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बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए किया अगवा... मिली उम्रकैद की सजा
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एडीजे विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी) अशोक कुमार के न्यायालय ने मासूम बच्ची को वेश्यावृत्ति के लिए बेचने के उद्देश्य से अपहरण करने के तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इगलास क्षेत्र के 11 साल पुराने मुकदमे में न्यायालय ने बच्ची की गवाही को महत्वपूर्ण आधार मानते हुए उम्रकैद के साथ-साथ आरोपियों को जुर्माने से भी दंडित किया है। खास बात है कि न्यायालय ने यह बहु प्रतिक्षित फैसला सुनाते हुए बच्ची के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
विशेष अभियोजन अधिकारी सुशील कुमार सिंह के अनुसार, घटना 24 जून 2010 की है। इगलास क्षेत्र के एक गांव के अनुसूचित जाति परिवार की सात वर्षीय बच्ची शाम 6 बजे गायब हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी थाने में 26 जून को दर्ज कराई गई थी। 29 जून को पता चला कि अली शेर, जैना व शब्बीर उसे अगवा कर ले गए हैं। उन्हें गांव के कुछ लोगों ने ले जाते देखा है। पिता की तहरीर पर पुलिस ने अपहरण व एससी-एससी एक्ट का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया। सीओ स्तर से जांच के दौरान बच्ची को कुछ दिन के प्रयास में बरामद किया गया। इस दौरान बच्ची ने अपने बयानों में यह बात बताई कि उसे दावत खिलाने के बहाने ये लोग बुग्गी में बैठाकर अगवा कर ले गए थे और रास्ते में हंसते हुए कह रहे थे कि उससे वेश्यावृत्ति के लिए बेच देंगे। उससे वेश्यावृत्ति और नाचने का काम कराएंगे।
प्रकरण में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान बच्ची की गवाही हुई तो उसने यही बयान न्यायालय के समक्ष भी दर्ज कराए। न्यायालय ने बच्ची के बयानों को आधार मानकर तीनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को दोषी करार दे दिया और शुक्रवार को उम्रकैद व 35-35 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही जुर्माने में से 50 फीसदी राशि बच्ची को देने आदेश दिए हैं।
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आदेश में गरीबी-बेरोजगारी इन घटनाओं की वजह माना
अपने आदेश में न्यायालय ने बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि देश में व्यापक गरीबी व बेरोजगारी के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
इस तरह सुनाई सजा -
- अपहरण की धारा 363 में 7-7 साल सजा व 10-10 हजार जुर्माना।
- वेश्यावृत्ति के लिए ले जाने की धारा 372 में 10-10 साल सजा व 10-10 हजार जुर्माना।
- एससी-एसटी एक्ट में उम्रकैद की सजा व 15-15 हजार रुपये जुर्माना।
कोर्ट की टिप्पणी
‘यह अपहरण वेश्यावृत्ति के लिए बच्ची को बेचे जाने के उद्देश्य से किया गया था, जो कि घृणित वृत्ति का परिचायक है। उनके इस कृत्य से जहां किसी अबोध व मासूम का पूरा बचपन संवरने से पहले बिखर जाता है। वहीं, उसका संपूर्ण जीवन नारकीय हो जाता है। उसका पूरा परिवार सदा के लिए विछोह व मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता है। ऐसे में न्यायालय के अभिमत के अनुसार अभियुक्त सजा के प्रशभन पर किसी उदारता के पात्र नहीं हैं।’
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विशेष अभियोजन अधिकारी सुशील कुमार सिंह के अनुसार, घटना 24 जून 2010 की है। इगलास क्षेत्र के एक गांव के अनुसूचित जाति परिवार की सात वर्षीय बच्ची शाम 6 बजे गायब हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी थाने में 26 जून को दर्ज कराई गई थी। 29 जून को पता चला कि अली शेर, जैना व शब्बीर उसे अगवा कर ले गए हैं। उन्हें गांव के कुछ लोगों ने ले जाते देखा है। पिता की तहरीर पर पुलिस ने अपहरण व एससी-एससी एक्ट का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया। सीओ स्तर से जांच के दौरान बच्ची को कुछ दिन के प्रयास में बरामद किया गया। इस दौरान बच्ची ने अपने बयानों में यह बात बताई कि उसे दावत खिलाने के बहाने ये लोग बुग्गी में बैठाकर अगवा कर ले गए थे और रास्ते में हंसते हुए कह रहे थे कि उससे वेश्यावृत्ति के लिए बेच देंगे। उससे वेश्यावृत्ति और नाचने का काम कराएंगे।
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प्रकरण में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान बच्ची की गवाही हुई तो उसने यही बयान न्यायालय के समक्ष भी दर्ज कराए। न्यायालय ने बच्ची के बयानों को आधार मानकर तीनों आरोपियों को बृहस्पतिवार को दोषी करार दे दिया और शुक्रवार को उम्रकैद व 35-35 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। साथ ही जुर्माने में से 50 फीसदी राशि बच्ची को देने आदेश दिए हैं।
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आदेश में गरीबी-बेरोजगारी इन घटनाओं की वजह माना
अपने आदेश में न्यायालय ने बचपन बचाओ आंदोलन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि देश में व्यापक गरीबी व बेरोजगारी के कारण इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।
इस तरह सुनाई सजा -
- अपहरण की धारा 363 में 7-7 साल सजा व 10-10 हजार जुर्माना।
- वेश्यावृत्ति के लिए ले जाने की धारा 372 में 10-10 साल सजा व 10-10 हजार जुर्माना।
- एससी-एसटी एक्ट में उम्रकैद की सजा व 15-15 हजार रुपये जुर्माना।
कोर्ट की टिप्पणी
‘यह अपहरण वेश्यावृत्ति के लिए बच्ची को बेचे जाने के उद्देश्य से किया गया था, जो कि घृणित वृत्ति का परिचायक है। उनके इस कृत्य से जहां किसी अबोध व मासूम का पूरा बचपन संवरने से पहले बिखर जाता है। वहीं, उसका संपूर्ण जीवन नारकीय हो जाता है। उसका पूरा परिवार सदा के लिए विछोह व मानसिक संत्रास का शिकार हो जाता है। ऐसे में न्यायालय के अभिमत के अनुसार अभियुक्त सजा के प्रशभन पर किसी उदारता के पात्र नहीं हैं।’