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शहर में कितने पालतू श्वान...नगर निगम अंजान

Mon, 25 Jul 2022 01:27 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Jul 2022 01:27 AM IST
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How many pet dogs in the city ... the municipal corporation does not know
इकराम वारिस
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पिछले दिनों लखनऊ में पिटबुल नस्ल के पालतू कुत्ते ने मालकिन सेवानिवृत्त शिक्षिका सुशीला त्रिपाठी (80) पर हमला बोल दिया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद पालतू कुत्तों को लेकर पालकों व पड़ोसी सतर्कता बरत रहे हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि अलीगढ़ नगर निगम के पास इन पालतू कुत्तों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
नगर निगम ने वर्ष 2014-15 में पालतू कुत्तों के पंजीकरण के लिए श्वान पालकों को पत्र भेजा था, लेकिन एक भी पंजीकरण नहीं हो सका। हालांकि, पशुपालन विभाग में हुई पशु गणना में इन पालतू कुत्तों का रिकॉर्ड उपलब्ध है। मंडल में अलग-अलग नस्ल के 18481 पालतू कुत्ते हैं। अलीगढ़ जिले में 11114 पालतू कुत्ते हैं। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों ने अपने घरों पर कुत्ता पाल रखा है, उन्हें नगर निगम से लाइसेंस लेना जरूरी है। अगर वह लाइसेंस नहीं लेते हैं, तो उसे अवैध माना जाएगा। इसे नगर निगम जब्त भी कर सकता है। पालतू कुत्ते का लाइसेंस न होने पर नगर निगम पांच हजार रुपये का जुर्माना ले लेगा।
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ये श्वान हैं पसंदीदा
श्वान पालकों को विदेशी नस्ल के श्वान ज्यादा पसंद आते हैं। इनमें लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बुलडॉग, टॉय ब्रीड (माल्टीज नस्ल), बीगल्स, गोल्डन रिट्रीवर, जैक रसेल टेरियर, पग, न्यू फाउंडलैंड, पूडल प्रजाति के कुत्ते शामिल हैं।
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विदेशी नस्ल के कुत्ते
- पिटबुल, रॉट वेल्लर, जर्मन शेफर्ड, डाबरमैन पिन्स्चर, बुलमास्टिफ, हस्की, मालाम्यूट, वोल्फ हाइब्रिड, बॉक्सर, ग्रेट डैन आदि। ये सभी कुत्ते बेहद आक्रामक माने जाते हैं।
मंडल में पालतू कुत्तों की स्थिति
अलीगढ़ : 11114
हाथरस : 1742
एटा : 1486
कासगंज : 4139
कुत्ता के काटने पर करें प्राथमिक उपचार
वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ. विराम वार्ष्णेय ने बताया कि कुत्ता के काटने पर व्यक्ति को रैबीज हो सकता है। इसलिए समय पर पीड़ित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो वह गंभीर हालत में पहुंचने से बच सकता है। अगर उपचार मिलने में लापरवाही हुई, तो संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
ये करें उपचार
वरिष्ठ पशु शल्य चिकित्सक डॉ. विराम वार्ष्णेय ने बताया कि अगर कुत्ता व्यक्ति को काट ले, तो उसे फौरन घाव को साबुन और बहते पानी से धोना चाहिए। कुत्ते के काटने से चमड़ी निकल गई है तो संक्रमण हो सकता है। घाव ज्यादा होने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। खून को बहने से रोकने के लिए घाव के पास कॉटन या साफ कपड़ा लगाएं। अगर लालिमा, सूजन, दर्द और बुखार आ जाए तो सतर्क होना चाहिए।
पशु गणना के अनुसार मंडल में अलग-अलग नस्ल के 18481 पालतू कुत्ते हैं। श्वान पालकों से समय पर टीकाकरण कराने व उनकी देखरेख करने की अपील की जाती है। अधिकांश लोग रुचि नहीं लेते हैं।
- डॉ. वीके सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
नगर निगम के पास पालतू कुत्तों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। कुत्तों के पंजीकरण के लिए श्वान पालकों से अनुरोध किया गया था, लेकिन एक भी पंजीकरण नहीं हो सका। नगर निगम ने पंजीकरण न कराने वाले श्वान पालक पर जुर्माना लगा सकता है।

- एहसान रब, पीआरओ, नगर निगम।
-कुत्ते पालने के नगर निगम स्तर से लाइसेंस जारी करने का नियम है। उसके पालने का स्थान, शौच कराने का स्थान, टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। पड़ोसी की शिकायत पर कुत्ते को कहीं बाहर करने का नियम नहीं हैं। मगर उसका टीकाकरण जरूरी है। हां, अगर किसी को कुत्ता काटता है तो लापरवाही पर कुत्ता स्वामी पर और मौत पर भी कुत्ता स्वामी पर मुकदमा दर्ज हो सकता है।-नीरज चौहान, एडवोकेट
-ये भी हैं खास तथ्य-
-किसी प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए लगाना होता है नगर निगम का लाइसेंस
-2013-14 में इसी तरह की प्रतियोगिता के लिए बने थे नगर निगम से 75 लाइसेंस
ये कहता है कानून
-पालतू कुत्ते के काटने से मौत पर मालिक पर दर्ज हो सकता है धारा 429 के तहत मुकदमा। पांच साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान।
-पालतू कुत्ते के काटने से जख्मी होने पर मालिक पर दर्ज होने पर धारा 289 के तहत मुकदमा। छह माह सजा व एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान।
--ये भी हैं खास नियम--
-कुत्ते से किसी पड़ोसी को परेशानी तो वह पशु विभाग व नगर निगम में कर सकता है शिकायत।
-पशु विभाग व नगर निगम स्तर से कुत्ते को स्टेरलाइजेशन (जीवाणुनाशन) कराया जाना जरूरी है।
-लाइसेंस के बाद भी नगर निगम से जारी बिना टोकन, कॉलर या मार्क के कुत्ता मिला तो जुर्माना।
-हर साल नवीनीकरण होगा, किसी को काटने पर कुत्ता स्वामी को पीड़ित का इलाज भी कराना होगा।
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