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आतंकी मन्नान यूपी में ‘गुमशुदा’-Cordination
Updated Thu, 28 Jun 2018 02:24 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र रहे जिस मन्नान वानी को सेना ने कश्मीर के टॉप-10 आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया है, वह यूपी पुलिस के रिकार्ड में आज भी गुमशुदा ही दर्ज है। कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसा पुलिस ने जानबूझकर नहीं, बल्कि कानूनी मजबूरियों के चलते कर रखा है। जब तक उसके जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने की खबर नहीं मिलती, वह यूपी पुलिस के रिकार्ड में इसी तरह गुमशुदा ही रहेगा।
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का मन्नान वानी यहां एएमयू के हबीब हॉल में रहता था। बीती 2/3 जनवरी को उसके अचानक गायब होने के तीसरे दिन सोशल मीडिया पर उसका एक फोटो एके-47 के साथ आतंकी वेश में वायरल हुआ था। हिजबुल मुजाहिदीन प्रवक्ता ने उसके संगठन में शामिल होने की घोषणा भी की। इस खबर के वायरल होने पर अलीगढ़ से लेकर जम्मू तक की सभी जांच एजेंसियां हरकत में आ गईं।
इसी सिलसिले में जब 15 जनवरी को जम्मू पुलिस यहां आई। उसने एएमयू प्रशासन से सवाल किया कि आपके स्तर से क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई तो 16 जनवरी को आनन-फानन हबीब हॉल प्रोवोस्ट ने सिविल लाइंस में मन्नान की गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में उस गुमशुदगी सूचना को जम्मू पुलिस अपने साथ ले गई और यूपी पुलिस मुख्यालय ने भी इस संबंध में सभी एजेंसियों व जम्मू पुलिस मुख्यालय को अवगत करा दिया।
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घर वापसी नहीं करा पाईं एजेंसियां
जांच एजेंसियां मन्नान को तलाश रही हैं। सूत्रों की मानें तो करीब दो माह पहले उसे ट्रैक भी कर लिया गया। चूंकि वह पढ़ा लिखा युवा है, इसलिए एजेंसियों का पहला प्रयास था कि उसकी किसी तरह घर वापसी कराई जाए। जब इसमें सफलता मिलने की उम्मीद कम दिखी तो इस प्रयास में भी एजेंसियां पीछे हट गईं। इसके बाद अब उसे सेना ने कश्मीर घाटी में सक्रिय टॉप-10 आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया है। वहीं कानून के अनुसार सिविल लाइंस पुलिस के रिकार्ड व डीसीआरबी रिकार्ड में आज भी वह गुमशुदा है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खां इस बात की पुष्टि करते हैं।
एएमयू से अचानक गायब हुए कश्मीर निवासी छात्र मन्नान वानी के आतंकी बनने के एजेंसियों से इनपुट मिले। फोटो भी वायरल हुए। एएमयू की ओर से सिविल लाइंस में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। अब जब तक उसके पकड़े जाने या मारे जाने के साक्ष्य नहीं मिल जाते, तब तक कानूनन उसकी गुमशुदगी खत्म नहीं हो सकती। - अतुल श्रीवास्तव एसपी सिटी
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र रहे जिस मन्नान वानी को सेना ने कश्मीर के टॉप-10 आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया है, वह यूपी पुलिस के रिकार्ड में आज भी गुमशुदा ही दर्ज है। कानून के जानकार बताते हैं कि ऐसा पुलिस ने जानबूझकर नहीं, बल्कि कानूनी मजबूरियों के चलते कर रखा है। जब तक उसके जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने की खबर नहीं मिलती, वह यूपी पुलिस के रिकार्ड में इसी तरह गुमशुदा ही रहेगा।
जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का मन्नान वानी यहां एएमयू के हबीब हॉल में रहता था। बीती 2/3 जनवरी को उसके अचानक गायब होने के तीसरे दिन सोशल मीडिया पर उसका एक फोटो एके-47 के साथ आतंकी वेश में वायरल हुआ था। हिजबुल मुजाहिदीन प्रवक्ता ने उसके संगठन में शामिल होने की घोषणा भी की। इस खबर के वायरल होने पर अलीगढ़ से लेकर जम्मू तक की सभी जांच एजेंसियां हरकत में आ गईं।
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इसी सिलसिले में जब 15 जनवरी को जम्मू पुलिस यहां आई। उसने एएमयू प्रशासन से सवाल किया कि आपके स्तर से क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई तो 16 जनवरी को आनन-फानन हबीब हॉल प्रोवोस्ट ने सिविल लाइंस में मन्नान की गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में उस गुमशुदगी सूचना को जम्मू पुलिस अपने साथ ले गई और यूपी पुलिस मुख्यालय ने भी इस संबंध में सभी एजेंसियों व जम्मू पुलिस मुख्यालय को अवगत करा दिया।
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घर वापसी नहीं करा पाईं एजेंसियां
जांच एजेंसियां मन्नान को तलाश रही हैं। सूत्रों की मानें तो करीब दो माह पहले उसे ट्रैक भी कर लिया गया। चूंकि वह पढ़ा लिखा युवा है, इसलिए एजेंसियों का पहला प्रयास था कि उसकी किसी तरह घर वापसी कराई जाए। जब इसमें सफलता मिलने की उम्मीद कम दिखी तो इस प्रयास में भी एजेंसियां पीछे हट गईं। इसके बाद अब उसे सेना ने कश्मीर घाटी में सक्रिय टॉप-10 आतंकियों की सूची में शामिल कर लिया है। वहीं कानून के अनुसार सिविल लाइंस पुलिस के रिकार्ड व डीसीआरबी रिकार्ड में आज भी वह गुमशुदा है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खां इस बात की पुष्टि करते हैं।
एएमयू से अचानक गायब हुए कश्मीर निवासी छात्र मन्नान वानी के आतंकी बनने के एजेंसियों से इनपुट मिले। फोटो भी वायरल हुए। एएमयू की ओर से सिविल लाइंस में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। अब जब तक उसके पकड़े जाने या मारे जाने के साक्ष्य नहीं मिल जाते, तब तक कानूनन उसकी गुमशुदगी खत्म नहीं हो सकती। - अतुल श्रीवास्तव एसपी सिटी