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तत्काल कोटे की ई टिकटों की कालाबाजारी का भंडाफोड़
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रेलवे सुरक्षा बल व रेलवे की अपराध शाखा ने तत्काल कोटे के ई टिकट के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है। टीम ने इस मामले में आईआरसीटीसी के अधिकृत एजेंट को रंगे हाथों दबोचा है। वह दस साल से अवैध कारोबार चला रहा था। उसके पास से 39 हजार रुपये के अग्रिम तिथि के 22 टिकट एवं उपकरण बरामद किए हैं। एजेंट को जेल भेज दिया गया है।
आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सीएस तोमर ने बताया कि क्वालिटी बुक सेंटर नरौरा जिला बुलंदशहर से ई-टिकटों की अवैध कालाबाजारी की शिकायत मिल रही थी। इस पर अपराध शाखा प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार कौशिक, आरपीएफ एसआई रवि कुमार सिवाच, एएसआई ओमकार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच में पता चला कि आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट श्यामपुरी नरौरा निवासी धीरज जैन पुत्र आरके जैन इस मामले में लिप्त है।
टीम ने सेंटर पर छापा मारकर आरोपी धीरज को हिरासत में ले लिया। थाने लाकर पूछताछ में उसने चौकाने वाला खुलासा करते हुए स्वीकार किया कि वह दस साल से यह कारोबार कर रहा है। उसने वर्ष 2010 में बतौर एजेंट आईआरसीटीसी पर अधिकृत यूजर आईडी बनाई थी। इस आईडी से वह एक माह में केवल छह तत्काल टिकट बुक कर सकता था।
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वह भी तत्काल कोटा खुलने के 15 मिनट बाद। इसके बाद उसने अलग-अलग 22 पर्सनल आईडी बनाकर ई-टिकटों की कालाबाजारी शुरू कर दी। धीरज ने 23 आईडी से पिछले दस साल में 9138515 रुपये के 5346 अवैध ई टिकट बनाएं। तलाशी में उसके पास से भविष्य की यात्रा के 22 ई-टिकट बरामद हुए। इनकी कीमत भी 390150 रुपये आंकी गई है। उसके पास से मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर के साथ ही अन्य सामान बरामद किया गया। उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक सीएस तोमर ने बताया कि क्वालिटी बुक सेंटर नरौरा जिला बुलंदशहर से ई-टिकटों की अवैध कालाबाजारी की शिकायत मिल रही थी। इस पर अपराध शाखा प्रभारी निरीक्षक रविंद्र कुमार कौशिक, आरपीएफ एसआई रवि कुमार सिवाच, एएसआई ओमकार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जांच में पता चला कि आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट श्यामपुरी नरौरा निवासी धीरज जैन पुत्र आरके जैन इस मामले में लिप्त है।
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टीम ने सेंटर पर छापा मारकर आरोपी धीरज को हिरासत में ले लिया। थाने लाकर पूछताछ में उसने चौकाने वाला खुलासा करते हुए स्वीकार किया कि वह दस साल से यह कारोबार कर रहा है। उसने वर्ष 2010 में बतौर एजेंट आईआरसीटीसी पर अधिकृत यूजर आईडी बनाई थी। इस आईडी से वह एक माह में केवल छह तत्काल टिकट बुक कर सकता था।
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वह भी तत्काल कोटा खुलने के 15 मिनट बाद। इसके बाद उसने अलग-अलग 22 पर्सनल आईडी बनाकर ई-टिकटों की कालाबाजारी शुरू कर दी। धीरज ने 23 आईडी से पिछले दस साल में 9138515 रुपये के 5346 अवैध ई टिकट बनाएं। तलाशी में उसके पास से भविष्य की यात्रा के 22 ई-टिकट बरामद हुए। इनकी कीमत भी 390150 रुपये आंकी गई है। उसके पास से मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर के साथ ही अन्य सामान बरामद किया गया। उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।