यूटर पर अधिक काम नहीं किया जा सकता। कक्षा में बच्चों और शिक्षकों की भावनाएं जुड़ती हैं। वह टेक्नोलॉजी के माध्यम से नहीं हो सकता है। बच्चों का समय जो जा रहा है। वह वापस नहीं आ सकता। बच्चों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। कुछ बच्चों की साल धीरे-धीरे निकल ही रही है। ऐसे में नुकसान को किस तरीके से कम कर सकते हैं। ऑनलाइन शिक्षण पद्धति एक सार्थक प्रयास है।
-डॉ. नीलम शर्मा, प्रिंसिपल एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल
ऑनलाइन कक्षा चलने से बच्चों और शिक्षकों को नया वातावरण मिला है। बच्चे भी सीख रहे हैं। अपनी समस्याओं को भी दूर कर रहे हैं और अच्छे से पढ़ भी रहे हैं। कक्षा ऑनलाइन चलाने के लिए घर पर ही बोर्ड लगा दिया है। मोबाइल स्टेंड लगाकर बच्चे पढ़ रहे हैं। कक्षा ब्राडक्रास्ट होने लगी है तो पढ़ाने का तरीका भी बदला है। अच्छा पढ़ाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। बच्चे अभिभावकों के साथ जुड़ रहे हैं तो अभिभावक भी उनकी समस्या बता रहे हैं।
- कमल गौड़, शिक्षक हिंदी संस्कृत एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल
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नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई जारी है। बच्चे एनसीईआरटी की किताबें डाउनलोड करके पढ़ रहे हैं। इसके अलावा शिक्षक विषयवार वीडियो और ऑडियो बना रहे हैं और ब्राडक्रास्ट कर रहे हैं। इसके अलाव फिजिकल एजूकेशन की वीडियो देखकर बच्चे खुद को फिट बनाने में भी लगे हुए हैं। समय-समय पर पेंटिंग, चित्रकला, स्लोगन, कविता, स्केचिंग, क्राफ्ट की प्रतियोगिता भी आयोजित कराई गई हैं। इसके अलावा छह सदस्यीय टीम शिक्षक, अभिभावक और बच्चों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। आवश्यकता पड़ने पर अभिभावकों की काउंसिलिंग भी की जा रही है।
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जबकि एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल में सीनियर बच्चों को वीडियो कॉल के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। जबकि छोटे बच्चों को व्हाट्सएप के माध्यम से पढ़ा रहे हैं। बच्चे भी अपने पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग कर बच्चे अपना हुनर भी दिखा रहे हैं और खुद को फिट भी बना रहे हैं। शिक्षक अपनी आडियो-वीडियो बनाकर बच्चों को विषय समझा रहे हैं। इसके बाद बच्चों के आने वाले प्रश्नों का उत्तर भी दिया जा रहा है। वहीं स्कूल प्रबंधन अन्य तकनीकी प्लेटफार्म पर पढ़ाई करने के लिए तैयारी कर रहा है।
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हर बदलाव के नकारात्मक व सकारात्मक पहलू अवश्य होते हैं। फिलहाल कोरोना वायरस के संक्रमण के साये में बच्चों का भविष्य तैयार किया जा रहा है। आने वाला समय टेक्नोलॉजी युक्त रहेगा। ऐसी बातों को नकारा भी नहीं जा सकता है। ऐसे में हमें यह सोचने का मौका मिला है कि बच्चे किस तरह से गैजेट के साथ पढ़ाई कर सकते हैं। शिक्षक ऑनलाइन कक्षा लेकर अपनी जिम्मेदारी अदा कर रहे हैं। देश की शिक्षा रुकी नहीं है। ऐसे में हम वर्तमान हालातों में बदलना शुरू हो गए हैं।
-कल्पलता चंद्रहास, प्रधानाचार्या, नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल
पर्यावरण पर 1971 से कार्य कर रहा हूं। जो चिंताएं रिसर्च के आधार पर पहले बताई थीं। आज वहीं मनुष्य के सामने आ गई हैं। कोविड 19 की वजह से पर्यावरण को फायदा हुआ है। प्रदूषण कम हो गया है। नदियां साफ हो गई हैं। ऐसे में अब प्रत्येक इंसान की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अगर ऐसे ही पर्यावरण को संजोकर रखा जाए तो निश्चित ही पर्यावरण मनुष्य के अनुकूल बना रहेगा।
- प्रो. बीएस नीहार, पर्यावरणविद व शिक्षाविद और फाउंडर चेयरमैन, नीहार मीरा नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल
लॉकडाउन के चलते विद्यार्थी अपने समय का सदुपयोग कैसे करें। यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन कक्षा में होने वाली पढ़ाई का महत्व भी अलग है। तकनीकी रूप से देखें तो कंप्यूटर पर अधिक काम नहीं किया जा सकता। कक्षा में बच्चों और शिक्षकों की भावनाएं जुड़ती हैं। वह टेक्नोलॉजी के माध्यम से नहीं हो सकता है। बच्चों का समय जो जा रहा है। वह वापस नहीं आ सकता। बच्चों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। कुछ बच्चों की साल धीरे-धीरे निकल ही रही है। ऐसे में नुकसान को किस तरीके से कम कर सकते हैं। ऑनलाइन शिक्षण पद्धति एक सार्थक प्रयास है।
-डॉ. नीलम शर्मा, प्रिंसिपल एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल
ऑनलाइन कक्षा चलने से बच्चों और शिक्षकों को नया वातावरण मिला है। बच्चे भी सीख रहे हैं। अपनी समस्याओं को भी दूर कर रहे हैं और अच्छे से पढ़ भी रहे हैं। कक्षा ऑनलाइन चलाने के लिए घर पर ही बोर्ड लगा दिया है। मोबाइल स्टेंड लगाकर बच्चे पढ़ रहे हैं। कक्षा ब्राडक्रास्ट होने लगी है तो पढ़ाने का तरीका भी बदला है। अच्छा पढ़ाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। बच्चे अभिभावकों के साथ जुड़ रहे हैं तो अभिभावक भी उनकी समस्या बता रहे हैं।
- कमल गौड़, शिक्षक हिंदी संस्कृत एसजेडी मेमोरियल पब्लिक स्कूल