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जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ेगी धनीपुर हवाई पट्टी
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धनीपुर हवाई पट्टी।
- फोटो : CITY OFFICE
आशीष निगम
महायोजना 2031 में उद्योगों को खास तवज्जो दी जा रही है। धनीपुर हवाई पट्टी और यहां संचालित तीन फ्लाइंग क्लबों को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने की तैयारी हो रही है ताकि भविष्य में जेवर और एनसीआर तक एयर टैक्सी और एयर एंबुलेंस की सुविधा दी जा सके। इसके साथ ही यहां संचालित फ्लाइंग क्लबों में कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग के साथ ड्रोन कैमरों को उड़ाने का प्रशिक्षण, एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ और एयर होस्टेस का प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा। इससे रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। अलीगढ़ में प्रशिक्षण लेने के बाद युवा जेवर एयरपोर्ट में अलग-अलग जॉब हासिल कर पाएंगे। अलीगढ़ इस क्षेत्र में एक बड़ा केंद्र बन सकता है, क्योंकि प्रदेश में और कहीं तीन फ्लाइंग क्लब नहीं है।
कानपुर की ओर जीटी रोड पर बनी धनीपुर हवाई पट्टी अपग्रेड हो रही है। यहां से लखनऊ के लिए उड़ान भरी जाएगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य शहरों की उड़ान शुरू होगी। यहां पर तीन फ्लाइंग क्लब भी हैं। जहां कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग भी होती है। महायोजना 2031 में इस हवाई पट्टी को विशेष रूप से स्थान दिया जा रहा है। इससे अलीगढ़ में कामर्शियल पायलट ट्रेनिंग हो और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से इसका भरपूर लाभ लिया जा सके। यहां पर ड्रोन का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू हो रहा है। एंबीशन फ्लाइंग ने इसके लिए डायरेक्टर जनरल सिविल एवीएशन से अनुमति मांगी है। इसके बाद युवा ड्रोन उड़ाने और रिकार्डिंग करने का प्रमाणिक प्रशिक्षण ले पाएंगे। ड्रोन का प्रशिक्षण लेकर युवा भारत सरकार की भू स्वामित्व योजना के तहत लोगों के घरों और दुकानों का सर्वे करने में मदद कर सकेंगे। इसके अलावा ताला हार्डवेयर उद्योग के लिए कामन फैसिलिटी सेंटर बनेंगे। शहर के चारों ओर छोटे उद्योग क्षेत्र बसाए जाएंगे। जहां घनी आबादी के उद्योगों को शिफ्ट किया जाएगा। मथुरा रोड की मीट एक्सपोर्ट यूनिटों को भी सुव्यवस्थित किया जाएगा। महायोजना तैयार कर रही अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने इस संबंध में अधिकारियों से वार्ता की है।
हमारे यहां कामर्शियल पायलट ट्रेनिंग हो रही है। ड्रोन कैमरे उड़ाने का प्रमाणिक कोर्स कराने की तैयारी हो रही है। एयर होस्टेस ट्रेनिंग सेंटर पहले से ही है, जो गाजियाबाद में है। उसे यहां स्थानांतरित कर लेंगे। भविष्य में एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग देेकर सैकड़ों युवाओं को जेवर एयरपोर्ट में रोजगार दिलाया जा सकता है। एयर टैक्सी, एयर एंबुलेंस सुविधा आसानी से दी जा सकती है। केवल अनुमति का इंतजार है। अनुमति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
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-विशाल गर्ग, डायरेक्टर एंबीशन फ्लाइंग क्लब।
मास्टर प्लान में शहर के चारों ओर उद्योग क्षेत्र बनेंगे। इससे घनी आबादी से उद्योगों को दूर कर प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। मीट एक्सपोर्ट इकाइयां व्यवस्थित होंगी। कामन फैसिलिटी सेंटर बनेंगे। धनीपुर हवाई पट्टी से भविष्य के लिए एयर टैक्सी सेवा एक बेहतर विकल्प है। फ्लाइंग क्लब भी इस तरह के काम से आय और रोजगार बढ़ाना चाहते हैं। इसके विकास को लेकर आधुनिक मॉडल बनाएंगे। इसकी अनुमति ली जाएगी।
-डीएस भदौरिया, एक्सईएन एडीए।
अलीगढ़ में ही हवाई पट्टी के साथ तीन फ्लाइंग क्लब संचालित हैं। यहां से कामर्शियल पायलट, एयर होस्टेस, एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग शुरू कर रोजगार के नये अवसर पैदा हो सकते हैं। इसलिए धनीपुर हवाई पट्टी की साइड में ऊंची इमारतें नहीं बन सकती हैं। मास्टर प्लान में इस हवाई पट्टी को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ कर विकास और रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पर सभी अधिकारियों से बात हो रही है।
