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अमीरों को बांट दी गई ग्राम समाज की जमीन
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तहसील कोल की ग्राम पंचायत अलहदादपुर में ग्राम सभा की तीन बीघा भूमि 2019 में गरीबों के बदले अमीरों को आवंटन करने के मामले में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) की कोर्ट से निरस्तीकरण आदेश जारी किया गया है। इस मामले में राजपाल पुत्र तोताराम ने मुकदमा लड़ा था। डीएम कोर्ट से मामले में आवंटन पत्रावली को रद्द करने के साथ ही इस अनियमित आवंटन में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही जमीन को वापस ग्राम सभा के अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा।
उप्र राजस्व संहिता 2006 के प्रावधान के तहत 24 सितंबर 2019 को ग्राम सभा की गाटा संख्या 815 की तीन बीघा भूमि को 56 लोगों में आवास के लिए आवंटित किया था। आवंटियों को गरीब और जरूरतमंद दर्शाया गया था। इस मामले में राजपाल पुत्र तोताराम की ओर से जिला मजिस्ट्रेट के यहां शिकायत की गई थी, शिकायत के आधार पर मामला डीएम कोर्ट में चला गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता राजपाल की ओर से कागजात प्रस्तुत किए, जिनमें बताया गया कि जमीन पाने वालों में प्रतिवादी भूरा ओबीसी से ताल्लुक रखता है।
वह अलीगढ़ शहर में नौकरी करता है। उसके पास गांव में 300 वर्ग गज का मकान है। वहीं, प्रतिवादी मिथलेश पत्नी राकेश के पास कृषि भूमि है। 400 वर्ग में पक्का मकान बना है। प्रतिवादी अंजू पत्नी भोजराज कई वर्षों से दिल्ली में नौकरी कर रही है। अन्य प्रतिवादी भरत सिंह पुत्र खूबीराम गांव से बाहर रहता है।
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राजपाल का आरोप था कि जमीन आवंटन के लिए कोई पात्रता सूची नहीं बनाई गई और न कोई मीटिंग हुई। वादी धोबी समाज से है। पात्र होने के बाद भी उसे आवंटन का लाभ नहीं मिला। इस मामले में वाद पंजीकृत होने पर विपक्ष को कोर्ट ने बुलाया तो सिर्फ भरत सिंह उपस्थित हुए।
इसके आधार जिला शासकीय अधिवक्ता को एक पक्षीय सुनने के बाद जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट से आदेश दिया गया है कि आवंटन पत्रावली को रद्द करने के साथ ही इस अनियमित आवंटन में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया जाए। साथ ही जमीन को वापस ग्राम सभा के अभिलेखों में दर्ज किया जाए। एसडीएम कोल स्तर से अब इस मामले में दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। डीएम चंद्रभूषण सिंह के स्तर से आदेश की पुष्टि की गई।
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उप्र राजस्व संहिता 2006 के प्रावधान के तहत 24 सितंबर 2019 को ग्राम सभा की गाटा संख्या 815 की तीन बीघा भूमि को 56 लोगों में आवास के लिए आवंटित किया था। आवंटियों को गरीब और जरूरतमंद दर्शाया गया था। इस मामले में राजपाल पुत्र तोताराम की ओर से जिला मजिस्ट्रेट के यहां शिकायत की गई थी, शिकायत के आधार पर मामला डीएम कोर्ट में चला गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता राजपाल की ओर से कागजात प्रस्तुत किए, जिनमें बताया गया कि जमीन पाने वालों में प्रतिवादी भूरा ओबीसी से ताल्लुक रखता है।
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वह अलीगढ़ शहर में नौकरी करता है। उसके पास गांव में 300 वर्ग गज का मकान है। वहीं, प्रतिवादी मिथलेश पत्नी राकेश के पास कृषि भूमि है। 400 वर्ग में पक्का मकान बना है। प्रतिवादी अंजू पत्नी भोजराज कई वर्षों से दिल्ली में नौकरी कर रही है। अन्य प्रतिवादी भरत सिंह पुत्र खूबीराम गांव से बाहर रहता है।
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राजपाल का आरोप था कि जमीन आवंटन के लिए कोई पात्रता सूची नहीं बनाई गई और न कोई मीटिंग हुई। वादी धोबी समाज से है। पात्र होने के बाद भी उसे आवंटन का लाभ नहीं मिला। इस मामले में वाद पंजीकृत होने पर विपक्ष को कोर्ट ने बुलाया तो सिर्फ भरत सिंह उपस्थित हुए।
इसके आधार जिला शासकीय अधिवक्ता को एक पक्षीय सुनने के बाद जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट से आदेश दिया गया है कि आवंटन पत्रावली को रद्द करने के साथ ही इस अनियमित आवंटन में शामिल लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया जाए। साथ ही जमीन को वापस ग्राम सभा के अभिलेखों में दर्ज किया जाए। एसडीएम कोल स्तर से अब इस मामले में दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। डीएम चंद्रभूषण सिंह के स्तर से आदेश की पुष्टि की गई।