डॉ. आस्था हत्याकांड : अमर उजाला का सच... बच्चों के जेहन में था मां की मौत का राज
‘अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक यह बात उजागर की थी कि बच्चों को मां की हत्या की जानकारी थी। मगर, उन्हें डराया गया था। इसलिए पुलिस की पहली पूछताछ में वे छिपा गए। सोमवार को खुलासे के दौरान यह सच सामने आ गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
‘अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक यह बात उजागर की थी कि बच्चों को मां की हत्या की जानकारी थी। मगर, उन्हें डराया गया था। इसलिए पुलिस की पहली पूछताछ में वे छिपा गए। सोमवार को खुलासे के दौरान यह सच सामने आ गया। बच्चों ने पिता की गिरफ्तारी के बाद यह राज उजागर किया कि उन्हें मां की हत्या की जानकारी थी। झगड़े के बाद घर से बाहर ले जाते समय पिता ने बता दिया था कि तुम्हारी मां की मौत हो गई है। मगर, उन्हें विकास व पवन ने डराया भी था, इसलिए उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। गिरफ्तारी के बाद बच्चों के फिर से बयान दर्ज किए गए हैं।
हत्या के बाद भाई को पूरी बात बताई
पुलिस जांच में साफ हुआ कि हत्या के बाद दोनों बच्चों व तीनों आरोपियों को लेकर अरुण पहले अपने प्लांट पर गया। फिर वहां से अपने भाई तरुण के घर आया, जहां बच्चे छोड़े। इस दौरान करीब आधा घंटे तक भाई के पास बैठकर पूरी बात बताई। फिर भाई से कहा कि रुपयों का इंतजाम कर लेना। साथ में किसी अच्छे वकील का इंतजाम भी कर लेना। एक दो दिन में मामला ठंडा होने पर वह कोर्ट में हाजिर होने आएगा।
अन्य नामजदों व संदिग्धों पर अभी जांच जारी
सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय ने बताया कि इस मामले में अभी अरुण का एक भाई व एक दोस्त नामजद हैं। जबकि कुछ अन्य संदिग्ध भी हैं। उनकी भूमिका को लेकर जांच जारी है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाएगी। उन सभी को क्लीनचिट नहीं दी जाएगी।
मनीष की भूमिका अभी तय नहीं
सीओ के अनुसार आस्था की हत्या के बाद सबसे पहले पुलिस को सूचना देने वाला मनीष चौधरी है, जो आस्था के परिवार के अनुसार करीबी ड्राइवर है। अरुण ने अपने बयान में उसे लेकर मारपीट आदि के सवाल खड़े किए हैं। चूंकि, उसकी ओर से अभी तक सीधा कोई अपराध करना नहीं पाया गया है। इसलिए अभी भूमिका तय नहीं है। बाकी जांच में जो सामने आएगा। उसके अनुसार तय होगा।
अलीगढ़-गाजियाबाद की पार्टी को बेचा माल
आस्था की प्लानिंग का ही यह हिस्सा था कि अरुण ने दो या तीन दिन पहले अपने प्लांट पर मौजूद 300 ऑक्सीजन सिलिंडर में से 250 सिलिंडर एक व 50 सिलिंडर एक अलीगढ़ व गाजियाबाद की पार्टी को बेचे थे। कुछ जगह से रुपया भी एडवांस लिया था कि आपको माल जल्द ही दिया जाएगा।
नए मोबाइल से करीबियों को कॉल पर फंसा
