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सासाराम में हुई गिरफ्तारी में काम आई चंडौस के नक्सलियों की निशानदेही

Fri, 21 Oct 2016 02:27 AM IST
अभिषेक शर्मा
अभिषेक शर्मा Updated Fri, 21 Oct 2016 02:27 AM IST
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नोएडा में गत दिनों गिरफ्तार नक्सली गैंग के स्लीपर सेल के दो सदस्यों को बुुधवार की रात बिहार के सासाराम में दबोचने में चंडौस में पकड़े नक्सलियों द्वारा दी गई जानकारी बहुत काम आई। सासाराम में दोनों नक्सली बड़े हथियार की खरीद-फरोख्त के इरादे से यहां से सासाराम वापस भेजे गए थे।
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यह कार्रवाई चंडौस के नक्सलियों आशीष व ब्रजमोहन से पूछताछ में उजागर तथ्यों के बाद अलीगढ़ एटीएस की तहरीरी रिपोर्ट पर हुई है। इधर, इन दोनों युवकों के स्थानीय कनेक्शन के हर व्यक्ति का सत्यापन जारी है। हथियार मुहैया कराने वाले कुछ लोग तो भूमिगत हो गए हैं।
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जो एटीएस के रडार पर हैं। उनको लेकर बेहद गोपनीय ढंग से ऑपरेशन चल रहा है। पांच दिन पहले नोएडा में हुई कार्रवाई के दौरान जब अपने जिले के चंडौस क्षेत्र के आशीष सारस्वत व ब्रजमोहन उर्फ ललुआ का नाम सामने आया तो अलीगढ़ एटीएस के भी कान खड़े हो गए थे। खुद एटीएस प्रभारी सुनील त्यागी यहां से उन दोनों से अलग से पूछताछ करने गए। इसके अलावा उनके गैंग के हर सदस्य से बारीकी से पूछताछ की। इस दौरान उनकी पूछताछ का लक्ष्य खैर से हथियार मुहैया कराने वाला नेटवर्क और अलीगढ़ जिले में उनके स्लीपर सेल तक पहुंचना था।
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इसी पूछताछ में बिहार के सासाराम जिले के सिपाही लाल व धर्मवीर उर्फ डीएस का नाम सामने आया था। इनके विषय में बताया गया कि आशीष व ब्रहमोहन ने खुद अपने स्तर से बड़ा हथियार मुहैया कराने की बात कही थी। मगर यह भी अंदेशा जताया था कि शायद बड़ा हथियार न मिल पाए। इस अंदेशे के चलते सिपाहीलाल व धर्मवीर अपने स्तर से देशी कारबाइन या एके-47 जैसे किसी बड़े हथियार की व्यवस्था के लिए सासाराम भेजे गए थे। जब उनका नाम सामने आया तो उनके खिलाफ तहरीरी रिपोर्ट दोनों को बुधवार को दबोच लिया गया है।

यह दोनों लंबे समय तक इस गैंग के साथ नोएडा में रहे हैं और उसी रीयल स्टेट कंपनी में काम किया है, जिसमें गैंग के अधिकांश सदस्य थे। उनसे वहां पूछताछ चल रही है। इधर, आशीष व ब्रजमोहन के स्थानीय संपर्कों के सत्यापन का काम अभी जारी है। एटीएस का फोकस उस ग्रुप पर है, जिसने हथियार मुहैया कराए थे। मगर वह इन दिनों भूमिगत चल रहे हैं। फिलहाल उनको लेकर गोपनीय ढंग से पूछताछ चल रही है।
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