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ताउते चक्रवात के कारण हो सकता है मानसून में विलंब
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ताउते चक्रवात पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का भूगोल विभाग भी नजर रखे हुए है। मैदानी इलाकों में इसके प्रभाव और उसके परिणामों का अध्ययन कर रहे एएमयू भूगोल विभाग के पूर्व चेयरमैन वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि इस चक्रवात के कारण मानसून के आने में विलंब हो सकता है।
मैदानी इलाकों में इस चक्रवात का सबसे बड़ा प्रभाव यही होगा। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण जब मौसम परिवर्तित होता है तब अलग स्थिति होती है. लेकिन जब अरब सागर में समुद्र की स्थिति के कारण मौसम में बदलाव होता है तब स्थिति दूसरी हो जाती है। यह चक्रवात गुजरात और महाराष्ट्र से प्रवेश करता हुआ पूरब की ओर बढ़ेगा। संभावना है कि बिहार तक पहुंचते-पहुंचते इसकी तीव्रता बहुत कम हो जाएगी।
प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि इस चक्रवात के गुजर जाने के बाद जितनी गर्मी अधिक पड़ेगी उतना ही मानसून के लिए लाभकारी रहेगा। गर्मी पड़ने से चक्रवात के कारण जो अस्थिरता पैदा है उसको सामान्य करने में मदद मिलेगी। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप में चक्रवातों का आना सामान्य बात है। प्रतिवर्ष चक्रवात आते हैं। उनको एक उपनाम दे दिया जाता है। कभी-कभी इनकी तीव्रता बहुत ज्यादा होती है, लेकिन कभी-कभी इनकी तीव्रता इतनी कम होती है कि यह चर्चा में भी नहीं आ पाते हैं। अरब सागर में ऐसा होना सामान्य बात है।
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अतीक अहमद कहते हैं कि इस बार मई महीने में तापमान बहुत गिर गया है। इसका मुख्य कारण इस चक्रवात की तीव्रता ही है। इससे पहले भी चक्रवात आए, लेकिन वह इतनी तीव्रता के नहीं थे जिसका असर मैदानी इलाकों में महसूस नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि चक्रवात और उसके प्रभाव पर हम पूरी नजर रखे हुए हैं। इसके अध्ययन से निकलने वाले परिणाम आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे।
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मैदानी इलाकों में इस चक्रवात का सबसे बड़ा प्रभाव यही होगा। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण जब मौसम परिवर्तित होता है तब अलग स्थिति होती है. लेकिन जब अरब सागर में समुद्र की स्थिति के कारण मौसम में बदलाव होता है तब स्थिति दूसरी हो जाती है। यह चक्रवात गुजरात और महाराष्ट्र से प्रवेश करता हुआ पूरब की ओर बढ़ेगा। संभावना है कि बिहार तक पहुंचते-पहुंचते इसकी तीव्रता बहुत कम हो जाएगी।
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प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि इस चक्रवात के गुजर जाने के बाद जितनी गर्मी अधिक पड़ेगी उतना ही मानसून के लिए लाभकारी रहेगा। गर्मी पड़ने से चक्रवात के कारण जो अस्थिरता पैदा है उसको सामान्य करने में मदद मिलेगी। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप में चक्रवातों का आना सामान्य बात है। प्रतिवर्ष चक्रवात आते हैं। उनको एक उपनाम दे दिया जाता है। कभी-कभी इनकी तीव्रता बहुत ज्यादा होती है, लेकिन कभी-कभी इनकी तीव्रता इतनी कम होती है कि यह चर्चा में भी नहीं आ पाते हैं। अरब सागर में ऐसा होना सामान्य बात है।
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अतीक अहमद कहते हैं कि इस बार मई महीने में तापमान बहुत गिर गया है। इसका मुख्य कारण इस चक्रवात की तीव्रता ही है। इससे पहले भी चक्रवात आए, लेकिन वह इतनी तीव्रता के नहीं थे जिसका असर मैदानी इलाकों में महसूस नहीं किया गया था। उन्होंने बताया कि चक्रवात और उसके प्रभाव पर हम पूरी नजर रखे हुए हैं। इसके अध्ययन से निकलने वाले परिणाम आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे।