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कोवाक्सिन की दो डोज लगवाने के बाद एक हजार लोग स्वस्थ
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कौशल कुमार ओझा
जनपद में कोवाक्सिन के दो डोज एक हजार लोगों को लग चुकी है। अब तक एक भी गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। ट्रॉयल में शामिल लोगों की आरटीपीसीआर जांच भी हो चुकी है।
जेएन मेडिकल कॉलेज में कोवाक्सिन का ट्रॉयल नवंबर 2020 में शुरू हुआ था। यह ट्रॉयल आईसीएमआर की ओर से कराया गया था। एक हजार लोगों का चयन कर कोवाक्सिन का पहला डोज दिया गया था। सभी लोग जनपद के हैं। 28 से 30 दिन के बीच दूसरा डोज दिया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने ट्रॉयल में शामिल लोगों पर नजर बनाए रखी। दो डोज पूरी होने के बाद संबंधित लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराई गई। ट्रॉयल के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. मोहम्मद शमीम ने बताया कि ट्रॉयल में शामिल एक हजार लोगों को टीके की दो खुराक दी गई थीं, किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई। कोवाक्सिन पूरी तरह सुरक्षित है, निर्भीक होकर लगवाएं। ट्रॉयल में शामिल लोगों को कुल 12 विजिट करनी है। सोमवार को तीसरी विजिट पूरी हो जाएगी।
ट्रॉयल के लिए तैयार करने के दौरान हुई थी परेशानी
फील्ड ऑफिसर शफीक उर रहमान ने बताया कि शुरू में टीम जब शहर एवं आसपास के गांवों में गई तो लोग तरह-तरह के सवाल पूछते थे। भ्रामक सूचनाएं उनके पास पहुंची थीं। हालांकि समझाने के बाद लोग सहमत हो गए। हम लोगों ने करीब 1300 लोगों को टीकाकरण के लिए तैयार किया था।
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ट्रॉयल में चयन का मापदंड
प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. मोहम्मद शमीम अहमद ने बताया कि 1000 लोगों में से 25 प्रतिशत ऐसे लोगों का चुनाव करना था, जो हाई रिस्क मरीज हों। यानी किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हाें। 5 प्रतिशत हेल्थ वर्कर का चयन करना था। बाकी 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का। गर्भवती एवं स्तनपान करने वाली महिलाओं का चयन नहीं करना था।
ट्रॉयल में शामिल लोग बोले, बिल्कुल ठीक हूं
दो डोज लगवा चुके लोगों ने बातचीत में कहा कि वह बिल्कुल ठीक हैं। टीके के दो डोज लगवाने के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्हें खुशी है कि ट्रॉयल में शामिल हुए। गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए ट्रॉयल में शामिल व्यक्तियों का नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं। एक व्यक्ति जेएन मेडिकल कॉलेज का वर्कर है। जबकि दूसरा व्यक्ति खैर क्षेत्र का है।
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जनपद में कोवाक्सिन के दो डोज एक हजार लोगों को लग चुकी है। अब तक एक भी गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। ट्रॉयल में शामिल लोगों की आरटीपीसीआर जांच भी हो चुकी है।
जेएन मेडिकल कॉलेज में कोवाक्सिन का ट्रॉयल नवंबर 2020 में शुरू हुआ था। यह ट्रॉयल आईसीएमआर की ओर से कराया गया था। एक हजार लोगों का चयन कर कोवाक्सिन का पहला डोज दिया गया था। सभी लोग जनपद के हैं। 28 से 30 दिन के बीच दूसरा डोज दिया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने ट्रॉयल में शामिल लोगों पर नजर बनाए रखी। दो डोज पूरी होने के बाद संबंधित लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराई गई। ट्रॉयल के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. मोहम्मद शमीम ने बताया कि ट्रॉयल में शामिल एक हजार लोगों को टीके की दो खुराक दी गई थीं, किसी तरह की शिकायत सामने नहीं आई। कोवाक्सिन पूरी तरह सुरक्षित है, निर्भीक होकर लगवाएं। ट्रॉयल में शामिल लोगों को कुल 12 विजिट करनी है। सोमवार को तीसरी विजिट पूरी हो जाएगी।
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ट्रॉयल के लिए तैयार करने के दौरान हुई थी परेशानी
फील्ड ऑफिसर शफीक उर रहमान ने बताया कि शुरू में टीम जब शहर एवं आसपास के गांवों में गई तो लोग तरह-तरह के सवाल पूछते थे। भ्रामक सूचनाएं उनके पास पहुंची थीं। हालांकि समझाने के बाद लोग सहमत हो गए। हम लोगों ने करीब 1300 लोगों को टीकाकरण के लिए तैयार किया था।
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ट्रॉयल में चयन का मापदंड
प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर प्रो. मोहम्मद शमीम अहमद ने बताया कि 1000 लोगों में से 25 प्रतिशत ऐसे लोगों का चुनाव करना था, जो हाई रिस्क मरीज हों। यानी किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हाें। 5 प्रतिशत हेल्थ वर्कर का चयन करना था। बाकी 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का। गर्भवती एवं स्तनपान करने वाली महिलाओं का चयन नहीं करना था।
ट्रॉयल में शामिल लोग बोले, बिल्कुल ठीक हूं
दो डोज लगवा चुके लोगों ने बातचीत में कहा कि वह बिल्कुल ठीक हैं। टीके के दो डोज लगवाने के बाद उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्हें खुशी है कि ट्रॉयल में शामिल हुए। गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए ट्रॉयल में शामिल व्यक्तियों का नाम उजागर नहीं किए जा रहे हैं। एक व्यक्ति जेएन मेडिकल कॉलेज का वर्कर है। जबकि दूसरा व्यक्ति खैर क्षेत्र का है।