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अलीगढ़ : विरोधियों को फंसाने की साजिश में गई थी खुद की जान, दो गिरफ्तार
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गांव सूरजा कारौली में हुई 36 वर्षीय युवक सुनीत उर्फ अमर सिंह की हत्या किसी विरोधी ने नहीं की थी। बल्कि खुद सुनीत द्वारा रची गई साजिश में उसके साथियों द्वारा गलत फायर किए जाने से उसकी जान चली गई थी। जब उसकी मौत हो गई तो उसी साजिश के तहत विरोधियों को नामजद कर फंसा दिया गया। मगर पुलिस विवेचना में सच सामने आ गया है और सुनीत को गोली मारने में शामिल उसी के पक्ष के दो लोग बृहस्पतिवार को जेल भेज दिए गए। खास बात है कि डीआईजी के निर्देश पर इस कांड की विवेचना कासगंज जनपद के इंस्पेक्टर सोरों द्वारा की जा रही है। उन्हीं की टीम ने रात में दो लोगों की गिरफ्तारी की है।
ये है फ्लैशबैक
वाकया 16 अगस्त 2021 की देर शाम का है। गांव सूरजा कारौली का सुनीत उर्फ अमर सिंह सीने पर गोली लगने से जख्मी हुआ और जिला अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित किया गया। इस घटना में अमर सिंह के पिता जगदीश की ओर से गांव के रोबिन उर्फ बंकट, रमन, हंसराज, अटल सिंह, सतवीर सिंह को नामजद कर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि उनका बेटा घर की छत पर जाने के लिए सीढ़ी चढ़ रहा था। तभी नामजदों ने आकर फायरिंग कर दी और उसकी मौत हो गई। इस आधार पर इगलास पुलिस ने पोस्टमार्टम आदि के बाद 20 अगस्त को नामजद रमन सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
नामजदों की दलील और साक्ष्यों से आया नया मोड़
जब पुलिस सभी नामजदों के घर पहुंची और गिरफ्तारी का क्रम शुरू हुआ तो उनके स्तर से पैरोकारी शुरू की गई और खुद को निर्दोष बताते हुए साक्ष्य पेश किए गए। सभी की मोबाइल लोकेशन से लेकर अन्य तरह के साक्ष्य उनके पक्ष में आए। कहा कि हम नामजदों में से किसी ने ये घटना नहीं की, हमें फंसाया गया है। पुलिस जांच में ये तथ्य सामने आने लगे कि इन नामजदों में से कोई भी नामजद घटना के समय मौके पर नहीं था। इसी आधार पर इगलास पुलिस ने जेल भेजे रमन सिंह को निर्दोष पाते हुए सीआरपीसी के प्रावधान के तहत जेल से रिहा कराया।
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रंजिश में साजिश रचना हुआ उजागर
इगलास पुलिस की जांच में सामने आया कि जुलाई में रमन सिंह व अमर सिंह परिवार में कटिया डालने को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद में रमन सिंह परिवार के घर में घुसकर फायरिंग कर एक किशोरी को जख्मी किया गया था। जिसमें अमर सिंह आदि नामजद थे और फरार चल रहे थे। तमाम प्रयास के बाद भी वे समझौता नहीं कर रहे थे। इस पर खुद अमर सिंह ने अपने साथियों संग मिलकर यह साजिश रची कि उसके पेट में गोली मार देना। वह जख्मी हो जाएगा और रमन सिंह पक्ष पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। फिर समझौता आसान हो जाएगा। जब यह तथ्य उजागर हो गया तो अमर सिंह पक्ष खुद के फंसने पर छटपटाया और डीआईजी के सामने पेश होकर इगलास पुलिस पर भरोसा न होने का आरोप लगाकर विवेचना कहीं दूसरी जगह कराने की गुहार की। इस पर विवेचना इगलास से इंस्पेक्टर सोरों कासगंज को दी गई।
सोरों पुलिस भी इगलास पुलिस की जांच से सहमत
इस मामले में विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर सोरों डीके सिसौदिया, सहयोगी उपनिरीक्षक प्रेमपाल सिंह आदि ने साक्ष्यों के आधार पर इगलास पुलिस की जांच को सही पाया है। जांच में उजागर हुआ है कि खुद अमर सिंह ने अपने साथी मुकेश कुमार, मुकेश सिंह, चंद्रपाल व देवू संग मिलकर खुद के पेट पर फायर करवाया था। मगर गलती से गोली थोड़ी ऊपर जा लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस तथ्य के साक्ष्य मिलने पर बुधवार रात सोरों पुलिस टीम ने मुकेश कुमार व चंद्रपाल को गिरफ्तार किया और बृहस्पतिवार को दोनों को जेल भेज दिया। अभी दो आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश लारी है।
