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आवाज उठाने पर रची जा रही है बर्खास्तगी की साजिश
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मनोज कुमार अपनी मां व भाई के साथ।
- फोटो : CITY OFFICE
मैस के खाने के खिलाफ आवाज उठाने वाले फिरोजाबाद पुलिस लाइन के सिपाही मनोज कुमार का कहना है कि उसकी बर्खास्तगी की साजिश रची जा रही है। । 26 अगस्त तक जबरन अवकाश देकर घर भेज दिया गया है। वहीं पिछले कुछ वर्षों में अनुशासनहीनता पर 15 दंड की सूची जारी की है, उसमें दो दंड तो ऐसे हैं, जो नवंबर 2022 में मिलना बताया जा रहा है, जबकि नवंबर अभी आया तक नहीं है।
अवकाश मिलने के बाद शुक्रवार को गोंडा स्थित अपने घर पहुंचे सिपाही मनोज ने यह खुलासा बातचीत में किया है। मनोज ने बताया कि उसने कोई गलत मुद्दा नहीं उठाया। जब हम प्रति डाइट के अनुसार भोजन का भुगतान करते हैं तो हमें सही खाना मिलना चाहिए। इतना ही तो कहा। अब जबरन अवकाश देकर घर भेज दिया गया है। यहां भेजकर उसके खिलाफ बर्खास्तगी की साजिश रची जा रही है। पिछले चार वर्ष में 15 अनुशासनहीनता दंड मिलना बताया जा रहा है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दी गई है। मगर उसमें कॉलम नंबर 13 व 14 पर जो दंड हैं। उनको नवंबर 2022 में मिलना बताया है, जबकि नवंबर अभी आया तक नहीं है। ऐसे में कैसे मान लिया जाए कि न्याय होगा। ऐसा करके आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
पल्लेदारी और मजदूरी कर सिपाही बना मनोज, बीवी से हुआ तलाक
मनोज गोंडा पंचायत के माजरा दरबर गढ़ी में अपने पिता भगवती, मां और तीन भाइयों के साथ रहता है। वह परिवार में खुद सबसे बड़ा है। परिवार के सभी पुरुष सदस्य पल्लेदारी और मजदूरी करते हैं। खुद मनोज ने भी लंबे समय तक पल्लेदारी की। मजदूरी के साथ-साथ उसने पढ़ाई की और प्रयास कर वर्ष 2018 में पुलिस में सिपाही के पद पर भरती हो गया। आज भी छोटा भाई बनिया व नीटू और पिता वही काम करते हैं। दो कमरों के मकान में रहने वाले मनोज के आर्थिक हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। मनोज ने स्वीकारा कि उसकी शादी 2020 में आगरा की युवती से हुई और पत्नी से बात न बनने पर नवंबर 2021 में तलाक हो गया। तब से वह अकेला ही है। अभी तक दूसरी शादी को लेकर कभी सोचा भी नहीं। छोटा भाई अभी मजूदरी के साथ -साथ पढ़ाई भी कर रहा है।
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परिवार साथ खड़ा है
परिवार के अन्य सभी सदस्य उसकी आवाज के साथ खड़े हैं। घर पर मौजूद मां व भाइयों ने कहा कि कुछ गलत थोड़ा ही कहा है। खाने को लेकर शिकायत ही तो की है। अब इसे इस तरह से गलत रूप दिया जा रहा है।
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अवकाश मिलने के बाद शुक्रवार को गोंडा स्थित अपने घर पहुंचे सिपाही मनोज ने यह खुलासा बातचीत में किया है। मनोज ने बताया कि उसने कोई गलत मुद्दा नहीं उठाया। जब हम प्रति डाइट के अनुसार भोजन का भुगतान करते हैं तो हमें सही खाना मिलना चाहिए। इतना ही तो कहा। अब जबरन अवकाश देकर घर भेज दिया गया है। यहां भेजकर उसके खिलाफ बर्खास्तगी की साजिश रची जा रही है। पिछले चार वर्ष में 15 अनुशासनहीनता दंड मिलना बताया जा रहा है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दी गई है। मगर उसमें कॉलम नंबर 13 व 14 पर जो दंड हैं। उनको नवंबर 2022 में मिलना बताया है, जबकि नवंबर अभी आया तक नहीं है। ऐसे में कैसे मान लिया जाए कि न्याय होगा। ऐसा करके आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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पल्लेदारी और मजदूरी कर सिपाही बना मनोज, बीवी से हुआ तलाक
मनोज गोंडा पंचायत के माजरा दरबर गढ़ी में अपने पिता भगवती, मां और तीन भाइयों के साथ रहता है। वह परिवार में खुद सबसे बड़ा है। परिवार के सभी पुरुष सदस्य पल्लेदारी और मजदूरी करते हैं। खुद मनोज ने भी लंबे समय तक पल्लेदारी की। मजदूरी के साथ-साथ उसने पढ़ाई की और प्रयास कर वर्ष 2018 में पुलिस में सिपाही के पद पर भरती हो गया। आज भी छोटा भाई बनिया व नीटू और पिता वही काम करते हैं। दो कमरों के मकान में रहने वाले मनोज के आर्थिक हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। मनोज ने स्वीकारा कि उसकी शादी 2020 में आगरा की युवती से हुई और पत्नी से बात न बनने पर नवंबर 2021 में तलाक हो गया। तब से वह अकेला ही है। अभी तक दूसरी शादी को लेकर कभी सोचा भी नहीं। छोटा भाई अभी मजूदरी के साथ -साथ पढ़ाई भी कर रहा है।
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परिवार साथ खड़ा है
परिवार के अन्य सभी सदस्य उसकी आवाज के साथ खड़े हैं। घर पर मौजूद मां व भाइयों ने कहा कि कुछ गलत थोड़ा ही कहा है। खाने को लेकर शिकायत ही तो की है। अब इसे इस तरह से गलत रूप दिया जा रहा है।