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नई तकनीक से हार्ट सर्जरी: अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज का उत्तर भारत में रिकॉर्ड

Tue, 07 Apr 2026 03:07 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 03:07 AM IST
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Heart surgery using new technology: Aligarh's JN Medical College sets record in North India
जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में नई तकनीक से हार्ट सर्जरी करने वाली टीम। स - फोटो : samvad
इकराम वारिस
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अलीगढ़। पारंपरिक तरीके को छोड़ नई तकनीक से हार्ट सर्जरी करने में अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज ने उत्तर भारत में नया मुकाम हासिल किया है। यहां के जेएन मेडिकल कॉलेज ने मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (एमआईसीएस) तकनीक से तीन साल में 100 मरीजों की निशुल्क हार्ट सर्जरी की है जो उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में सर्वाधिक है।

कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आजम हसीन और उनकी टीम ने पांच से 65 वर्ष आयु वर्ग के मरीजों का सफल ऑपरेशन किया। 100वें मरीज के रूप में 40 वर्षीय शादाब खान की सर्जरी बीते 24 मार्च को की गई। खास बात यह रही कि यह ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, ण्मआईसीएस तकनीक में मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से आराम मिलता है। निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब आठ से 10 लाख रुपये का खर्च आता है।
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न्यूनतम चीरे से बड़ी सर्जरी
डॉक्टरों के अनुसार, इस तकनीक में सीने पर बड़ा चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। पसलियों के बीच एक-एक इंच के दो या तीन छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इनमें से एक चीरे से कैमरा (दूरबीन) डाला जाता है, जो सर्जरी के दौरान अंदर का हिस्सा स्पष्ट दिखाता है। परंपरागत ओपन हार्ट सर्जरी में जहां सीने की हड्डी काटनी पड़ती है, वहीं इस तकनीक में बिना हड्डी काटे ही सर्जरी संभव है। इससे मरीज को कम तकलीफ होती है और रिकवरी तेजी से होती है।
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- नई तकनीक से 100 हार्ट सर्जरी कर जेएन मेडिकल कॉलेज ने उत्तर भारत में रिकॉर्ड बनाया है। सर्जरी के बाद मरीज 3-4 दिन में डिस्चार्ज हो जाता है और 15 दिन में सामान्य काम शुरू कर देता है। प्रो. मोहम्मद आजम हसीन, विभागाध्यक्ष, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी
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