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डॉ. कफील की रिहाई पर एएमयू में बंटी मिठाई, मना जश्न

Wed, 02 Sep 2020 01:33 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 01:33 AM IST
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Distributed sweets on release of Dr. kafeel
दिसंबर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भड़काऊ संबोधन करने के आरोपी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्रवाई का सामना कर रहे डॉक्टर कफील की हाईकोर्ट से रिहाई के आदेश पर विश्वविद्यालय परिसर में मिठाई बांटकर जश्न मनाया गया। हाईकोर्ट के फैसले का एएमयू के छात्र नेताओं ने स्वागत किया है। वहीं, जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हमजा मलिक ने इसे इंसाफ की जीत बताया है।
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डॉ. हमजा मलिक ने कहा कि यह प्रदेश सरकार के अहंकारी रवैये और दमनकारी नीति की हार है। तानाशाही पर लोकतंत्र की जीत है। देश के आपातकालीन माहौल में इस फैसले से लोगों का विश्वास संवैधानिक संस्थाओं में और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हम पहले भी मुख्यमंत्री से डॉ. कफील की रिहाई की मांग कर रहे थे और कह रहे थे कि महामारी के समय उनकी सेवाओं की आवश्यकता है। मिष्ठान वितरण के मौके पर उपाध्यक्ष शाहनवाज इकबाली, सचिव डॉ काशिफ व मेंबर ऑफ आरडीए डॉक्टर शेख शाहबाज मौजूद रहे।
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सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं : फैजुल हसन
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन ने कहा कि डॉ. कफील की आजादी न्याय की जीत है। सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र का जिंदा रहना बहुत जरूरी है। हाईकोर्ट के फैसले से प्रदेश सरकार की तानाशाही पर भी प्रहार हुआ है। अब एक नए हौसले के साथ सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ फिर से लड़ाई लड़ी जाएगी। जिन लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने पर जेल में डाल दिया गया था उनके लिए एक संघर्ष का नया अध्याय शुरू होगा।
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कब क्या हुआ था
- 12 दिसंबर 2019 को शाम 5 बजे गोरखपुर के थाना राजघाट में बसंतपुर के रहने वाले 46 वर्षीय डॉ. कफील ने एएमयू के बॉबे सैयद पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ छात्रों के बीच अपना संबोधन किया। इससे पहले गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना को लेकर डॉ. कफील चर्चा में आ चुके थे।
- 13 दिसंबर 2019 को एएमयू में 10000 से अधिक छात्रों ने प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया।
- 15 दिसंबर 2019 को हजारों छात्र एक बार फिर से प्रदर्शन करने के लिए एएमयू कैंपस से शहर की ओर कूच करने लगे। प्रदर्शन हिंसक हो गया और इसमें कई छात्र, पुलिसकर्मी, पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए।
- दिसंबर महीने के अंत में थाना सिविल लाइन में डॉ. कफील के खिलाफ लोक व्यवस्था भंग करने, भड़काऊ संबोधन करने, कानून और व्यवस्था भंग करने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया।
- डॉ. कफील को पुलिस मुंबई से गिरफ्तार करके अलीगढ़ लाई। अदालत में पेश किया गया। फिर मथुरा जेल भेज दिया गया।
- 15 फरवरी को डॉ. कफील की मथुरा जेल से रिहाई होने वाली थी। लेकिन 14 फरवरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी गई। इसके बाद प्रत्येक 3 महीने की अवधि पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्रवाई को बढ़ाया जाता रहा।

डॉ कफील को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की
अलीगढ़। डॉ. कफील खान की हाईकोर्ट के आदेश से रिहाई होने के बाद डॉ. नूतन ठाकुर ने उनको प्रताड़ित किए जाने पर एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। डॉ. नूतन ठाकुर ने कहा कि डॉ. कफील को जानबूझकर, राजनीतिक दबाव में फंसाने के उद्देश्य से गलत ढंग से एनएसए की संस्तुति की गई। इसके लिए अलीगढ़ के एसएसपी सहित अलीगढ़ के सभी संबंधित पुलिस अफसरों और इस अवधि को लगातार बढ़ाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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