Pathology Labs: अलीगढ़ में हैं 500 से ज्यादा पैथोलॉजी लैब, पंजीकृत हैं 25 से 30
अलीगढ़ शहर के चंदनियां, एटा चुंगी, नगला तिकोना, शमशाद मार्केट, मेडिकल रोड, नगला पटवारी, क्वार्सी बाईपास, कमालपुर, भुजपुरा, नौरंगाबाद, हरदुआगंज, अतरौली, गभाना, छर्रा, बिजौली और जीटी रोड क्षेत्रों में अवैध लैब संचालित हो रही हैं।
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पैथोलॉजी की रिपोर्ट किसी भी मरीज के उपचार की सही दिशा तय करती है, लेकिन अलीगढ़ जिले में अपंजीकृत लैब की संख्या 500 से ऊपर तक पहुंच गई है। इनसे मिलने वाली जांच रिपोर्ट कितनी भरोसेमंद होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में वर्तमान में करीब 25 से 30 पंजीकृत पैथोलॉजी लैब हैं, शेष अंपजीकृत हैं।
नियमानुसार पैथोलॉजी लैब खोलने के लिए एमडी पैथोलाजिस्ट के साथ विभागीय अनुमति जरूरी है। इसके लिए एक कमेटी जांच कर पूरी रिपोर्ट लगाती है। जिसके बाद पंजीकरण नंबर जारी होता है। इसके बाद लैब को संचालित कर सकते हैं। जिले में करीब 30 से 35 एमडी पैथोलाजिस्ट है। शहर के चंदनियां, एटा चुंगी, नगला तिकोना, शमशाद मार्केट, मेडिकल रोड, नगला पटवारी, क्वार्सी बाईपास, कमालपुर, भुजपुरा, नौरंगाबाद, हरदुआगंज, अतरौली, गभाना, छर्रा, बिजौली और जीटी रोड क्षेत्रों में अवैध लैब संचालित हो रही हैं।
जिले में पंजीकृत लैब की संख्या 25 से 30 होगी। अवैध की संख्या 500 से ऊपर होगी। स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे फर्जी लैब संचालित हो रहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में तो एक से दो लैब ही पंजीकृत होगी, मगर संचालित लैब की संख्या कई गुना है।-उमाशंकर वार्ष्णेय, संरक्षक अलीगढ़ पैथोलॉजी एसोसिएशन।
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पूरे जिले में पैथोलॉजी लैबों के पंजीकरण की जांच कराई जाएगी। जहां भी अवैध लैब मिलेंगी, उन्हें सील करने की कार्रवाई होगी। बिना लाइसेंस के कोई भी लैब संचालित नहीं होगी।-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ अलीगढ़।
जिले में पंजीकृत लैब की संख्या
वर्ष- पंजीकृत लैब
2021-22 में 60
2022-23 में 43
2023-24 में 42
2024-25 में 30
2025-26 में 25 से 30
पांच साल में आधी रह गईं पंजीकृत लैब
अलीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के ब्योरे पर गौर करें तो पांच साल में पंजीकृत लैब की संख्या बहुत कम रह गई है। विभाग की सख्ती और नवीनीकरण में देरी के चलते कई कई वैध लैब भी बंद हो गईं हैं।
पैथोलॉजी लैब के तय मानक
एमडी पैथोलॉजिस्ट, योग्य स्टॉफ डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नॉलॉजी)। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र। अग्निशमन विभाग का प्रमाण पत्र। नगर निगम की स्वीकृति का प्रमाण पत्र। जनरेटर, यूपीएस, कंप्यूटर, शौचालय आदि की सुविधा।