फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   MHRD is going on AMU tuning screws

एएमयू पर कसता जा रहा है एमएचआरडी का शिकंजा

Thu, 09 Jun 2016 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 09 Jun 2016 01:40 AM IST
विज्ञापन
MHRD is going on AMU tuning screws
एएमयू
यूजीसी अधिनियम 2010 से बचने के लिए टाल-मटोल की नीति अपना रहे एएमयू प्रशासन पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का शिकंजा कसता जा रहा है।
विज्ञापन

मंत्रालय ने एएमयू को खत लिखकर साफ कर दिया है कि एएमयू वीसी पैनल में उसी का नाम शामिल करे, जिसके पास 10 वर्ष प्रोफेसर या उसके समकक्ष अनुभव है। इसका ध्यान रखे बिना पैनल बनाकर भेजा गया तो उसमें विलंब एवं परेशानी तय है। मंत्रालय के ताजा खत के बाद एएमयू कुलपति बनने का सपना देख रहे कई लोगों एवं उनके समर्थकों के होश उड़ गए है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा यह खत 23 मई को एएमयू वीसी को लिखा गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस पत्र के आने के बाद एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक 28 मई को हुई और उसमें सदस्यों के बीच इस खत को पेश नहीं किया गया।
विज्ञापन

बैठक में जिस पत्र की चर्चा हुई वह 19 अप्रैल को मंत्रालय द्वारा लिखी गई थी, जो एएमयू समेत देश के तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों को लिखा गया था। 23 मई के पत्र में कहा गया है कि एएमयू के नए कुलपति का पैनल बनाते समय प्रोफेसर के 10 वर्ष या उसके समकक्ष अनुभव का ध्यान रखा जाए। विजिटर के पास पैनल भेजने के पहले यह सुनिश्चित हो जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

उच्च शिक्षा का स्तर बनाए रखने के लिए यूजीसी अधिनियम 2010 में इसे रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी साफ-साफ कहा गया है कि यूजीसी अधिनियम 2010 सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि एएमयू कुलपति पद के दावेदारों में वर्तमान सह कुलपति बिग्रेडियर सैयद अहमद अली एवं उत्तर प्रदेश के प्रमुख सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी का नाम भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा बनाया गया पैनल एक बार रद्द हो चुका है।
इस संबंध में कोशिश के बावजूद रजिस्ट्रार प्रो. असफर अली से बात नहीं हो सकी। एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार कहते है कि मंत्रालय के निर्देश के आलोेेेक में ईसी की पिछली बैठक में स्टेट्यूट्स एवं आर्डिनेंस में संशोधन के लिए एक कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी को अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई तक देनी है।

इसका मकसद यूजीसी अधिनियम 2010 को लागू करना है। अधिनियम के क्लाज 7.3.0 (वीसी की योग्यता) एवं 7.0.0 (पीवीसी की योग्यता) को इस कमेटी के अधिकार से बाहर रखा गया है, क्योंकि इससे संबंधित मसला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मंत्रालय के नए खत को ईसी सदस्यों के समक्ष नहीं रखे जाने के संबंध में उन्होंने अनभिज्ञता जताई। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed