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‘केपी’ के मुकाबले में एसपी को दम देंगे ‘एसपी’?

आशीष निगम Updated Thu, 23 Jun 2016 01:58 AM IST
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बसपा से बगावत कर सनसनी मचाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी सुप्रीमो मायावती पर टिकट बेचने सहित कई आरोप लगाए हैं। जवाब में मायावती ने स्वामी प्रसाद पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का  आरोप लगाया। इसके बाद ही शहर के राजनीतिक हलकों में भ्‍ाी सरगर्मी बढ़ गई।  मौर्य के सपा के खेमे में जाने की अटकलों से ये चर्चा भी होने लगी है कि कहीं सपा, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य (केपी) की टक्कर में बड़े मौर्य नेता स्वामी प्रसाद (एसपी) को ला रही है।
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अलीगढ़ मंडल से स्वामी प्रसाद मौर्य का सियासी रिश््ता रहा है। उनकी बेटी डा. संघमित्रा गौतम एटा की अलीगंज सीट से 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ी थीं और हार गईं। इसके बाद वह 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह के खिलाफ लड़ीं और फिर हार गईं।  मौर्य बसपा की कई सभाओं में अलीगढ़ आए।
स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा में नेता प्रति पक्ष के रूप में बहुत अच्छे वक्ता रहे। अगर प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में स्वामी प्रसाद मौर्य सपा में शामिल होते हैं तो निश्चित रूप से पार्टी को फायदा होगा। मैं ये भी कहना चाहूंगा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को उतने लोग नहीं जानते जितने स्वामी प्रसाद मौर्य को जानते हैं। बसपा में टिकटों की खरीददारी और परिवारवाद कोई नई बात नहीं है। वहां के अधिकांश कार्यकर्ता इसीलिए पार्टी छोड़ कर सपा में शामिल हो रहे हैं।
-जफर आलम, सपा शहर विधायक।
कथित गरीबों की पार्टी अरबपतियों की पार्टी बन गई है। धड़ल्ले से करोड़ों रुपये में टिकट का लेनदेन होता है। पूरे प्रदेश में दलितों की मसीहा बनने वाली बसपा हकीकत में केवल अमीरों को हो जगह देती है। इसमें एससी या एसटी का कोई भला नहीं है। ब्लाक प्रमुख से लेकर जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, एमएलसी और सांसद के चुनाव तक सब टिकट बेचे जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने बिल्कुल सही कहा है।
-ठा. दलवीर सिंह, बरौली विधायक एवं रालोद विधान मंडल दल के नेता।
बसपा में ऐसे अनेक उदाहरण है जिसमें परिवारवाद को बढ़ावा देने की बात सामने आई है। पूरे प्रदेश की जनता ये सब जानती है। ये कोई नई बात नहीं है। बसपा में पैसे लेकर टिकट देने के आरोप भी नये नहीं है। ये भी कई सालों से चल रहा है। वेस्टर्न यूपी में पार्टी जिन दलितों के नाम पर राजनीति कर रही है बसपा में उन्हीं दलितों को कभी सम्मान नहीं मिला है।   
-विवेक बंसल, कांग्रेस प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक।
बहन मायावती ने कहा है कि वह शुरुआत से ही परिवारवाद के खिलाफ हैं। इसलिए स्वामी प्रसाद मौर्य को हटाना चाहती थी लेकिन इससे पहले वह खुद ही पार्टी छोड़ गये। अलीगढ़ में पूर्व कबीना मंत्री ठा.जयवीर सिंह के परिवार से भी एक चुनाव में एक ही व्यक्ति खड़ा हुआ है। मसलन अगर वो खुद चुनाव लड़े हैं तो उनकी पत्नी नहीं लड़ी। इसलिए बसपा का संदेश साफ है। अलीगढ़ और हाथरस में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जब एक ही परिवार के दो सदस्यों को एक ही चुनाव में लड़ाया गया हो। हां, जहां पर उम्मीदवार बेहतर नहीं हैं वहां पर जरूर ऐसा हुआ है कि एक ही परिवार के दो लोग चुनाव लड़े हों।
-अरविंद आदित्य, बसपा जिलाध्यक्ष।
-बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर बयान जारी कर दिया है। जिससे अन्य किसी बसपा नेता को बयान देने का कोई औचित्य नहीं हैं। हम सभी बसपाई अपनी नेता के बयान का समर्थन करते हैं।
-रामवीर उपाध्याय, पूर्व ऊर्जामंत्री व सिकंदराराऊ विधायक।
ये बसपा का अंदरुनी मामला है। पार्टी खुद ही इसमें कुछ स्पष्ट कर सकती है।  
-राजवीर सिंह राजू। सांसद एटा।
ये बसपा का अपना मामला है। भाजपा में किसी के आने का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करता हैद्घ
-सतीश गौतम, सांसद अलीगढ़।
अलीगढ़ मंडल में बसपा का परिवारवाद...?
1-ठा. जयवीर सिंह घराना
वर्ष 2002-07 में बरौली से पहली बार विधायक और दूसरी बार वर्ष 2007 से 2012 तक विधायक रहे। इसी कार्यकाल में मायावती सरकार में आरईएस मंत्री रहे ठा. जयवीर सिंह। वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में ठा.जयवीर सिंह ने अपनी पत्नी राजकुमारी चौहान को चुनाव लड़ाया और वह बसपा की सांसद बनीं। इसके बाद साल 2014 में जयवीर सिंह ने अपने बेटे नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के वाइस चासंलर अरविंद सिंह को लोकसभा का चुनाव लड़ाया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अरविंद सिंह देश के सबसे युवा लोकसभा प्रत्याशी रहे हैं। वर्ष 2016 के जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में ठा.जयवीर सिंह के भतीजे उपेंद्र सिंह नीटू जीते और अध्यक्ष बने।
2-रामवीर उपाध्याय घराना
हाथरस से तीन बार विधायक रहे रामवीर उपाध्याय चौथी बार वर्ष 2012 से सिकंदराराऊ से विधायक हैं। रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय वर्ष 2009-14 के दौरान फतेहपुर सीकरी से सांसद रहीं। इससे पहले सीमा उपाध्याय वर्ष 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष हाथरस रही हैं। रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय इगलास से विधायक रहे और इसके बाद वर्ष 2010 से 2016 तक अलीगढ़ स्थानीय निकाय सीट से एमएलसी रहे। रामवीर के भाई विनोद उपाध्याय वर्ष 2016 के चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष बने। अब रामवीर उपाध्याय, उनके भाई मुकुल और कुछ अन्य लोगों के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है।
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