{"_id":"80f660552027703ed35a871d4b06161e","slug":"police-retaliated-munsion-hitec-dictionary-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईटेक मुंशियों ने बदला पुलिस का ‘शब्दकोष’","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हाईटेक मुंशियों ने बदला पुलिस का ‘शब्दकोष’
अमर उजाला ब्यूरो/अभिषेक शर्मा
Updated Mon, 22 Feb 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी के शब्दों का समावेष कही जाने वाली पुलिस की शब्दावली में समय के साथ-साथ काफी बदलाव आ रहे हैं। अब तो कंप्यूटर के युग में हाईटेक मुंशियों के स्तर से ऐसे अननिगत शब्दों का प्रयोग ही बंद कर दिया गया जो तकनीकी रूप से आम समझ से दूर थे।
मगर पुलिस शब्दावली में प्रयोग में थे। कुल मिलाकर पुलिस की एफआईआर, जीडी (जनरल डायरी), सीडी (केश डायरी) से ऐसे ऐतिहासिक शब्द विलुप्त होते जा रहे हैं, जिन्हें पुराने पुलिसकर्मी हिंदुस्तानी शब्दकोष का हिस्सा कहते थे।
केंद्रीय योजना के तहत सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के तहत देश के सभी प्रदेशों की पुलिस को ऑनलाइन किया जा रहा है। इन दिनों यूपी में इस प्रोजेक्ट पर तेज गति से काम चल रहा है। अपने जिले में अब तक विजयगढ़ थाने को पेपर लैस कर दिया गया है।
विज्ञापन
यहां थाने की जीडी, एफआईआर, विवेचकों द्वारा केश डायरी तक ऑनलाइन लिखी जा रही है। सिस्टम के तहत एफआईआर, जीडी, सीडी का एक परफार्मा दिया गया है। उसमें अंग्रेजी के साथ-साथ एक छूट दी गई है कि प्रदेश स्तर पर क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे यूपी में अंग्रेजी के साथ हिंदी, पंजाब में अंग्रेजी के साथ गुरुमुखी का प्रयोग किया जा रहा है।
शब्दों के बदलाव की यह बड़ी वजहः सीसीटीएनएस सिस्टम शुरू होने के साथ-साथ प्रदेश पुलिस में प्रत्येक थाने को दो-दो कंप्यूटर ऑपरेटर दिए जा रहे हैं। अब खासतौर पर अंग्रेजी और हिंदी ज्ञान में दक्ष इन कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने यूपी पुलिस में प्रयोग होने वाले उर्दू, अरबी, फारसी के शब्दों को समझने में दिक्कत आई तो इन ऑपरेटरों ने अपने हिसाब से शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। जिन ऐतिहासिक शब्दों का प्रयोग अब तक हो रहा था। उनका प्रयोग भी अपनी जरूरत के हिसाब से हो रहा था। इसी तरह अब नई पीढ़ी के इन कंप्यूटर ऑपरेटरों ने भी अपने हिसाब से शब्दों का चयन शुरू कर दिया।
जरूरत के हिसाब से प्रयोग होते पुलिस के शब्दः पुलिस महकमे में उर्दू, अरबी, फारसी, संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी आदि भाषाओं के जानकार निरीक्षक इंस्पेक्टर कोतवाली हैदर रजा जैदी बताते हैं कि पुलिस में एक वाक्य को एक शब्द में पिरोने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया। वही चलन में आ गया। यह सही है कि नई पीढ़ी के पुलिसकर्मी उन शब्दों का प्रयोग कम कर रहे हैं। मगर कुछ शब्द ऐसे हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते। रहा सवाल इन ऐतिहासिक शब्दों का तो यह आम जनता के लिए कभी प्रयोग नहीं हुए।
विज्ञापन
मगर पुलिस शब्दावली में प्रयोग में थे। कुल मिलाकर पुलिस की एफआईआर, जीडी (जनरल डायरी), सीडी (केश डायरी) से ऐसे ऐतिहासिक शब्द विलुप्त होते जा रहे हैं, जिन्हें पुराने पुलिसकर्मी हिंदुस्तानी शब्दकोष का हिस्सा कहते थे।
विज्ञापन
केंद्रीय योजना के तहत सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के तहत देश के सभी प्रदेशों की पुलिस को ऑनलाइन किया जा रहा है। इन दिनों यूपी में इस प्रोजेक्ट पर तेज गति से काम चल रहा है। अपने जिले में अब तक विजयगढ़ थाने को पेपर लैस कर दिया गया है।
विज्ञापन
यहां थाने की जीडी, एफआईआर, विवेचकों द्वारा केश डायरी तक ऑनलाइन लिखी जा रही है। सिस्टम के तहत एफआईआर, जीडी, सीडी का एक परफार्मा दिया गया है। उसमें अंग्रेजी के साथ-साथ एक छूट दी गई है कि प्रदेश स्तर पर क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे यूपी में अंग्रेजी के साथ हिंदी, पंजाब में अंग्रेजी के साथ गुरुमुखी का प्रयोग किया जा रहा है।
शब्दों के बदलाव की यह बड़ी वजहः सीसीटीएनएस सिस्टम शुरू होने के साथ-साथ प्रदेश पुलिस में प्रत्येक थाने को दो-दो कंप्यूटर ऑपरेटर दिए जा रहे हैं। अब खासतौर पर अंग्रेजी और हिंदी ज्ञान में दक्ष इन कंप्यूटर ऑपरेटरों के सामने यूपी पुलिस में प्रयोग होने वाले उर्दू, अरबी, फारसी के शब्दों को समझने में दिक्कत आई तो इन ऑपरेटरों ने अपने हिसाब से शब्दों का प्रयोग शुरू कर दिया। जिन ऐतिहासिक शब्दों का प्रयोग अब तक हो रहा था। उनका प्रयोग भी अपनी जरूरत के हिसाब से हो रहा था। इसी तरह अब नई पीढ़ी के इन कंप्यूटर ऑपरेटरों ने भी अपने हिसाब से शब्दों का चयन शुरू कर दिया।
जरूरत के हिसाब से प्रयोग होते पुलिस के शब्दः पुलिस महकमे में उर्दू, अरबी, फारसी, संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी आदि भाषाओं के जानकार निरीक्षक इंस्पेक्टर कोतवाली हैदर रजा जैदी बताते हैं कि पुलिस में एक वाक्य को एक शब्द में पिरोने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया। वही चलन में आ गया। यह सही है कि नई पीढ़ी के पुलिसकर्मी उन शब्दों का प्रयोग कम कर रहे हैं। मगर कुछ शब्द ऐसे हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते। रहा सवाल इन ऐतिहासिक शब्दों का तो यह आम जनता के लिए कभी प्रयोग नहीं हुए।