DDU Hospital: किडनी दे रहीं जवाब, डायलिसिस के लिए मिल रही केवल तारीख, बढ़ रही मौत की वेटिंग लिस्ट
डायलिसिस के लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल मरीजों की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। यदि जल्द ही मशीनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई या नई शिफ्ट शुरू नहीं हुई, तो यह प्रतीक्षा सूची मौत की सूची में बदल सकती है।
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अलीगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) संयुक्त चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट इस समय भारी दबाव और संसाधनों की कमी से जूझ रही है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले किडनी रोगियों को केवल ''तारीख'' मिल रही है, जबकि समय पर डायलिसिस न होने से उनकी किडनियां जवाब दे रहीं हैं।
अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार बीते अगस्त से 25 गंभीर मरीज प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में हैं, जिन्हें साढ़े पांच महीने बाद भी नंबर नहीं मिल सका है। डीडीयू अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित इस यूनिट में मात्र 10 बेड हैं। इनमें से एक बेड हेपेटाइटिस-सी के मरीजों के लिए आरक्षित है।
तीन शिफ्टों में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। वर्ष 2025 में कुल 8,195 मरीजों की डायलिसिस की गई। चुनौती यह है कि एक पंजीकृत मरीज की हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस होनी चाहिए। पुराने मरीजों का चक्र पूरा करने में ही मशीनें पूरी क्षमता से चल रही हैं, जिससे नए मरीजों की भर्ती लगभग बंद है।
मरीजों की समय से डायलिसिस की जा रही है। पंजीकृत मरीजों को वरीयता दी जाती है। इसके अलावा आने वाले मरीजों को वेटिंग लिस्ट में रखा जाता है। अगर कोई मरीज नहीं आता है तो उन्हें फोन कर डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है।- डॉ. एम के माथुर, सीएमएस, डीडीयू अस्पताल
प्रशासनिक चुप्पी और बढ़ता खतरा
वेटिंग लिस्ट में शामिल मरीजों की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। यदि जल्द ही मशीनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई या नई शिफ्ट शुरू नहीं हुई, तो यह प्रतीक्षा सूची मौत की सूची में बदल सकती है। गरीब मरीजों के लिए निजी अस्पताल पहुंच से बाहर हैं और सरकारी अस्पताल में जगह नहीं है।
केस 1-निजी अस्पताल का खर्च वश से बाहर
बेगपुर निवासी 55 वर्षीय मरीज पिछले चार महीनों से डीडीयू अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। उनके परिजन आसिफ ने बताया कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं। प्राइवेट अस्पताल में एक बार की डायलिसिस का खर्च तीन से चार हजार रुपये आता है, जो हमारे वश से बाहर है। डीडीयू में नाम लिखाया था, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि अभी बेड खाली नहीं है। अब उनकी हालत और बिगड़ रही है।
केस 2-इंतजार में टूटी उम्मीद
क्वार्सी इलाके की रहने वाली 50 वर्षीय महिला अगस्त से वेटिंग लिस्ट में थी। उनके परिजनों का कहना है कि वे हर हफ्ते अस्पताल जाकर गुहार लगाते थे, लेकिन नंबर नहीं आया। अस्पताल की तारीखों और बीमारी के दर्द के बीच पिछले महीने विमला देवी की सांसें टूट गईं। उनके जैसे कई मरीज हैं, जो सिस्टम की सुस्ती और संसाधनों की कमी के कारण इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।