- विरोधियों को फंसाने के लिए फर्जी फायरिंग की घटना रची गई थी, जिसमें खुद की जान चली गई। इगलास के बाद अब सोरों पुलिस की जांच में भी यही तथ्य उजागर हुआ है। दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। बाकी की तलाश जारी है।-अशोक कुमार, सीओ इगलास
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ये है फ्लैशबैक
वाकया 16 अगस्त 2021 की देर शाम का है। गांव सूरजा कारौली का सुनीत उर्फ अमर सिंह सीने पर गोली लगने से जख्मी हुआ और जिला अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित किया गया। इस घटना में अमर सिंह के पिता जगदीश की ओर से गांव के रोबिन उर्फ बंकट, रमन, हंसराज, अटल सिंह, सतवीर सिंह को नामजद कर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया कि उनका बेटा घर की छत पर जाने के लिए सीढ़ी चढ़ रहा था। तभी नामजदों ने आकर फायरिंग कर दी और उसकी मौत हो गई। इस आधार पर इगलास पुलिस ने पोस्टमार्टम आदि के बाद 20 अगस्त को नामजद रमन सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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नामजदों की दलील और साक्ष्यों से आया नया मोड़
जब पुलिस सभी नामजदों के घर पहुंची और गिरफ्तारी का क्रम शुरू हुआ तो उनके स्तर से पैरोकारी शुरू की गई और खुद को निर्दोष बताते हुए साक्ष्य पेश किए गए। सभी की मोबाइल लोकेशन से लेकर अन्य तरह के साक्ष्य उनके पक्ष में आए। कहा कि हम नामजदों में से किसी ने ये घटना नहीं की, हमें फंसाया गया है। पुलिस जांच में ये तथ्य सामने आने लगे कि इन नामजदों में से कोई भी नामजद घटना के समय मौके पर नहीं था। इसी आधार पर इगलास पुलिस ने जेल भेजे रमन सिंह को निर्दोष पाते हुए सीआरपीसी के प्रावधान के तहत जेल से रिहा कराया।
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रंजिश में साजिश रचना हुआ उजागर
इगलास पुलिस की जांच में सामने आया कि जुलाई में रमन सिंह व अमर सिंह परिवार में कटिया डालने को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद में रमन सिंह परिवार के घर में घुसकर फायरिंग कर एक किशोरी को जख्मी किया गया था। जिसमें अमर सिंह आदि नामजद थे और फरार चल रहे थे। तमाम प्रयास के बाद भी वे समझौता नहीं कर रहे थे। इस पर खुद अमर सिंह ने अपने साथियों संग मिलकर यह साजिश रची कि उसके पेट में गोली मार देना। वह जख्मी हो जाएगा और रमन सिंह पक्ष पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। फिर समझौता आसान हो जाएगा। जब यह तथ्य उजागर हो गया तो अमर सिंह पक्ष खुद के फंसने पर छटपटाया और डीआईजी के सामने पेश होकर इगलास पुलिस पर भरोसा न होने का आरोप लगाकर विवेचना कहीं दूसरी जगह कराने की गुहार की। इस पर विवेचना इगलास से इंस्पेक्टर सोरों कासगंज को दी गई।
सोरों पुलिस भी इगलास पुलिस की जांच से सहमत
इस मामले में विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर सोरों डीके सिसौदिया, सहयोगी उपनिरीक्षक प्रेमपाल सिंह आदि ने साक्ष्यों के आधार पर इगलास पुलिस की जांच को सही पाया है। जांच में उजागर हुआ है कि खुद अमर सिंह ने अपने साथी मुकेश कुमार, मुकेश सिंह, चंद्रपाल व देवू संग मिलकर खुद के पेट पर फायर करवाया था। मगर गलती से गोली थोड़ी ऊपर जा लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस तथ्य के साक्ष्य मिलने पर बुधवार रात सोरों पुलिस टीम ने मुकेश कुमार व चंद्रपाल को गिरफ्तार किया और बृहस्पतिवार को दोनों को जेल भेज दिया। अभी दो आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश लारी है।
- विरोधियों को फंसाने के लिए फर्जी फायरिंग की घटना रची गई थी, जिसमें खुद की जान चली गई। इगलास के बाद अब सोरों पुलिस की जांच में भी यही तथ्य उजागर हुआ है। दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। बाकी की तलाश जारी है।-अशोक कुमार, सीओ इगलास