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अकेले टिप्पा के भाई ही नहीं, अवैध एंबुलेंस कारोबार में और भी गैंग
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मेडिकल रोड स्थित एक अस्पताल से निजी एंबुलेंस में मरीज को बैठाते परिजन।
- फोटो : CITY OFFICE
जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर फैला अवैध एंबुलेंसों का मकड़जाल अकेले कुख्यात अपराधी अकरम टिप्पा के भाइयों की देन नहीं। इस तरह के आधा दर्जन और गैंग ऐसे हैं जो इस अवैध कारोबार में जड़ें जमाए हुए हैं। इनमें आपस में एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में दखल को लेकर अक्सर टकराव भी होते हैं।
आलम ये है कि इस रैकेट में 100 के करीब अवैध एंबुलेंस इस कारोबार में जमी हैं और इन सभी को शहर के आधा दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग होमों से व्यापार मिलता है, जिनके मालिकान पेशेवर डॉक्टर नहीं हैं। बल्कि डॉक्टरों को वहां ऑन-कॉल बुलाकर इलाज कराया जाता है। अकरम टिप्पा के भाइयों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी पुलिस की नजर अब इन अन्य गैंगों पर भी पहुंच गई है और एक-एक कर सभी की फाइल खोलने की तैयारी है।
ऐसे एरिया बांटकर संचालित हो रहा अवैध कारोबार
पुलिस की अब तक की जांच में जो तथ्य उजागर हो रहे हैं, उसके अनुसार इन अवैध एंबुलेंस रैकेट के अलग अलग गैंगों ने अपने-अपने संबंधों के अनुसार नर्सिंग होमों से कमीशन के आधार पर सांठ-गांठ कर रखी है। ये वही नर्सिंग होम हैं, जिनके मालिकान पेशेवर डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने अपने किसी परिचित डॉक्टर की डिग्री किराये पर लेकर रजिस्ट्रेशन कराकर नर्सिंग होम शुरू कर रखा है। वे अपने यहां मरीज की जरूरत के अनुसार डॉक्टरों को ऑन-कॉल बुलाते हैं। इन नर्सिंग होम संचालकों ने अपनी कुछ एंबुलेंस भी इन गैंगों को बांट रखी हैं। इनमें जैसे अकरम के भाइयों पर 16 एंबुलेंस हैं। इसी तरह एक अन्य गैंग पर भी 15 एंबुलेंस हैं। इसके अलावा एक एंबुलेंस गैंग का खुद का अपना नर्सिंग होम है। वहीं एक नर्सिंग होम संचालक ने तो अपनी एंबुलेंस कासगंज जनपद के सरकारी अस्पतालों में छोड़ रखी हैं। वहां से मरीज को जेएन मेडिकल कॉलेज के नाम पर लेकर आया जाता है और फिर अपने यहां भर्ती कर इलाज कराया जाता है। इस तरह यह पूरा रैकेट संचालित हो रहा है।
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एक दूसरे के एरिया में दखल को लेकर होता है टकराव
इन एंबुलेंस गैंगों में अक्सर टकराव की खबरें सामने आती रहती हैं। जिसमें कभी इस बात पर कि उसके इलाके के नर्सिंग होम का मरीज ये क्यों ले गया। दूसरा इस बात पर कि यह मरीज पहले से उन्होंने साध रखा था और दूसरा क्यों ले जा रहा है। इस टकराव के चलते जो 30 एंबुलेंस नियमति रूप से मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण के साथ चल रही हैं। उनका नुकसान होता है। वे दहशत में कुछ बोल नहीं पाते हैं।
-इस अवैध एंबुलेंस रैकेट पर लगातार काम किया जा रहा है। फरार असलम व अशरफ को तलाशा जा रहा है। जांच में जो भी अवैध एंबुलेंस सामने आ रही हैं, उनको सूचीबद्ध किया जा रहा है। उन पर भी इसी तरह से कार्रवाई की जाएगी।-श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
--ये हैं नर्सिंग होम और एंबुलेंसों का मकड़जाल-
-रामघाट रोड पर दो नर्सिंग होम, जिनके मालिकान नहीं हैं डॉक्टर
