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जेल से बाहर आने के बाद भी सीधे श्रीलंका नहीं जा सकेंगे जमाती
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बीती एक अप्रैल को कोतवाली इलाके की रंगरेजान मोहल्ला मस्जिद से पकड़े गए श्रीलंकाई मूल के जमाती मो. मुर्शीद पुत्र पाकीर अली और एमजे हिपलुररहमान पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। वह पांच अक्तूबर को अपनी सजा पूरी करके बाहर आ जाएंगे। मगर, इसके बाद वह कहां जाएंगे, इसको लेकर अभी कोई फैसला नहीं हो सका है।
दरअसल, उनके वीजा की अवधि मई में ही समाप्त हो गई थी। ऐसे में एलआईयू, पुलिस और जिला प्रशासन उनके जेल से बाहर आते ही ठहराने के इंतजाम पर मंथन कर रहा है। जमातियों के अधिवक्ता अहलेनबी ने निजामुद्दीन मरकज में संपर्क कर उनके विषय में श्रीलंका दूतावास के अधिकारियों को अवगत कराने सहित विदेश मंत्रालय से सिफारिश कर उनकी जल्द वतन वापसी की मांग की है।
अधिवक्ता अहलेनबी ने बताया कि कोर्ट आदेश में उनको पांच अक्तूबर को पांच माह की सजा पूरी होने और एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लेने के बाद रिहा करने का उल्लेख है। अब बात इससे आगे की है कि जेल से बाहर आने के बाद गैर मुल्क के व्यक्तियों को बिना वीजा के भारत में रहने कैसे दिया जाएगा। उनको जेल से निकालने के बाद तत्काल श्रीलंका दूतावास के हवाले किया जाएगा, डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा, पुलिस खुद उनको श्रीलंका तक छोड़ने जाएगी। इन सब सवालों पर पेंच फंसा हुआ है। इसको लेकर निजामुद्दीन मरकज के लोगों से संपर्क किया गया है। उनसे गुजारिश की है कि वह भारत सरकार और श्रीलंका दूतावास से वार्ता कर इनके मामले का हल कराते हुए इनके वतन वापसी की प्रक्रिया को पूरा कराएं।
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दरअसल, उनके वीजा की अवधि मई में ही समाप्त हो गई थी। ऐसे में एलआईयू, पुलिस और जिला प्रशासन उनके जेल से बाहर आते ही ठहराने के इंतजाम पर मंथन कर रहा है। जमातियों के अधिवक्ता अहलेनबी ने निजामुद्दीन मरकज में संपर्क कर उनके विषय में श्रीलंका दूतावास के अधिकारियों को अवगत कराने सहित विदेश मंत्रालय से सिफारिश कर उनकी जल्द वतन वापसी की मांग की है।
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अधिवक्ता अहलेनबी ने बताया कि कोर्ट आदेश में उनको पांच अक्तूबर को पांच माह की सजा पूरी होने और एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड लेने के बाद रिहा करने का उल्लेख है। अब बात इससे आगे की है कि जेल से बाहर आने के बाद गैर मुल्क के व्यक्तियों को बिना वीजा के भारत में रहने कैसे दिया जाएगा। उनको जेल से निकालने के बाद तत्काल श्रीलंका दूतावास के हवाले किया जाएगा, डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा, पुलिस खुद उनको श्रीलंका तक छोड़ने जाएगी। इन सब सवालों पर पेंच फंसा हुआ है। इसको लेकर निजामुद्दीन मरकज के लोगों से संपर्क किया गया है। उनसे गुजारिश की है कि वह भारत सरकार और श्रीलंका दूतावास से वार्ता कर इनके मामले का हल कराते हुए इनके वतन वापसी की प्रक्रिया को पूरा कराएं।
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