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Aligarh News: मां का अंतिम संस्कार करने के लिए भिड़ी बेटी-पुत्रवधू
Sat, 02 Mar 2024 12:13 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Sat, 02 Mar 2024 12:13 AM IST
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गांव नगला पदम के मजरा रेसरा में एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार को लेकर मृतका की बेटी और पुत्रवधू पक्ष में भिड़ंत हो गई। दोनोें ही पक्ष स्वयं से अंतिम संस्कार करने की जिद पर अड़े थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों को शांत कराया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने मिलकर अंतिम संस्कार किया।
रेसरा निवासी स्व. कोमल प्रसाद की पत्नी पिस्ता देवी (90) की पिछले कुछ समय से तबीयत खराब चल रही थी। उनकी बेटी नीरज शर्मा के अनुसार कुछ दिनों से मां उनके पास फरीदाबाद में थीं। उनकी इच्छा थी कि अंतिम समय में अपने गांव में ही दम तोड़ें। बृहस्पतिवार को तबीयत ज्यादा खराब होने पर वह अपनी मां को फरीदाबाद से रेसरा गांव में अपने चचेरे भाई के घर पर लेकर आ गईं। रात में आठ बजे गांव में उनका निधन हो गया।
शुक्रवार को वह अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थीं, तभी पुत्रवधू सुनीता देवी वहां पर पहुंच गईं। वह अपनी सास का अंतिम संस्कार स्वयं करने की बात कहते हुए शव को अपने घर ले जाने की तैयारी करने लगीं। इसका नीरज शर्मा और परिवार के अन्य लोगों ने विरोध किया जिस पर दोनों पक्षों के बीच खींचातानी होने लगी।
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15 बीघे जमीन के लिए भिड़े दोनों पक्ष
पिस्ता देवी के एक पुत्र और तीन बेटियां हैं। पति की मौत के बाद 15 बीघे जमीन बेटे और 15 बीघे जमीन उनके नाम पर आ गई। इकलौते बेटे की भी मौत के बाद बेटे की जमीन पुत्रवधू और पौत्र के नाम पर दर्ज हो गई, जबकि पिस्ता देवी के नाम 15 बीघे जमीन है। कोतवाल विनोद कुमार के अनुसार इसी जमीन पर हक के लिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी ओर से अंतिम संस्कार करने की जिद कर रहे थे। दोनों पक्षों को शांत कराते हुए दोनों पक्षों की सहमति से बुजुर्ग महिला के शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया है।
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रेसरा निवासी स्व. कोमल प्रसाद की पत्नी पिस्ता देवी (90) की पिछले कुछ समय से तबीयत खराब चल रही थी। उनकी बेटी नीरज शर्मा के अनुसार कुछ दिनों से मां उनके पास फरीदाबाद में थीं। उनकी इच्छा थी कि अंतिम समय में अपने गांव में ही दम तोड़ें। बृहस्पतिवार को तबीयत ज्यादा खराब होने पर वह अपनी मां को फरीदाबाद से रेसरा गांव में अपने चचेरे भाई के घर पर लेकर आ गईं। रात में आठ बजे गांव में उनका निधन हो गया।
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शुक्रवार को वह अंतिम संस्कार की तैयारी कर रही थीं, तभी पुत्रवधू सुनीता देवी वहां पर पहुंच गईं। वह अपनी सास का अंतिम संस्कार स्वयं करने की बात कहते हुए शव को अपने घर ले जाने की तैयारी करने लगीं। इसका नीरज शर्मा और परिवार के अन्य लोगों ने विरोध किया जिस पर दोनों पक्षों के बीच खींचातानी होने लगी।
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15 बीघे जमीन के लिए भिड़े दोनों पक्ष
पिस्ता देवी के एक पुत्र और तीन बेटियां हैं। पति की मौत के बाद 15 बीघे जमीन बेटे और 15 बीघे जमीन उनके नाम पर आ गई। इकलौते बेटे की भी मौत के बाद बेटे की जमीन पुत्रवधू और पौत्र के नाम पर दर्ज हो गई, जबकि पिस्ता देवी के नाम 15 बीघे जमीन है। कोतवाल विनोद कुमार के अनुसार इसी जमीन पर हक के लिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी ओर से अंतिम संस्कार करने की जिद कर रहे थे। दोनों पक्षों को शांत कराते हुए दोनों पक्षों की सहमति से बुजुर्ग महिला के शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया है।