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नई खोजः यूनानी दवा से हेपेटाइटिस-बी का उपचार
कौशल कुमार ओझा
Updated Thu, 19 May 2016 01:23 AM IST
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खां तिब्बिया कॉलेज के प्रो. हकीम नईम अहमद खान ने यूनानी दवा से हेपेटाइटिस-बी के उपचार का रास्ता खोज लिया है। वर्ष 2016 में हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित छह मरीजों पर यूनानी पद्वति की इस दवा का इस्तेमाल करने के बाद उन्हें लाभ मिला और उपचार के बाद उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आयी है। प्रो. खान की मानें तो वह अब तक सौ से अधिक मरीजों का उपचार कर हेपेटाइटिस बी से मुक्ति दिला चुके है। यूनानी चिकित्सा जगत में इसे बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
साल 2009 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आयुष विभाग (अब आयुष मंत्रालय) से मिले प्रोजेेक्ट के तहत हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा, उसका उपचार और उसके जड़ से खात्मे पर काम शुरू किया गया था। वर्ष 2014 में इस पर एनिमल ट्रायल सफल रहा। इस ट्रायल में उन्होंने चूहे के लिवर को पहले हेपेटाइटिस बी से संक्रमित कर पूरी तरह खराब कर दिया। उसके बाद उपचार से ठीक किया। रिपोर्ट देखने के बाद आयुष मंत्रालय ने उन्हें तीसरे चरण में मानव पर दवा प्रयोग करने की इजाजत दी।
प्रो. नईम ने हेपेटाइटिस बी से मुक्ति दिलाने के लिए दवा का फार्मूलेशन तैयार किया है, जिसे वह पेटेंट कराएंगे। इस फार्मूलेशन में उन्होंने यूनानी की कुछ रूटीन दवाएं अरक मको, अरक कासनी, अरक चिरायता, अरक अफसंतीन, माजून दबीदुलवरद, शरबत दीनार के साथ प्रयोग किया। उनकी दवा पहले हेपेटाइटिस बी वायरस के अटैक से खराब लीवर को न्यूट्रीशन देकर सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे वह और खराब होने से बच जाता है। फिर दवाओं में कई ऐसे तत्व है जो वायरस पर अटैक कर खत्म कर देते है और लिवर स्वस्थ हो जाता है।
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साल 2009 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आयुष विभाग (अब आयुष मंत्रालय) से मिले प्रोजेेक्ट के तहत हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा, उसका उपचार और उसके जड़ से खात्मे पर काम शुरू किया गया था। वर्ष 2014 में इस पर एनिमल ट्रायल सफल रहा। इस ट्रायल में उन्होंने चूहे के लिवर को पहले हेपेटाइटिस बी से संक्रमित कर पूरी तरह खराब कर दिया। उसके बाद उपचार से ठीक किया। रिपोर्ट देखने के बाद आयुष मंत्रालय ने उन्हें तीसरे चरण में मानव पर दवा प्रयोग करने की इजाजत दी।
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प्रो. नईम ने हेपेटाइटिस बी से मुक्ति दिलाने के लिए दवा का फार्मूलेशन तैयार किया है, जिसे वह पेटेंट कराएंगे। इस फार्मूलेशन में उन्होंने यूनानी की कुछ रूटीन दवाएं अरक मको, अरक कासनी, अरक चिरायता, अरक अफसंतीन, माजून दबीदुलवरद, शरबत दीनार के साथ प्रयोग किया। उनकी दवा पहले हेपेटाइटिस बी वायरस के अटैक से खराब लीवर को न्यूट्रीशन देकर सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे वह और खराब होने से बच जाता है। फिर दवाओं में कई ऐसे तत्व है जो वायरस पर अटैक कर खत्म कर देते है और लिवर स्वस्थ हो जाता है।
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