{"_id":"57ab893f4f1c1b8e34ee522e","slug":"freedom-of-aligarh-in-kurukshetra-mohan","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वतंत्रता के कुरुक्षेत्र में अलीगढ़ के ‘मोहन’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वतंत्रता के कुरुक्षेत्र में अलीगढ़ के ‘मोहन’
दीपक शर्मा
Updated Thu, 11 Aug 2016 01:42 AM IST
विज्ञापन
स्वतंत्रता के कुरुक्षेत्र में अलीगढ़ के ‘मोहन’
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय आंदोलन के समय अलीगढ़ की जमीन से इंकलाब के स्वर उठ रहे थे। इसी क्रम में हुआ प्रसिद्ध काकोरी कांड की स्मृतियां अलीगढ़ से भी गहरे जुड़ी हैं। राष्ट्रीय आंदोलन के नायक पंडित मोहन लाल गौतम एक ओर जहां काकोरी कांड में गिरफ्तार किए गए, वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी के अहिंसक नेतृत्व में जुड़कर नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई और जेल गए।
5 अगस्त 1902 को अलीगढ़ के वीरपुरा में पैदा हुए मोहनलाल किशोर अवस्था के बाद ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। असहयोग आंदोलन के दौरान शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी क्षेत्र में काम किया, बाद में लाहौर गए और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के संपर्क में रह कर सर्वेंटस ऑफ पीपुल सोसायटी के सदस्य बने। यहीं पर राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के संपर्क में आए।
लाहौर के बाद दूसरा कार्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश रहा। 1937-38 में जब गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अंतरिम सरकार बनी, तो उसमें मोहन लाल देवरिया, गोरखपुर से चुनकर विधायक के रूप में शामिल हुए। आजादी के बाद संविधान सभा में रहे।
विज्ञापन
नेहरू ने मोहन लाल के लिए पटेल को पत्र लिखा
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू मोहन लाल गौतम से कितना प्रभावित थे, इस बात का महत्व 17 जून 1949 को बल्लभ भाई पटेल को लिखे उनके पत्र से समझा जा सकता है। इसमें नेहरू ने लिखा है कि फूड कमिश्नर के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चयन ठीक होगा जो मंत्री आदि न हो। मैंने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए मोहन लाल गौतम को सबसे अधिक उपयुक्त पाया है।
उसमें संगठन की क्षमता है। साथ ही लोगों के साथ लोक व्यवहार में बेहद कुशल हैं। मैंने सभी के समक्ष नाम रखा उन्होंने इसको प्रस्तावित किया। इसलिए मोहन लाल गौतम को उप मंत्री और आयुक्त (विशेष कार्यकारी शक्तियों के साथ) नियुक्त किया जा सकता है।
काकोरी कांड में भगत सिंह ने अलीगढ़ में काटी थी फरारी
काकोरी कांड के ही एक और नायक भगत सिंह की भी यादें अलीगढ़ से जुड़ी हुई हैं। भगत सिंह ने अलीगढ़ के गांव शादीपुर में शिक्षक के वेश में फरारी काटी। उस समय बालक रहे स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय हरीशंकर आजाद भगत सिंह के संपर्क में आए और भगत सिंह ने आजाद को बम बनाना सिखाया। बम बनाने के बाद उसका विस्फोट गांव के बाहर किया तो उस समय हरीशंकर थोड़ा सहम गए।
करीब पांच वर्ष पूर्व एक बातचीत में हरीशंकर आजाद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि उस समय भगत सिंह को वह पहचान नहीं सके थे। भगत सिंह ने विस्फोट के बाद कहा कि यह भारत माता की मुक्ति के लिए धमाका किया है।
बाद में भगत सिंह के जाने के बाद पता चला कि वह शहीद ए आजम भगत सिंह थे। आजाद कहते हैं कि उसके बाद उन्होंने भी भारत की स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का फैसला कर लिया और आजादी को ही दुल्हन मान लिया। इसके बाद कभी विवाह नहीं किया और देश के लिए ही जीवन अर्पित कर दिया।
विज्ञापन
5 अगस्त 1902 को अलीगढ़ के वीरपुरा में पैदा हुए मोहनलाल किशोर अवस्था के बाद ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। असहयोग आंदोलन के दौरान शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी क्षेत्र में काम किया, बाद में लाहौर गए और पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के संपर्क में रह कर सर्वेंटस ऑफ पीपुल सोसायटी के सदस्य बने। यहीं पर राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के संपर्क में आए।
विज्ञापन
लाहौर के बाद दूसरा कार्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश रहा। 1937-38 में जब गोविंद बल्लभ पंत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की अंतरिम सरकार बनी, तो उसमें मोहन लाल देवरिया, गोरखपुर से चुनकर विधायक के रूप में शामिल हुए। आजादी के बाद संविधान सभा में रहे।
विज्ञापन
नेहरू ने मोहन लाल के लिए पटेल को पत्र लिखा
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू मोहन लाल गौतम से कितना प्रभावित थे, इस बात का महत्व 17 जून 1949 को बल्लभ भाई पटेल को लिखे उनके पत्र से समझा जा सकता है। इसमें नेहरू ने लिखा है कि फूड कमिश्नर के लिए किसी ऐसे व्यक्ति का चयन ठीक होगा जो मंत्री आदि न हो। मैंने सभी पहलुओं पर विचार करते हुए मोहन लाल गौतम को सबसे अधिक उपयुक्त पाया है।
उसमें संगठन की क्षमता है। साथ ही लोगों के साथ लोक व्यवहार में बेहद कुशल हैं। मैंने सभी के समक्ष नाम रखा उन्होंने इसको प्रस्तावित किया। इसलिए मोहन लाल गौतम को उप मंत्री और आयुक्त (विशेष कार्यकारी शक्तियों के साथ) नियुक्त किया जा सकता है।
काकोरी कांड में भगत सिंह ने अलीगढ़ में काटी थी फरारी
काकोरी कांड के ही एक और नायक भगत सिंह की भी यादें अलीगढ़ से जुड़ी हुई हैं। भगत सिंह ने अलीगढ़ के गांव शादीपुर में शिक्षक के वेश में फरारी काटी। उस समय बालक रहे स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय हरीशंकर आजाद भगत सिंह के संपर्क में आए और भगत सिंह ने आजाद को बम बनाना सिखाया। बम बनाने के बाद उसका विस्फोट गांव के बाहर किया तो उस समय हरीशंकर थोड़ा सहम गए।
करीब पांच वर्ष पूर्व एक बातचीत में हरीशंकर आजाद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा था कि उस समय भगत सिंह को वह पहचान नहीं सके थे। भगत सिंह ने विस्फोट के बाद कहा कि यह भारत माता की मुक्ति के लिए धमाका किया है।
बाद में भगत सिंह के जाने के बाद पता चला कि वह शहीद ए आजम भगत सिंह थे। आजाद कहते हैं कि उसके बाद उन्होंने भी भारत की स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का फैसला कर लिया और आजादी को ही दुल्हन मान लिया। इसके बाद कभी विवाह नहीं किया और देश के लिए ही जीवन अर्पित कर दिया।