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एएमयू चुनाव: डॉ. सैयदना के दादा व पिता भी रहे थे कुलाधिपति, यहां पढ़ें पूरा इतिहास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Mon, 03 Dec 2018 02:50 AM IST
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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बोहरा समुदाय के धर्मगुरु डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन रविवार को लगातार दूसरी बार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (चांसलर) चुन लिए गए। नवाब छतारी इब्ने सईद खां भी फिर सह कुलाधिपति चुन लिए गए हैं।
वहीं इब्ने सीना अकादमी के अध्यक्ष एवं यूनानी चिकित्सा के प्रख्यात विद्वान पद्मश्री प्रो. सैयद जिल्लुर रहमान को विश्वविद्यालय का मानद कोषाध्यक्ष चुना गए हैं। पचास सालों में पहली बार तीनों प्रतिष्ठित पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
आपको बता दें कि वर्ष 2015 चुनाव में कुलाधिपति के लिए डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन एवं पूर्व कुलपति महमूद उर रहमान के बीच मुकाबला हुआ था। सैयदना को 97 एवं पद्मश्री महमूद उर रहमान को 33 मत मिले थे। कोर्ट की बैठक में उस समय 156 कोर्ट सदस्यों में से 132 शामिल हुए थे।
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चुनाव में महमूद उर रहमान एवं उनकी टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि मुंबई स्थित सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के पिता सैयदना बुरहानउद्दीन एवं दादा सैयदना ताहिर सैफुद्दीन भी एएमयू के कुलाधिपति रह चुके हैं।
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वहीं इब्ने सीना अकादमी के अध्यक्ष एवं यूनानी चिकित्सा के प्रख्यात विद्वान पद्मश्री प्रो. सैयद जिल्लुर रहमान को विश्वविद्यालय का मानद कोषाध्यक्ष चुना गए हैं। पचास सालों में पहली बार तीनों प्रतिष्ठित पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
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आपको बता दें कि वर्ष 2015 चुनाव में कुलाधिपति के लिए डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन एवं पूर्व कुलपति महमूद उर रहमान के बीच मुकाबला हुआ था। सैयदना को 97 एवं पद्मश्री महमूद उर रहमान को 33 मत मिले थे। कोर्ट की बैठक में उस समय 156 कोर्ट सदस्यों में से 132 शामिल हुए थे।
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चुनाव में महमूद उर रहमान एवं उनकी टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि मुंबई स्थित सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के पिता सैयदना बुरहानउद्दीन एवं दादा सैयदना ताहिर सैफुद्दीन भी एएमयू के कुलाधिपति रह चुके हैं।
अब तक के एएमयू चांसलर
सुल्तान जहां बेगम, मो. हमीदुल्लाह खान, मीर उस्मान अली खान, एचएच सैयद रजा अली खान, सैयदना ताहिर सैफुद्दीन, हाफिज अहमद सईद खान, प्रो. एआर किदवई, प्रो. एएम खुसरो, हाकिम अब्दुल हमीद, सैयदना बुरहानुद्दीन, न्यायमूर्ति एएम अहमदी एवं सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन (दो बार)।