13 और 14 सितंबर की दोपहर तक अरुण ने अपने किसी करीबी को संपर्क नहीं किया। मगर 14 सितंबर की शाम के बाद से अरुण व उसके साथ चंडीगढ़ तक गए अशोक उर्फ टशन ने अपने कुछ करीबियों को नए मोबाइल नंबर से कॉल किया। सभी से एक ही बात कही कि एक दो-दिन में मामला ठंडा होने पर वह कोर्ट में हाजिर हो जाएगा। पुलिस इन करीबियों के नंबर चेक कर रही थी। इसी बीच अरुण का यह नया नंबर हाथ लगा और उसकी लोकेशन पर काम किया तो पुलिस उसके पीछे लग गई। मगर अशोक हाथ नहीं आया। पता चला कि अशोक अरुण के साथ चंडीगढ़ के बाद से अलग हो गया।
350 सीसीटीवी खंगाले, ऐसे पूरा हुआ फरारी का सफर
पुलिस ने वारदात के खुलासे के लिए 350 सीसीटीवी खंगाले थे। शाम साढ़े सात बजे घर के पास अरुण के साथ तीनों युवक सीसीटीवी में कैद हुए हैं। वे इधर-उधर टहल रहे हैं। इसके बाद घटना को अंजाम देकर निकलते समय अरुण के साथ तीनों कैद हैं। फिर कासिमपुर जाते समय एक सीसीटीवी में अरुण की कार कैद हुई। इसके बाद भाई के घर से अरुण तीनों को साथ लेकर निकला। फिर एसपी सिटी दफ्तर के बगल के पेट्रोल पंप पर गाड़ी में तेल भरवाते कैद हुआ। यहां से नोएडा एक्सप्रेस वे के रास्ते जेवर टोल पर भी वह कैद हुआ।
इसके बाद उन्होंने टोल से आगे एक ढाबे पर खाना खाकर सोते हुए दिन निकाला। दिन निकलते ही यहां से अरुण व अशोक दिल्ली गए और पवन व विकास अलग हो गए। अरुण यहां से सीधे दिल्ली पहाड़गंज की एक पार्किंग में पहुंचा। जहां उसने अपनी गाड़ी लगाई। वहां सीसीटीवी में अरुण कैद हुआ। इसके बाद मोबाइल की मदद से पता चला कि वह चंडीगढ़ पहुंचा है। वहां अशोक उससे अलग हो गया। चंडीगढ़ से अरुण शिमला गया। फिर शिमला से वापस चंडीगढ़ लौटा और दिल्ली आकर अपनी गाड़ी लेकर सुपारी की शेष रकम देने, साथ में न्यायालय में सरेंडर करने के इरादे से अलीगढ़ लौट रहा था। तभी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
गांव में ही घूमे बाकी आरोपी, न था खुद के पकड़े जाने का डर
पहले ही दिन से इस घटना में अरुण नामजद हुआ था। भाड़े के आरोपियों का कहीं कोई नाम दूर-दूर तक सामने नहीं आया था। इसलिए नोएडा से लौटने के बाद पवन व विकास गांव में ही घूम रहे थे। उन्हें खुद के पकड़े जाने का डर न था। इसलिए उनकी गिरफ्तारी आसान हो गई। हां, सीसीटीवी में उनके चेहरे जब सामने आए तो पुलिस ने उनकी पहचान कराने के लिए बेहद गोपनीयता रखी अन्यथा वे भी भागने में सफल रहते। अभी उनका साथी अशोक उर्फ टशन गायब है, जिसके लिए एक टीम लगा रखी है।
गाड़ी के न थे कागज, नकदी भी बरामद
पुलिस को अरुण के पास से वरना कार बरामद हुई है, जिसके कागज न होने पर सीज कर दिया गया है। इसके अलावा अरुण के पास से 32,000 रुपये, विकास के पास से 17,000 रुपये नगद और अभियुक्त पवन के पास से 5,200 रुपये बरामद हुए हैं। ये रुपये सुपारी से संबंधित बताए गए हैं।
इस हाईप्रोफाइल वारदात में पहले ही दिन से सीओ तृतीय के नेतृत्व में चार पुलिस टीमें वैज्ञानिक व तकनीकी संसाधनों के सहारे खुलासे के लिए लगाई गई थीं। उसी आधार पर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अभी कुछ नाम शेष हैं, जिनको लेकर जांच जारी है। जांच में जो उजागर होगा, उसके अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं पुलिस को मुकदमे में जल्द ट्रायल शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।
-कलानिधि नैथानी, एसएसपी