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हौसले की वर्षा: दौड़ने से पहले आया दादा के निधन का फोन, आंसुओं को थाम खुद को संभाल दौड़ी, जीती
Thu, 15 Oct 2026 01:30 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 15 Oct 2026 01:30 PM IST
सार
यह उपलब्धि वर्षा के लिए सामान्य खेल जीत से बढ़कर थी। जिस दिन दादा के निधन की खबर मिली, उसी दिन उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पदक जीता। दुख के बीच हासिल की गई इस सफलता को उन्होंने दादा नवाब सिंह की यादों को समर्पित किया।
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दादा के निधन का फोन, साथियों ने संभाला, दौंड़ी और जीती
- फोटो : संवाद
विस्तार
दादा के निधन की खबर ने वर्षा को भीतर तक झकझोर दिया। आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे और ट्रैक पर उतरने का वक्त करीब था। ऐसे में साथियों ने ढांढस बंधाया तो उन्होंने खुद को संभाला और दौड़ने का फैसला किया। अंडर-14 बालिका वर्ग की 100 मीटर दौड़ में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक जीता। वर्षा ने अपनी इस उपलब्धि को दिवंगत दादा नवाब सिंह को समर्पित किया।
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बुधवार को डीएवी इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित 19वें मंडलीय युवा समारोह में कासगंज के अमांपुर की वर्षा 100 मीटर दौड़ की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान एक साथी खिलाड़ी के मोबाइल पर फोन आया और उन्हें दादा के निधन की सूचना मिली। खबर सुनते ही वह फफककर रो पड़ीं। प्रतियोगिता में उतरने से ठीक पहले मिली इस सूचना ने उन्हें भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। दौड़ की तैयारी के बीच अब उनके सामने खुद को संभालने की चुनौती थी।
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साथियों ने संभाला, फिर ट्रैक पर बढ़े कदम
वर्षा को रोता देखकर साथी खिलाड़ी उनके पास पहुंचे। उन्होंने ढांढस बंधाया और हिम्मत रखने के लिए कहा। साथियों के सहारे वर्षा ने खुद को संभाला और प्रतियोगिता में उतरने का फैसला किया। दौड़ शुरू हुई तो उन्होंने पूरी कोशिश के साथ अपने कदम बढ़ाए और निर्धारित दूरी पूरी की। परिणाम आया तो उनके हिस्से कांस्य पदक आया।
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दादा की यादों को समर्पित किया पदक
यह उपलब्धि वर्षा के लिए सामान्य खेल जीत से बढ़कर थी। जिस दिन दादा के निधन की खबर मिली, उसी दिन उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर पदक जीता। दुख के बीच हासिल की गई इस सफलता को उन्होंने दादा नवाब सिंह की यादों को समर्पित किया।