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फर्जी फायर एनओसी दे रैकेट ने वसूली मोटी रकम-COR
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:29 AM IST
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अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़।
महानगर में नवनिर्मित कामर्शियल निर्माण, स्कूल, अस्पताल, बाजार में फायर सुरक्षा की फर्जी एनओसी बना कर देने वाला गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने वर्ष 2017 के मध्य में नवदुर्गा हास्पिटल संगम विहार क्वार्सी में फर्जी एनओसी दी थी, जिसके एवज में मोटा पैसा वसूला गया।
अस्पताल संचालक डॉक्टर को कई दिनों तक इसका इल्म नहीं हुआ। जब पूरे शहर में नर्सिंग होम और अस्पतालों की फायर एनओसी चेक कराई गई और असली अफसर इस अस्पताल में पहुंचे तो एनओसी का पत्र देख कर अधिकारियों का माथा ठनका। क्योंकि एनओसी का पूरा पत्र देखने में हूबहू असली लग रहा था। मुहर भी बिल्कुल विभागीय लग रही थी। बस अग्निशमन अधिकारी के हस्ताक्षर में गड़बड़ी थी।
दरअसल, अग्निशमन अधिकारी संजय जायसवाल लंबे हस्ताक्षर करते हैं, जबकि इस एनओसी पर अपेक्षाकृत छोटा हस्ताक्षर था। संजय जायसवाल तक मामला पहुंचा तो उन्होंने समझ लिया कि फर्जीवाड़ा हो गया है।
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एसएसपी को इस पूरे मामले से अवगत करा कर जांच कराने का आग्रह किया गया। जिस पर सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव को जांच सौंपी गई है।
एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि इस प्रकरण में जांच हो रही है। कितने मामलों में ऐसी एनओसी दी गई है। इसके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय हैं। इसके साथ ही क्रमबद्ध तरीके से सभी एनओसी चेक कराई जाएंगी।
गौर हो कि इस प्रकरण में अब तक हुई जांच में सामने आया है कि फायर ब्रिगेड से जुड़े एक कर्मी का करीबी ही पूरा रैकेट संचालित कर रहा था। जांच की भनक लगने के बाद इस रैकेट के कुछ लोगों से राजनीतिक सिफारिश लगाने लगे हैं, जिससे वह बच जाएं। फिलहाल जांच जारी है। एसएसपी कहते हैं कि इस मामले में एफआईआर भी कराई जाएगी।
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महानगर में नवनिर्मित कामर्शियल निर्माण, स्कूल, अस्पताल, बाजार में फायर सुरक्षा की फर्जी एनओसी बना कर देने वाला गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने वर्ष 2017 के मध्य में नवदुर्गा हास्पिटल संगम विहार क्वार्सी में फर्जी एनओसी दी थी, जिसके एवज में मोटा पैसा वसूला गया।
अस्पताल संचालक डॉक्टर को कई दिनों तक इसका इल्म नहीं हुआ। जब पूरे शहर में नर्सिंग होम और अस्पतालों की फायर एनओसी चेक कराई गई और असली अफसर इस अस्पताल में पहुंचे तो एनओसी का पत्र देख कर अधिकारियों का माथा ठनका। क्योंकि एनओसी का पूरा पत्र देखने में हूबहू असली लग रहा था। मुहर भी बिल्कुल विभागीय लग रही थी। बस अग्निशमन अधिकारी के हस्ताक्षर में गड़बड़ी थी।
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दरअसल, अग्निशमन अधिकारी संजय जायसवाल लंबे हस्ताक्षर करते हैं, जबकि इस एनओसी पर अपेक्षाकृत छोटा हस्ताक्षर था। संजय जायसवाल तक मामला पहुंचा तो उन्होंने समझ लिया कि फर्जीवाड़ा हो गया है।
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एसएसपी को इस पूरे मामले से अवगत करा कर जांच कराने का आग्रह किया गया। जिस पर सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव को जांच सौंपी गई है।
एसएसपी राजेश पांडेय ने बताया कि इस प्रकरण में जांच हो रही है। कितने मामलों में ऐसी एनओसी दी गई है। इसके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय हैं। इसके साथ ही क्रमबद्ध तरीके से सभी एनओसी चेक कराई जाएंगी।
गौर हो कि इस प्रकरण में अब तक हुई जांच में सामने आया है कि फायर ब्रिगेड से जुड़े एक कर्मी का करीबी ही पूरा रैकेट संचालित कर रहा था। जांच की भनक लगने के बाद इस रैकेट के कुछ लोगों से राजनीतिक सिफारिश लगाने लगे हैं, जिससे वह बच जाएं। फिलहाल जांच जारी है। एसएसपी कहते हैं कि इस मामले में एफआईआर भी कराई जाएगी।