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यहां हड़ताल है कहीं और जाकर इलाज कराएं
Wed, 24 Jul 2019 01:47 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, मो. तौहिद आलम, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, मो. तौहिद आलम, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Wed, 24 Jul 2019 01:47 AM IST
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जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद इमरजेंसी से लौटते मरीज।
- फोटो : Dig Vishal
सातवें वेतनमान की मांग को लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। मंगलवार को भी मरीज भटकते दिखाई दिए।
मंगलवार दोपहर के पौने तीन बजे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में सामान्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम है। विभिन्न जगहों से रेफर होकर आए मरीज अस्पताल के बरामदे में लेटे हैं। कोई एंबुलेंस में अस्पताल के गेट पर उल्टी गिनती गिन रहा है तो कई बाहर बेड पर पड़े-पड़े कराह रहे हैं।
परिजन अस्पताल गेट पर कर्मियों की खुशामद कर रहे हैं। साहब! मरीज मर जाएगा, बड़ी दूर से आए हैं, भर्ती कर लो। लेकिन, अस्पताल कर्मी ‘...प्राण जाए पर वचन न जाई’ की कहावत चरितार्थ करते दिखाई दे रहे हैं। अस्पतालकर्मी साफ.-साफ शब्दों में कह रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। किसी भी हाल में नए मरीज की भर्ती नहीं ली जाएगी। यह मेडिकल कॉलेज एएमयू के छात्र व कर्मियों के लिए है। बाहरी मरीजों से हमें कोई लेना-देना नहीं है।
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केस-1 समय दोपहर 02:50 बजे
25 वर्षीय यूनिस आलम अस्पताल परिसर में बेड पर पड़े-पड़े कराह रहा है। दीवार की चिनाई करने के दौरान गिरने से उसका सिर फट गया है। खुर्जा से डॉक्टर ने उसे रेफर किया है। परिजन कभी अंदर तो कभी बाहर चक्कर लगा रहे है। लेकिन, अंदर घुसने से पहले गेट पर ही उसे रोक दिया जाता है। कहा जाता है यहां डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वह मर भी जाए तो उसे भर्ती नहीं किया जाएगा। परिजन अपनी ओर से उसे भर्ती कराने के लिए तमाम मिन्नतें कर रहे हैं।
केस-2 समय दोपहर 02:55 बजे
60 वर्षीय रमजानी मियां पीलिया रोग से ग्रसित हैं। मुरादाबाद से डॉक्टर ने रेफर कर किया है। परिजन बड़ी आस लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। गेट पर पहुंच कर जैसे ही एंबुलेंस का दरवाजा खोला अस्पताल कर्मी दौड़ कर आए और मरीज को बाहर निकालने से मना कर दिया। बोले- डॉक्टर हड़ताल पर हैं। कहीं और ले जाकर इलाज कराएं। यहां फिलहाल कुछ नहीं होने वाला। लाचार-बेबस परिजन एक दूसरे का मुंह ताक रहे हैं। काफी मिन्नत के बाद मन ही मन अस्पताल प्रशासन को कोसते हुए मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल के लिए निकल गए।
केस-3 समय दोपहर 03:00 बजे
कासगंज से एक मरीज को लेकर परिजन जेएन मेडिकल पहुंचे। जैसी ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर मरीज को निकालना चाहा उसे वहीं रोक दिया गया। परिजनों ने काफी मिन्नतें कीं। अस्पताल कर्मी नहीं माने। मरीज की स्थिति बेहद नाजुक है। वह जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहा है। काफी विनती करने के बाद भी कर्मी नहीं माने। परिजन बिना समय गंवाए उसे लेकर दूसरे अस्पताल चले गए।
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मंगलवार दोपहर के पौने तीन बजे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में सामान्य दिनों की अपेक्षा भीड़ कम है। विभिन्न जगहों से रेफर होकर आए मरीज अस्पताल के बरामदे में लेटे हैं। कोई एंबुलेंस में अस्पताल के गेट पर उल्टी गिनती गिन रहा है तो कई बाहर बेड पर पड़े-पड़े कराह रहे हैं।
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परिजन अस्पताल गेट पर कर्मियों की खुशामद कर रहे हैं। साहब! मरीज मर जाएगा, बड़ी दूर से आए हैं, भर्ती कर लो। लेकिन, अस्पताल कर्मी ‘...प्राण जाए पर वचन न जाई’ की कहावत चरितार्थ करते दिखाई दे रहे हैं। अस्पतालकर्मी साफ.-साफ शब्दों में कह रहे हैं कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। किसी भी हाल में नए मरीज की भर्ती नहीं ली जाएगी। यह मेडिकल कॉलेज एएमयू के छात्र व कर्मियों के लिए है। बाहरी मरीजों से हमें कोई लेना-देना नहीं है।
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केस-1 समय दोपहर 02:50 बजे
25 वर्षीय यूनिस आलम अस्पताल परिसर में बेड पर पड़े-पड़े कराह रहा है। दीवार की चिनाई करने के दौरान गिरने से उसका सिर फट गया है। खुर्जा से डॉक्टर ने उसे रेफर किया है। परिजन कभी अंदर तो कभी बाहर चक्कर लगा रहे है। लेकिन, अंदर घुसने से पहले गेट पर ही उसे रोक दिया जाता है। कहा जाता है यहां डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वह मर भी जाए तो उसे भर्ती नहीं किया जाएगा। परिजन अपनी ओर से उसे भर्ती कराने के लिए तमाम मिन्नतें कर रहे हैं।
केस-2 समय दोपहर 02:55 बजे
60 वर्षीय रमजानी मियां पीलिया रोग से ग्रसित हैं। मुरादाबाद से डॉक्टर ने रेफर कर किया है। परिजन बड़ी आस लेकर जेएन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। गेट पर पहुंच कर जैसे ही एंबुलेंस का दरवाजा खोला अस्पताल कर्मी दौड़ कर आए और मरीज को बाहर निकालने से मना कर दिया। बोले- डॉक्टर हड़ताल पर हैं। कहीं और ले जाकर इलाज कराएं। यहां फिलहाल कुछ नहीं होने वाला। लाचार-बेबस परिजन एक दूसरे का मुंह ताक रहे हैं। काफी मिन्नत के बाद मन ही मन अस्पताल प्रशासन को कोसते हुए मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल के लिए निकल गए।
केस-3 समय दोपहर 03:00 बजे
कासगंज से एक मरीज को लेकर परिजन जेएन मेडिकल पहुंचे। जैसी ही गाड़ी का दरवाजा खोलकर मरीज को निकालना चाहा उसे वहीं रोक दिया गया। परिजनों ने काफी मिन्नतें कीं। अस्पताल कर्मी नहीं माने। मरीज की स्थिति बेहद नाजुक है। वह जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहा है। काफी विनती करने के बाद भी कर्मी नहीं माने। परिजन बिना समय गंवाए उसे लेकर दूसरे अस्पताल चले गए।