-एटा जीटी रोड पर दो नर्सिंग होम, जिनके मालिकान नहीं डॉक्टर
-अनूपशहर व महेशपुर रोड पर 4 नर्सिंग होम भी ऐसे ही संचालित
-एक-एक नर्सिंग होम से पांच से अधिक एंबुलेंस जुड़ी रहती हैं
-एक नर्सिंग होम ने कासगंज जनपद तक में छोड़ रखी हैं एंबुलेंस
-टिप्पा के भाइयों के अलावा पांच अन्य गैंग भी हैं इसमें सक्रिय
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आलम ये है कि इस रैकेट में 100 के करीब अवैध एंबुलेंस इस कारोबार में जमी हैं और इन सभी को शहर के आधा दर्जन से अधिक ऐसे नर्सिंग होमों से व्यापार मिलता है, जिनके मालिकान पेशेवर डॉक्टर नहीं हैं। बल्कि डॉक्टरों को वहां ऑन-कॉल बुलाकर इलाज कराया जाता है। अकरम टिप्पा के भाइयों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी पुलिस की नजर अब इन अन्य गैंगों पर भी पहुंच गई है और एक-एक कर सभी की फाइल खोलने की तैयारी है।
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ऐसे एरिया बांटकर संचालित हो रहा अवैध कारोबार
पुलिस की अब तक की जांच में जो तथ्य उजागर हो रहे हैं, उसके अनुसार इन अवैध एंबुलेंस रैकेट के अलग अलग गैंगों ने अपने-अपने संबंधों के अनुसार नर्सिंग होमों से कमीशन के आधार पर सांठ-गांठ कर रखी है। ये वही नर्सिंग होम हैं, जिनके मालिकान पेशेवर डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने अपने किसी परिचित डॉक्टर की डिग्री किराये पर लेकर रजिस्ट्रेशन कराकर नर्सिंग होम शुरू कर रखा है। वे अपने यहां मरीज की जरूरत के अनुसार डॉक्टरों को ऑन-कॉल बुलाते हैं। इन नर्सिंग होम संचालकों ने अपनी कुछ एंबुलेंस भी इन गैंगों को बांट रखी हैं। इनमें जैसे अकरम के भाइयों पर 16 एंबुलेंस हैं। इसी तरह एक अन्य गैंग पर भी 15 एंबुलेंस हैं। इसके अलावा एक एंबुलेंस गैंग का खुद का अपना नर्सिंग होम है। वहीं एक नर्सिंग होम संचालक ने तो अपनी एंबुलेंस कासगंज जनपद के सरकारी अस्पतालों में छोड़ रखी हैं। वहां से मरीज को जेएन मेडिकल कॉलेज के नाम पर लेकर आया जाता है और फिर अपने यहां भर्ती कर इलाज कराया जाता है। इस तरह यह पूरा रैकेट संचालित हो रहा है।
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एक दूसरे के एरिया में दखल को लेकर होता है टकराव
इन एंबुलेंस गैंगों में अक्सर टकराव की खबरें सामने आती रहती हैं। जिसमें कभी इस बात पर कि उसके इलाके के नर्सिंग होम का मरीज ये क्यों ले गया। दूसरा इस बात पर कि यह मरीज पहले से उन्होंने साध रखा था और दूसरा क्यों ले जा रहा है। इस टकराव के चलते जो 30 एंबुलेंस नियमति रूप से मेडिकल कॉलेज में पंजीकरण के साथ चल रही हैं। उनका नुकसान होता है। वे दहशत में कुछ बोल नहीं पाते हैं।
-इस अवैध एंबुलेंस रैकेट पर लगातार काम किया जा रहा है। फरार असलम व अशरफ को तलाशा जा रहा है। जांच में जो भी अवैध एंबुलेंस सामने आ रही हैं, उनको सूचीबद्ध किया जा रहा है। उन पर भी इसी तरह से कार्रवाई की जाएगी।-श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
--ये हैं नर्सिंग होम और एंबुलेंसों का मकड़जाल-
-रामघाट रोड पर दो नर्सिंग होम, जिनके मालिकान नहीं हैं डॉक्टर
-एटा जीटी रोड पर दो नर्सिंग होम, जिनके मालिकान नहीं डॉक्टर
-अनूपशहर व महेशपुर रोड पर 4 नर्सिंग होम भी ऐसे ही संचालित
-एक-एक नर्सिंग होम से पांच से अधिक एंबुलेंस जुड़ी रहती हैं
-एक नर्सिंग होम ने कासगंज जनपद तक में छोड़ रखी हैं एंबुलेंस
-टिप्पा के भाइयों के अलावा पांच अन्य गैंग भी हैं इसमें सक्रिय