-संतोष चौधरी, अर्बन प्लानर।
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महायोजना 2031 में उद्योगों को खास तवज्जो दी जा रही है। धनीपुर हवाई पट्टी और यहां संचालित तीन फ्लाइंग क्लबों को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने की तैयारी हो रही है ताकि भविष्य में जेवर और एनसीआर तक एयर टैक्सी और एयर एंबुलेंस की सुविधा दी जा सके। इसके साथ ही यहां संचालित फ्लाइंग क्लबों में कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग के साथ ड्रोन कैमरों को उड़ाने का प्रशिक्षण, एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ और एयर होस्टेस का प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा। इससे रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। अलीगढ़ में प्रशिक्षण लेने के बाद युवा जेवर एयरपोर्ट में अलग-अलग जॉब हासिल कर पाएंगे। अलीगढ़ इस क्षेत्र में एक बड़ा केंद्र बन सकता है, क्योंकि प्रदेश में और कहीं तीन फ्लाइंग क्लब नहीं है।
कानपुर की ओर जीटी रोड पर बनी धनीपुर हवाई पट्टी अपग्रेड हो रही है। यहां से लखनऊ के लिए उड़ान भरी जाएगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य शहरों की उड़ान शुरू होगी। यहां पर तीन फ्लाइंग क्लब भी हैं। जहां कामर्शियल पायलट की ट्रेनिंग भी होती है। महायोजना 2031 में इस हवाई पट्टी को विशेष रूप से स्थान दिया जा रहा है। इससे अलीगढ़ में कामर्शियल पायलट ट्रेनिंग हो और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से इसका भरपूर लाभ लिया जा सके। यहां पर ड्रोन का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू हो रहा है। एंबीशन फ्लाइंग ने इसके लिए डायरेक्टर जनरल सिविल एवीएशन से अनुमति मांगी है। इसके बाद युवा ड्रोन उड़ाने और रिकार्डिंग करने का प्रमाणिक प्रशिक्षण ले पाएंगे। ड्रोन का प्रशिक्षण लेकर युवा भारत सरकार की भू स्वामित्व योजना के तहत लोगों के घरों और दुकानों का सर्वे करने में मदद कर सकेंगे। इसके अलावा ताला हार्डवेयर उद्योग के लिए कामन फैसिलिटी सेंटर बनेंगे। शहर के चारों ओर छोटे उद्योग क्षेत्र बसाए जाएंगे। जहां घनी आबादी के उद्योगों को शिफ्ट किया जाएगा। मथुरा रोड की मीट एक्सपोर्ट यूनिटों को भी सुव्यवस्थित किया जाएगा। महायोजना तैयार कर रही अर्बन प्लानर संतोष चौधरी ने इस संबंध में अधिकारियों से वार्ता की है।
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हमारे यहां कामर्शियल पायलट ट्रेनिंग हो रही है। ड्रोन कैमरे उड़ाने का प्रमाणिक कोर्स कराने की तैयारी हो रही है। एयर होस्टेस ट्रेनिंग सेंटर पहले से ही है, जो गाजियाबाद में है। उसे यहां स्थानांतरित कर लेंगे। भविष्य में एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग देेकर सैकड़ों युवाओं को जेवर एयरपोर्ट में रोजगार दिलाया जा सकता है। एयर टैक्सी, एयर एंबुलेंस सुविधा आसानी से दी जा सकती है। केवल अनुमति का इंतजार है। अनुमति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
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-विशाल गर्ग, डायरेक्टर एंबीशन फ्लाइंग क्लब।
मास्टर प्लान में शहर के चारों ओर उद्योग क्षेत्र बनेंगे। इससे घनी आबादी से उद्योगों को दूर कर प्रदूषण पर काबू पाया जा सके। मीट एक्सपोर्ट इकाइयां व्यवस्थित होंगी। कामन फैसिलिटी सेंटर बनेंगे। धनीपुर हवाई पट्टी से भविष्य के लिए एयर टैक्सी सेवा एक बेहतर विकल्प है। फ्लाइंग क्लब भी इस तरह के काम से आय और रोजगार बढ़ाना चाहते हैं। इसके विकास को लेकर आधुनिक मॉडल बनाएंगे। इसकी अनुमति ली जाएगी।
-डीएस भदौरिया, एक्सईएन एडीए।
अलीगढ़ में ही हवाई पट्टी के साथ तीन फ्लाइंग क्लब संचालित हैं। यहां से कामर्शियल पायलट, एयर होस्टेस, एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ की ट्रेनिंग शुरू कर रोजगार के नये अवसर पैदा हो सकते हैं। इसलिए धनीपुर हवाई पट्टी की साइड में ऊंची इमारतें नहीं बन सकती हैं। मास्टर प्लान में इस हवाई पट्टी को जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ कर विकास और रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पर सभी अधिकारियों से बात हो रही है।
-संतोष चौधरी, अर्बन प्लानर।