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कोरोना से पस्त ताला इंडस्ट्री मांग रही 'ऑक्सीजन'

Wed, 19 May 2021 01:22 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 01:22 AM IST
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lock industry who destroy from corona want "oxygen"
आशीष निगम
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को थामने के लिए विदेशों के साथ देश के कई राज्यों में लॉकडाउन/कोरोना कर्फ्यू जारी है। छोटे बड़े बाजार बंद है। रियल स्टेट का काम सुस्त है। ऐसे में ताला और हार्डवेयर की वैश्विक और स्वदेशी मांग सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इधर, कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे मांग कम होने के बाद भी ताला उत्पादन बहुत महंगा हो रहा है।
बड़े-बड़े ब्रांड इस वक्त भंडारण करने से बच रहे हैं क्योंकि इतना महंगा ताला बाद में कहां और कब बिकेगा..? इसकी गांरटी नहीं है। उद्यमियों की मानें तो अगर जल्द ही कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं तो कई कारखानों में ताला लग जाएगा। कोरोना संक्रमण को रोकने के साथ छोटे कुटीर उद्योगों को भी बचाना उतना ही जरूरी है, अन्यथा लोग बेरोजगारी में भुखमरी से मर जाएंगे। ऐसे में कारखानों को तत्काल आक्सीजन चाहिए।
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धातु मई 2020 मई 2021
पीतल 270 400-500
जस्ता 150 205
कॉपर 500 800
लोहा एसएस 43 83
एल्युमीनियम 100 135
कोरोना का दूसरी लहर का संक्रमण अब नीचे की ओर आ रहा है। सरकार को अब ऑक्सीजन मांग रहे ताला उद्योग की ओर ध्यान देना चाहिए ताकि इनको समय से बचाया जा सके अन्यथा बहुत देर हो जाएगी। गुजरे एक साल में कच्चे माल का रेट दोगुना हो चुका है। उसकी तुलना में ताला महंगा नहीं हो सकता है क्योंकि बाजार में लाकडाउन के कारण मांग नहीं है। ऐसे में सरकार को इस ओर ध्यान देकर कच्चे माल की कीमतों को कम करने पर गंभीरता से ध्यान होगा। नहीं तो वैश्विक स्तर पर मुकाबला नहीं हो पाएगा। इससे देश के सैकड़ों उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
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- विजय बजाज, बजाज मोरिस लॉक्स।
कच्चा माल इतना महंगा हो चुका है कि उसके अनुसार ताले की कीमतें नहीं बढ़ सकती है। इसलिए ज्यादा माल बना कर रखना ठीक नहीं है। इसलिए ये उद्योग जबरदस्त संकट में आ चुका है। अगर जल्द कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं तो कई कारखाने बंद हो जाएंगे। लगभग सवा साल से ताला उद्योग लगातार इन मुश्किलों से जूझ रहा है। अब और ज्यादा दिन तक इसको बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को जल्द ही कुछ सोचना चाहिए। ये उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देते हैं। अगर ये बंद हुए तो बेेरोजगारी विस्फोटक रूप धारण कर सकती है।
-मोहम्मद अली, डायरेक्टर लिंक लॉक्स प्राइवेट लिमिटेड।
कच्चा माल बहुत महंगा हो गया है। उससे बनने वाले ताले का दाम वही है। इसलिए नुकसान लगातार हो रहा है। अभी आगे का कुछ पता नहीं है। कारोबारी कितना नुकसान उठा सकते हैं। कितना माल बना कर स्टॉक कर सकते हैं। सबकी अपनी अपनी क्षमताएं हैं। फुटकर दुकानदार चाहता है कि वह जब जितना माल मंगवाए भेज दिया जाए। उधारी भी मिल जाए। कई कारखानों के काम पर इन परिस्थितियों का विपरीत असर पड़ा है। सरकार ने अब इस कुटीर उद्योग पर ध्यान नहीं दिया तो आगे बहुत मुश्किल हो जाएगी। उम्मीद है कि दीपावली तक कुछ राहत मिल सके।

- राजीव अग्रवाल, प्लस प्वाइंट।
अलग अलग बैठकों में अधिकारियों ने उद्योगों की वर्तमान समस्याओं पर सुझाव मांगे हैं। हमने सुझाव दिए हैं, लेकिन कच्चे माल की कीमतें स्थिर रख पाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि ये वैश्विक स्तर पर तय होता है। ऐसे में ताला उद्योग को बचा पाना आसान नहीं होगा। इस मुश्किल वक्त को गुजारना आसान नहीं होगा। इंडस्ट्रीज के लिए जल्द धनराशि की नगद राहत नहीं मिली तो हालात और खराब हो जाएंगे। कई कारखाने बंद होने के कगार पर आ गए हैं। स्टॉक रखने की जगह और माल बनवाने में होने वाले खर्च से अब लोग पीछे हट रहे हैं। आने वाला साल चुनौतियों भरा है।
- अंकित गोयल, पार्टनर एलाइड इंडिया।
सरकारी राहत का आंकड़ा-
ताला एवं हार्डवेयर के छोटे-बड़े 6500 कारखाने
लगभग डेढ लाख कर्मचारी इनमें कार्यरत हैं
पांच हजार करोड़ का सालाना टर्नओवर अनुमानित
लगभग 25 करोड़ रुपये ओडीओपी में लोन में मिले
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना में 67 यूनिटों को 10 करोड़ का लोन
मुख्यमंत्री रोजगार योजना 72 यूनिटों को 6 करोड़ का लोन
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