फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Modi was seen preparing the ground for the new heroes of nationalism

अलीगढ़ः राष्ट्रवाद के नए नायकों के लिए जमीन तैयार करते नजर आए मोदी

Fri, 17 Sep 2021 09:08 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 09:08 PM IST
विज्ञापन
Modi was seen preparing the ground for the new heroes of nationalism
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पटका पहनाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
विज्ञापन

राज्य विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवाद के नए नायकों के लिए प्रतिमान गढ़े, जिससे कि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके।
प्रधानमंत्री का साफ कहना था कि इतिहास ने उन लोगों के साथ न्याय नहीं किया। वह चाहें राजा सुहेल देव हों, सर दीनबंधु छोटू राम हों, राजा महेंद्र प्रताप हों या फिर गुजरात के क्रांतिकारी श्याम जी कृष्ण वर्मा हों।
विज्ञापन

राजा सुहेल देव के अलावा अन्य तीन शख्सियत वह थीं, जो राष्ट्रीय आंदोलन में अपनी भूमिका कांग्रेस से अलग रहकर अदा कर रही थीं। राष्ट्रीय आंदोलन का अध्ययन करने वाले नवीन शर्मा कहते हैं कि तीनों लोग कांग्रेस की नीतियों और कार्यशैली से अधिक मुखर थे। प्रधानमंत्री मोदी का विश्वविद्यालय के शिलान्यास कार्यक्रम में इनका नाम लेना साफ दर्शाता है कि वह उन लोगों की भूमिका को और अधिक रेखांकित करना चाहते हैं जिनकी भूमिका उन्हें लगता है उतनी उभर कर नहीं आई जितनी आनी चाहिए थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजा सुहेल देव
- यह 11वीं शताब्दी में श्रावस्ती (अब पूर्वी उत्तर प्रदेश) के राजा थे। इन्होंने भारतीय भूभाग पर हमला करने वाले महमूद गजनवी के सेनापति मियां गाजी को न सिर्फ युद्ध में हराया बल्कि उसको मार दिया था। मुस्लिम आक्रांता पर इस घटना को भारतीय राजा की महान विजय के रूप में देखा जाता है। साथ ही पिछड़े वर्ग के लोकप्रिय शासकों में उनका नाम बेहद आदर के साथ लिया जाता है।
श्याम जी कृष्ण वर्मा
इनका जन्म गुजरात के मांडवी में 1857 में हुआ। वह होम रूल लीग के सदस्य भी थे। क्रांतिकारी गतिविधियों के चलते ब्रिटिश सरकार के निशाने पर रहे। विलायत से वकालत करने के बाद पत्रकारिता के माध्यम से भी राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रहे। प्रथम विश्वयुद्ध के समय राजा महेंद्र प्रताप विशेष तौर पर श्याम जी वर्मा और लाला हरदयाल से मिलने के लिए यूरोप गए। निर्वासित सरकार की भूमिका बनी। सन 1930 में जिनेवा में निधन हो गया।
सर दीनबंधु छोटू राम
1881 में अविभाजित पंजाब में पैदा हुए। जाट समुदाय में बेहद आदर के साथ नाम लिया जाता है। समाज के दबे कुचले वर्ग के उत्थान के लिए सदैव कार्य करते रहे। उनके सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर ही ब्रिटिश सरकार ने उन्हें सर की उपाधि प्रदान की थी। इनका निधन 1945 को हुआ।

राजा महेंद्र प्रताप
अपने जीवन के 31 वर्ष देश से बाहर निर्वासन में काटने वाले राजा महेंद्र प्रताप ने सबसे पहले भारत की पहली निर्वासित सरकार अफगानिस्तान में बनाई। शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए अपनी संपत्ति दान की। दुनिया के 91 से अधिक देशों में जाकर भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रयास करते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed